अखबारों के बंद होने की कड़ी में एक और नाम शामिल हो गया है. भोपाल से प्रकाशित नईदुनिया ग्रुप का अखबार नई दुनिया फास्ट एक फरवरी से बंद हो गया. अब इस अखबार का प्रकाशन नहीं होगा. इस अखबार को 2001 में 17 अगस्त को लांच किया गया था. आठ पेज के इस अखबार को स्थानीय बनाने की योजना के तहत शुरू किया गया था तथा इसमें लोकल खबरों को प्रमुखता दी जाती थी. पर यह योजना सफल नहीं रही.
इस अखबार की जिम्मेदारी वरिष्ठ पत्रकार राजेश सिरोठिया को दी गई थी. राजेश आउटलुक से इस्तीफा देकर अखबार से जुड़े थे. इस अखबार की लांचिंग बीस हजार प्रतियों के साथ की गई थी तथा इसकी कीमत एक रुपये निर्धारित की गई थी. प्लानिंग थी कि अगर भोपाल में यह अखबार सफल रहा तो इसे एमपी के इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर तथा छत्तीसगढ़ के रायपुर से भी लांच किया जाएगा, पर ऐसा नहीं हो सका. खबर है कि प्रबंधन ने अच्छा रिस्पांस नहीं मिलने के बाद इसके विस्तार समेत सारे मामले को लगभग खतम कर दिया है.
बताया जा रहा है कि नई दुनिया प्रबंधन इस समय मुश्किल दौर से गुजर रहा है. अखबार के एमपी-सीजी संस्करणों में भी एक पेज कम कर दिए गए हैं. इसके पहले समूह का संडे नईदुनिया का युवा काकटेल भी बंद किया जा चुका है. बुधवार को पाठकों को दी जाने वाली नायिका पत्रिका को टैबलॉयड बना दिया गया है. अब बताया जा रहा है कि फास्ट के बाद बच्चों पर केंद्रित नई दुनिया दिशा बंद होने वाला है.





