सर जी नमस्ते, आप के माध्यम से लोगों तक यह जानकारी देना चाहता था कि हिन्दी पायनियर हो या इंग्लिश पायनियर, दोनों जगह दो महीने का वेतन रूका हुआ है। काम भी जम कर लिया जा रहा है और वेतन नहीं दिया जा रहा है। लोग अगर वेतन मांग रहे हैं तो उनसे कहा जा रहा है जहां मिल जाए वहां चले जाओ। वेतन देने में विजय प्रकाश लापरवाही कर रहे हैं और वेतन मांगने पर धमकी देते हैं। इतना ही नहीं वेतन मरने के चक्कर में लोग कहीं दूसरी जगह भी नहीं जा पा रहे हैं। कई लोग छोड़ना चाहते हैं पर छोड़ नहीं पा रहे हैं।
सुना है कि पायनियर के प्रधान सम्पादक मित्रा जी ने वहां सबका वेतन भेज दिया है पर इन्होंने यहां नहीं बाटा है और विजय प्रकाश सिंह ने अपने लिए एक नयी गाड़ी खरीद ली है। मित्रा जी पिछले आठ सालों से एक होण्डा सिटी गाड़ी से चल रहे हैं वहीं विजय प्रकाश सिंह हर साल-दो साल पर गाड़ियां खरीद रहे हैं। पायनियर में काम कर रहा हर कर्मचारी उनके पीठ पीछे उन्हें गालियां देता है पर उनके मुंह पर नहीं कह पाता। लोगों का वेतन खा कर गाड़ियां खरीद रहे विजय प्रकाश सिंह पायनियर के कर्मचारियों को कर्जे में डूबोते जा रहे हैं और अपने मौज कर रहे हैं। हिन्दी पायनियर की असफलता का सबसे बड़ा कारण विजय प्रकाश खुद हैं। लगातार पिट रहा हिन्दी पायनियर के कर्मचारियों को दो बार रद्दी बेच-बेच कर वेतन बांटा है। लगातार कर्मचारियों का शोषण कर रहे विजय प्रकाश सिंह कई लोगों की हाय ले रहे हैं। हम आपके माध्यम से चंदन मित्रा जी से कहना चाहते हैं कि वो दो महीने से रूका हम लोगों का वेतन दिलवाएं ताकि हम लोग चैन रह सकें।
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.






