: ज़ी न्यूज़ के लोगों ने पुलिस का सम्मन लेने से मना कर दिया : ब्लैकमेलिंग और जबरन वसूली मामले में ज़ी न्यूज़ के सुधीर चौधरी और जी बिजनेस के समीर आहलूवालिया पर दो धाराएं बढ़ा दी गई हैं. पहले धारा 384 के तहत ही एफआईआर दर्ज की गई थी. सूत्रों के मुताबिक सीडी की जांच और उसमें मौज़ूद बातचीत सुनने के बाद जांचकर्ताओं ने धारा 511 और 120 बी भी लगा दी है. ज़ी ग्रुप के दोनों संपादकों के स्टिंग की सीडी को दिल्ली पुलिस ने सीएफएसएल जांच के लिए आज भेज दिया.
पुलिस सूत्रों के मुताबिक सीडी में इतने मजबूत साक्ष्य हैं कि इन दोनों की गिरफ्तारी आराम से की जा सकती है, अगर पुलिस बिना किसी दबाव के काम करे तब. उधर, पता चला है कि ज़ी न्यूज़ से जुड़े सभी लोगों और गार्डों तक को बता दिया गया था कि अगर पुलिस की तरफ से कोई नोटिस या सम्मन आए तो उसे रिसीव नहीं करना है. बाद में ऐसा ही हुआ. दोपहर करीब एक बजे दिल्ली पुलिस की तरफ से सम्मन ले कर सिपाही आया तो गार्डों ने सम्मन रिसीव नहीं किया.
इस सम्मन में समीर आहलूवालिया को कल दो बजे और सुधीर चौधरी को 11 तारीख को शाम चार बजे पूछताछ के लिए बुलाया गया है. लेकिन दोनों ने ज्यादा से ज्यादा वक्त हासिल करने के लिए ये सम्मन नहीं लिए. बताया जा रहा है कि जी न्यूज का प्रबंधन और संपादकीय स्टाफ के कुछ खास लोग पूरे प्रकरण को डायलूट करने के लिए हर स्तर पर प्रयास करने में जुट गए हैं. चर्चा है कि तेजतर्रार छवि के अफसर राजेन्द्र बख्शी, जिनके पास ये केस है, उनका ट्रांसफर करवाने के लिए ज़ी न्यूज़ के रिपोर्टरों ने गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस के चक्कर लगाने शुरू कर दिए हैं. पुरानी सत्ता में मलाई काट चुके राजनैतिक ब्यूरो के सदस्यों को नेताओं और सियासी लोगों से सेटिंग करने की ज़िम्मेदारी दी गई है और वो पूरी लगन के साथ इस काम में लग गए हैं.
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