मुंबई। अमूमन किसी कत्ल से किसी शहर में किसी डॉन की दहशत ज्यादा बढ़ती है। उसके हफ्ते के रेट बढ़ जाते हैं, उसके पंटरों की डिमांड बढ़ जाती है। मुंबई के कई बिल्डर एक फोन पर इन सरगनाओं और पंटरों को फ्री में या सस्ते में प्लॉट या फ्लैट दे देते हैं। लेकिन जे. डे मर्डर के बाद छोटा राजन के साथ उलटा ही हुआ, उसने कुछ पाने के बजाय अपना बहुत कुछ गवां दिया। एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, किसी एक शूटआउट से किसी डॉन ने इससे पहले शायद ही कभी इतना नुकसान उठाया हो।
जे.डे के कत्ल के लिए छोटा राजन ने अपने सबसे खतरनाक शूटर सतीश कालिया को लगाया था। कालिया की गिरफ्तारी के बाद फिलहाल उसके पास कोई खास बड़ा शूटर नहीं बचा है। हालांकि अनिल वाघमोरे और अनिल ढाके जैसे कुछ और भी बड़े शूटर उसके पास थे, लेकिन जे. डे मर्डर में मुंबई क्राइम बांच ने उन्हें भी सतीश कालिया के साथ गिरफ्तार कर लिया, जो दिलीप सिसौदिया शूटरों को नैनीताल में पनाह देता था, वह भी जे. डे मर्डर में पकड़ा गया है और छोटा राजन के मुंबई के सबसे बड़े फाइनेंसर विनोद चेंबूर और पॉल्सन भी इस केस में अरेस्ट हो गए हैं।
इसी दौर में मुंबई क्राइम ब्रांच ने राजन के दो और खास लोगों उमेद उर रहमान और डी के राव को भी गिरफ्तार किया। हालांकि इन दोनों की गिरफ्तारी का जे. डे मर्डर से नहीं, बल्कि इकबाल कासकर की बिल्डिंग के नीचे हुई फायरिंग से ताल्लुक है, पर सच यह भी है कि मुंबई पुलिस इन दोनों के पीछे जे. डे मर्डर के बाद ही पड़ी। मुंबई क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी के अनुसार, आज की तारीख में राजन के पास कम से कम मुंबई में ऐसा कोई भी आदमी नहीं हैं, जो उसके एक फोन पर इस मायानगरी में दहशत फैला सके। कालाघोड़ा में राजन के कहने पर पुलिस खबरी अमजद खान और हिमांशु चौधरी का कत्ल करनेवाला ओसामा कुछ दिनों पहले इलाहाबाद में प्रतिद्वंद्वी गैंग द्वारा मारा जा चुका है।
यदि देखा जाए, तो राजन के पास इन दिनों सिर्फ एक ही बड़ा नाम बचा है और वह है विक्की मल्होत्रा, लेकिन विक्की भी मुंबई में नहीं है। हालांकि राजन के पास नयन सिंह जैसा भी एक साथी है, पर वह भी मुंबई में नहीं, बल्कि नेपाल में बैठकर सारा ऑपरेशन देखता है। उसका एक और एक साथी अबू सामंत भी विदेश में ही है। कभी राजन के पास शूटरों की भरमार हुआ करती थी। राजन के बाद सबसे खतरनाक शूटर अरुण गवली व अमर नाईक गैंग में हुए। क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी के अनुसार, यदि अंडरवर्ल्ड की पूरा इतिहास देखा जाए तो दाऊद गैंग के पास राजन और गवली की तुलना में अपने खुद के शूटर बहुत कम रहे।
जब राजन और दाऊद एक थे तब भी डी कंपनी ने राजन के शूटरों का इस्तेमाल सबसे ज्यादा किया मसलन माया डोलस, दिलीव बुवा का उदाहरण लिया जा सकता है, जिनके एनकाउंटर पर केंद्रित फिल्म शूटआउट एट लोखंडवाला बनी। लेकिन उसी दौर में और बाद में राजन के कई शूटर या तो मुठभेड़ में मार दिए गए या सन 2000 के बैंकॉक शूटआउट के बाद इनमें से कई खुद छोटा राजन से अलग हो गए। कभी राजन के पास हेमंत पुजारी, रवि पुजारी, गुरु साटम, एजाज लकड़ावाला, भरत नेपाली, विजय शेट्टी, संतोष शेट्टी, बंटी पांडे जैसे खतरनाक लोगों की एक लंबी फौज थी, लेकिन राजन के खुद के स्वार्थी व्यवहार ने उसके साथियों को धीरे-धीरे उससे अलग कर दिया। मुंबई क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी के दावों पर यदि यकीन करें तो राजन के पास आज उतने दोस्त नहीं है, जितने दुश्मन हैं।
जे डे मर्डर के बाद उसके दुश्मनों की लिस्ट में और भी इजाफा ही हुआ है, क्योंकि उसके खुद के गैंग के कुछ लोग भी एक पत्रकार के मर्डर के उसके फैसले को सही नहीं मानते। अपनी गिरफ्तारी से पहले खुद उमेद उर रहमान ने राजन को फोन कर सवालिया लहजे में पूछा था कि आखिर तुमने जे डे का मर्डर क्यों करवाया? साभार : एनबीटी





