नई दिल्ली। धारावाहिकों और रीयलटी शो में काम करने वाले बच्चों को बच्चे ही रहने दिया जाए। राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग का यही कहना है। बाल कलाकारों से अभिनय करवाते समय बच्चों की मानसिक, भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक हालात की चिंता करते हुए और उन पर होने वाले शोषण को रोकने के लिए बाल आयोग ने सिफारिश की है कि टीवी चैनलों में बच्चों से अभिनय करवाते उनसे द्विअर्थी, अश्लील या भद्दे संवाद कहलाने या उनसे हिंसात्मक दृश्य कराए जाने पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए।
मुंबई के कईं स्टूडियो में जाकर धारावाहिकों और रीयलटी शो में हिस्सा लेने वाले बाल कलाकारों की दशा का जायजा लेने के बाद बाल आयोग ने टीवी चैनलों के लिए यह दिशा-निर्देश जारी किया है। आयोग ने दिशा-निर्देश सूचना और प्रसारण मंत्रालय को भेज दिया है। बाल कलाकारों की दशा का जायजा लेने के लिए आयोग ने १४ जनवरी २००८ को एक कार्यसमूह का गठन किया था। कार्यसमूह ने स्टूडियो में जाकर इस बात का जायजा लिया कि बाल कलाकारों के साथ सेट पर कैसा व्यवहार होता है और उन्हें क्या सुविधाएं दी जा रही हैं। सेट पर डॉक्टर होते हैं या नहीं। उन्हें आराम का समय दिया जाता है या नहीं। उन्हें स्कूल जाने, पढ़ाई करने और खेलने के लिए कितना वक्त दिया जाता है? इसी कार्यसमूह की सिफारिशों के आधार पर यह दिशा-निर्देश तैयार किया गया है।
आयोग के इस दिशा-निर्देश के मुताबिक टीवी चैनलों से कहा गया है कि वह बाल कलाकारों से कोई ऐसा अभिनय नहीं कराए जाए जिससे उनके मानसिक या भावनात्मक स्थिति पर कोई गलत असर प़ड़े। बच्चों से शराब, सिगरेट या किसी भी तरह के नशे के सेवन का दृश्य फिल्माने, किसी भी हालत में बच्चे के या उसके सामने किसी और कलाकार के नंगे दृश्य न फिल्माए जाने, किसी अपराध या दुर्घटना के पीडि़त बच्चों से जु़ड़ी सच्ची कहानियों से संबंधित बच्चों के कार्यक्रम दिखाने पर बेहद सावधानी बरते जाने की सिफारिश की गई है। बच्चों से द्विअर्थी, अश्लील और भद्दे संवाद नहीं कहलाने और इसी तरह बच्चों से शारीरिक या मानसिक हिंसा से संबंधित दृश्य नहीं फिल्माने का भी सुझाव दिया गया है।
दिशा-निर्देश में कहा गया है कि रीयलटी शो में जब जब किसी कार्यक्रम में प्रतियोगियों पर कोई टिप्पणी करें तो इस बात का ध्यान रखा जाए कि पराजित होने वाला बच्चा किसी भी तरह उनकी टिप्पणी से आहत नहीं हो। आयोग की सिफारिश के मुताबिक निर्माता-निर्देशकों को इस बात का ध्यान रखना होगा कि छोटे बच्चों से कम समय में काम लें। इस दिशा-निर्देश के मुताबिक बाल कलाकार केवल एक शिफ्ट में काम कर सकता है और हर एक घंटे के बाद उसे ब्रेक देना होगा। तीन महीने से कम समय के बच्चे के लिए उसकी मां का वहां होना जरूरी है, ताकि वह हर थो़ड़ी देर पर स्तनापान कर सके। शूटिंग के दौरान बच्चों के माता-पिता का स्टूडियो में रहना जरूरी होगा। स्टूडियो में बच्चों की सुरक्षा का पर्याप्त इंतजाम और वहां एक डॉक्टरों की मौजूदगी अनिवार्य होगी। साभार : नई दुनिया





