सच तो एक परिंदा है, घायल है पर जिंदा है. लोकतंत्र यानि जनता का तंत्र पर वास्तव में क्या ऐसा है? क्या इस तंत्र में वोट देने के बाद जनता की कहीं कोई सुनवाई है? हर जगह हर पल उसे छला जाता है, दुत्कारा जाता है, एहसास कराया जाता है कि जनतंत्र सिर्फ कागज पर है, असली हुकुमत तो मनीमंत्र की है, इस राह पर चलने वाले नेताओं की है, अफसरों की है, सत्ताओं के दलालों की है, ठेकेदारों की है। ये सब एहसास कराते हैं और जनता तक जान चुकी है कि अपना वाजिब हक मांगने का भी उसे कोई हक नहीं। ऐसे में वो क्या करे-कहां जाए? माना कि रास्ते संकरे होते जा रहे हैं पर तस्वीर बदलने के वास्ते जरूरी है जनदखल।
दो राय नहीं कि जनता की पीड़ा को हरदम बढ़ाता करप्शन का कीड़ा बेकाबू है पर उसे ऐसे ही आगे बढ़ते और डसते नहीं देखा जा सकता। मीडिया को
अपनी जिम्मेदारियों के लिए और मुखर होना ही होगा। आज नहीं तो कल। आर के एस इम्प्रैसिव मीडिया प्राइवेट लिमिटेड इसी मिशन के तहत जनदखल बढ़ाने को हिंदी पत्रकारिता में कदम रख रही है। मिशन की आवाज होगी जनता और इस आवाज की नुमाइंदगी करेंगे रीतेश कुमार साहू और देशपाल सिंह पंवार। जन आवाज के साथ सांध्य दैनिक जनदखल का अगले माह पहला पड़ाव होगा रायपुर यानि छत्तीसगढ़ की राजधानी। जल्द ही राजस्थान, हरियाणा, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड, बिहार और झारखंड की राजधानियों की ओर भी जनदखल का रुख होगा। जनदखल पूरी शिद्दत के साथ जनता की आवाज बनेगा इसका विश्वास है। सबके स्नेह, सहयोग की आकांक्षा के साथ।

प्रेस विज्ञप्ति





