पटना : लगता है महुआ के पीछे विवादों का भूत पड़ गया है। अब तक आपाधापी और उठापटक तथा खर्चा कटौती के नाम पर चली उहापोह से ही छुटकारा नहीं मिल पाया था कि अब एक नया विवाद खड़ा हो गया। खबर है कि इस चैनल वाले 'के बनी करोड़पति' और 'के होबे कोटिपति' कार्यक्रम में अपनी क्षमता से रकम जीते लोग भुगतान पाने के लिए महीनों से दरदर भटक रहे हैं।
अमिताभ बच्चन वाले कौन बनेगा करोड़पति की सफलता को देखते हुए उसी तर्ज पर महुआ प्रबंधन ने भी माल पीटने के लिए इसका भोजपुरी और बांग्ला संस्करण शुरू किया था। बांग्ला कार्यक्रम की कमान प्रख्यात क्रिकेट खिलाड़ी एवं पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली और भोजपुरी वाले कार्यक्रम की कमान जानेमाने फिल्म अभिनेता और राजनीतिज्ञ शत्रुघ्न सिन्हा को थमाई गयी थी। हालांकि खबर है कि महुआ प्रबंधन के लिए यह कार्यक्रम गले की हड्डी की तरह हो गया। इससे कमाई होना तो दूर, उल्टे अपनी टेंट से ही पैसे खिसक गये। जाहिर है कि इस सीरियल से जुड़े कई लोगों का भुगतान भी लटक गया।
लेकिन ताजा खबरों के मुताबिक इन कार्यक्रमों में हॉट-सीट तक पहुंच कर जीत हासिल किये लोगों को उनकी रकम का भुगतान ही नहीं किया गया। ऐसा एक के साथ नहीं, बल्कि ज्यादातर लोगों के साथ हुआ बताया जाता है। ताजा मामला है सीमा कुमारी का, जिसने 9 और 12 जुलाई के एपीसोड में रकम जीती थी। अब सीमा और उसके पिता जीती गयी रकम हासिल करने के लिए जमीन-आसमान तक की भागादौड़ी कर रहे हैं। सीमा ने इस कार्यक्रम में एक लाख साठ हजार रुपयों की रकम जीती थी।
सीमा के पिता बिहार जल प्रदाय बोर्ड में अवर अभियंता के पद पर कार्यरत हैं। नाम है प्रभाकर पाण्डेय। इंद्रपुरी कालोनी में रहने वाले प्रभाकर पाण्डेय की खुशी का तब पारावार नहीं रहा जब उनकी बेटी सीमा कुमारी को फास्टेस्ट फिंगर फर्स्ट में शामिल कर लिया गया। सात जुलाई के एपीसोड में वह कार्यक्रम में भाग लेने पहुंची तो उस वक्त रामगढ़ के सरदार दलजीत सिंह खेल रहे थे। कोलकाता में शूट किये गये इस कार्यक्रम में लिए प्रभाकर और सीमा अपने खर्च पर ही कोलकाता पहुंचे थे। जाहिर है कि इस यात्रा पर ही उनका अच्छा-खासा खर्चा आ गया था। वैसे सरदार दलजीत को भी उनकी जीती रकम नहीं मिल सकी है।
बहरहाल, सीमा कुमारी ने इस कार्यक्रम में एक लाख साठ हजार रुपयों की जीत हासिल की, लेकिन उसे जीत के वक्त ही चेक अदा करने के बजाय बाद में देने का वायदा किया गया। हालांकि यह तरीका खेल के नियमों के प्रतिकूल था, लेकिन शायद प्रबंधकों की कोई व्यावहारिक दिक्कत हो, यह सोच कर सीमा और प्रभाकर पांडेय लौट आये। लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी जब चेक या रकम नहीं मिल सकी तो उन्होंने भागादौड़ी शुरू की। कहने की जरूरत नहीं कि यह भागादौड़ी अब तक जारी है, हालांकि इस बारे में वे लगभग सभी जिम्मेदार लोगों तक अपनी बात पहुंचा चुके हैं। वैसे जानकारों का कहना है कि भोजपुरी और बांग्ला के इन कार्यक्रमों में जीते ज्यादातर लोगों के साथ भी यही हुआ है।





