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यूपी न्‍यूज में सैलरी को लेकर बवाल, उमेश जोशी को बनाया बंधक

एसटीवी ग्रुप का यूपी न्यूज़ में माहौल खराब हो गया है। सैलरी को लेकर प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच टकराव की नौबत आ गई है। कांडा के जेल जाने के बाद से चैनल मुश्किलों में आ गया है। यूपी न्‍यूज के कर्मचारी उमेश जोशी से नाराज हैं तथा आरोप लगा रहे हैं कि उमेश जोशी के बरगलाने की वजह से ही पत्रकारों और तकनीकी कर्मचारियों को मैनेजमेंट बेदखल करना चाहता है। प्रबंधन यूपी न्‍यूज पहले ही बंद कर दिया है अब कर्मचारियों को निकालने की कवायद चल रही है। इसी क्रम में प्रबंधन एवं यूपी न्‍यूज के कर्मचारियों के बीच टकराव की नौबत भी आई। कर्मचारियों ने उमेश जोशी को घंटों तक उनके केबिन में ही बंधक बनाए रखा तथा अपनी मांगे मनवाने के लिए दबाव देते रहे। 

एसटीवी ग्रुप का यूपी न्यूज़ में माहौल खराब हो गया है। सैलरी को लेकर प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच टकराव की नौबत आ गई है। कांडा के जेल जाने के बाद से चैनल मुश्किलों में आ गया है। यूपी न्‍यूज के कर्मचारी उमेश जोशी से नाराज हैं तथा आरोप लगा रहे हैं कि उमेश जोशी के बरगलाने की वजह से ही पत्रकारों और तकनीकी कर्मचारियों को मैनेजमेंट बेदखल करना चाहता है। प्रबंधन यूपी न्‍यूज पहले ही बंद कर दिया है अब कर्मचारियों को निकालने की कवायद चल रही है। इसी क्रम में प्रबंधन एवं यूपी न्‍यूज के कर्मचारियों के बीच टकराव की नौबत भी आई। कर्मचारियों ने उमेश जोशी को घंटों तक उनके केबिन में ही बंधक बनाए रखा तथा अपनी मांगे मनवाने के लिए दबाव देते रहे। 

 
22 अक्टूबर को मामला उस समय गरम हो गया जब हरियाणा न्यूज़ के एडिटर इन चीफ़ उमेश जोशी ने संस्थान में कई जगहों पर यूपी न्यूज़ के पत्रकारों को बेदखल करने की नोटिस चस्पा करवा दिया। इससे माहौल पूरी तरह गरम हो गया। नोटिस को देखकर नाराज युवा पत्रकारों ने जब उमेश जोशी से बात करनी चाही तो जोशी ने यूपी न्यूज़ के पत्रकारों और तकनीकी कर्मचारियों से एप्वाइंटमेंट लेटर की मांग कर दी। जबकि हकीकत है कि यूपी न्यूज़ के कर्मचारियों की सैलरी बैंक एकाउंट में आती है और पीएफ/इएसआई भी कटता है। लेकिन किसी भी पत्रकार को इएसआई रजिस्ट्रेशन या पीएफ नंबर नहीं मिला। 
 
पत्रकारों ने तुरंत ही एप्वाइंटमेंट लेटर दिए जाने को लेकर उमेश जोशी को उनके ही कमरे में दो घंटे से अधिक देर तक बंधक बनाए रखा। इस दौरान उमेश जोशी और पत्रकारों से तीखी नोकझोंक भी हुई। उमेश जोशी ने माहौल गड़बड़ाता देख नोटिस को तत्काल वापस ले लिया और मात्र दो दिन में पत्रकारों की मांगों को पूरा करने का लिखित आश्वासन दिया है। पत्रकारों की मांग है कि 2 महीने का बकाया वेतन (जो उन्होंने काम किया है और वेतन नहीं मिला है) दिया जाए और तीन महीने का अलग से वेतन देकर ही निकाला जा सकता है। इस मुद्दे को लेकर उमेश जोशी ने दो दिन का समय मांगा है। अब 25 अक्टूबर (गुरुवार) को मैनेजमेंट को बुलाकर बातचीत करने का आश्वासन उमेश जोशी ने दिया है। 25 अक्टूबर को होने वाली मीटिंग पर ही सबकुछ टिका है। पत्रकार मांगें नहीं माने जाने पर कोर्ट, ब्राडकास्टिंग मिनिस्टी और लेबर कोर्ट जाने को भी तैयार हैं।
 
दूसरी तरफ कुछ लोगों का यह भी कहना है कि लोग अपने न्‍यूज डाइरेक्‍टर विवेक अवस्‍थी से क्‍यों नहीं सवाल करते हैं, जो उन्‍हें अधर में छोड़ कर चले गए। उल्‍लेखनीय है कि यूपी न्‍यूज के हेड एवं डाइरेक्‍टर विवेक अवस्‍थी थे। उन्‍होंने सैलरी के मामले को सुझलाए बिना खुद चैनल छोड़कर चले गए। कुछ लोगों का आरोप है कि जानबूझकर उमेश जोशी को बदनाम करने के लिए विवाद को जन्‍म दिया जा रहा है। उपरोक्‍त मामलों के संदर्भ में जब उमेश जोशी से बात की तो उन्‍होंने कहा कि बच्‍चों का गुस्‍सा स्‍वाभाविक है। बंधक बनाए जाने जैसी कोई बात नहीं हुई। मैं उन्‍हें सीधे मालिकों से मिलवाना चाहता हूं ताकि सभी बातों का हल निकल जाए, परन्‍तु मालिकों ने शनिवार से पहले मिलने में असमर्थता जताई है। उन्‍होंने कहा कि वो किसी को भी बेरोजगार किए जाने के पक्ष में नहीं है। चीजें जल्‍द ही सुलझ जाएंगी। कुछ लोग निजी स्‍वार्थ के लिए बच्‍चों को बरगला रहे हैं। 
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