ज्यादातर बुराइयां और पिछड़ापन पढ़े-लिखे तबकों में ही देखने को मिलती हैं. आमिर खान ने इस बात को अपने कार्यक्रम सत्यमेव जयते में भी प्रूव किया कि लड़की भ्रूण हत्या बड़े शहरों तथा कथित रूप से सांभ्रांत लोगों में ही ज्यादा होता है. इसी तरह की एक बेवकूफी भरा फैसला सामने आया है पुणे में. यहां की एक कंपनी सीनटेल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में काम करने वाले रोहित कुमार (बदला हुआ नाम) को कंपनी से इसलिए निकाल दिया गया और उनसे जबरदस्ती इस्तीफा ले लिया गया कि वे एचआईवी पॉजिटिव हैं.
रोहित, जिनका कर्मचारी आईडी कोड 30320 है, को कंपनी प्रबंधन ने इन्हें कार्यालय के अंदर घुसने तक पर रोक लगा दी. इनसे लगभग जबरदस्ती करते हुए इस्तीफा मांग लिया गया, जबकि एनालिस्ट प्रोग्रामर के रूप में रोहित के काम से कंपनी को कोई शिकायत नहीं थी (हालांकि कंपनी ने इस्तीफा मांगने का कारण रोहित की अनुपस्थिति को बताया है) इस तरह के परेशानी के दौर में किसी को सबसे ज्यादा सामाजिक एवं सांस्थानिक सहयोग की जरूरत होती है, उस स्िथति में एक कर्मचारी के साथ इस तरह का व्यवहार कहां तक जायज कहा जा सकता है.
सबसे बड़ी बात यह है कि प्रदेश तथा राज्य सरकारें तमाम माध्यमों से लोगों को इस बात की जानकारी बार-बार देती रहती हैं कि एचआईवी किसी के साथ खाने-पीने, सोने-उठने-बैठने या साथ रहने से नहीं फैलती है, बल्कि एचआईवी किसी पीडि़त व्यक्ति का खून किसी भी माध्यम से दूसरे व्यक्ति के खून में मिलने के बाद होती है. इसके बाद भी सीनटेल प्रबंधन का यह रवैया अत्यन्त ही निंदनीय है. इसका हर स्तर पर विरोध किया जाना चाहिए.








