नई दिल्ली : भ्रामक विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने को लेकर सरकार बेहद गंभीर है। सेल्फ रेग्युलेशन के नियमों से उपभोक्ता मामले मंत्रालय संतुष्ट नहीं है। मंत्रालय इसके लिए सख्त कानून बनाने पर विचार तो कर रहा है, लेकिन उसकी मंशा प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर नियंत्रण करने की बिल्कुल नहीं है। थॉमस ने कहा कि गंजेपन से छुटकारा, सेक्स पावर बढ़ाने और लंबाई बढ़ाने जैसे नुस्खों से उपभोक्ताओं का भारी नुकसान हो रहा है। गोरा बनाने वाली क्रीम और न जाने कितने ऐसे विज्ञापनों के झांसे से उपभोक्ताओं के साथ ठगी होती है।
उन्होंने किसी कंपनी का नाम लिए बगैर यह भी बताया कि नामी-गिरामी कंपनियों के उत्पादों के विज्ञापन भी बच्चों एवं महिलाओं के साथ धोखाधड़ी करते हैं। इनके विज्ञापन बेधड़क प्रसारित किए जाते हैं। थॉमस ने बताया कि ऐसे भ्रामक विज्ञापनों पर रोक के लिए प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में सेल्फ रेग्युलेशन है, जो कारगर नहीं है। इसके अलावा भी कई तरह के अलग-अलग कानून हैं, जिनमें विरोधाभास है। इसमें तत्काल संशोधन की जरूरत है। इसके लिए गठित उच्च स्तरीय कमेटी की कई बैठकों में इस पर चर्चा हो चुकी है। उनकी सिफारिशों पर विस्तार से विचार-विमर्श के लिए मार्च के पहले सप्ताह में राष्ट्रीय स्तर का सम्मेलन होगा। साभार : जागरण






