आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर के बच्चों तनया एवं आदित्य द्वारा निर्मल बाबा के खिलाफ थाना गोमतीनगर, लखनऊ में मुक़दमा दर्ज कराने पर शशि यादव पुत्री बिमला यादव, निवासी सुशांत लोक, गुडगाँव द्वारा ज्युडिशियल मैजिस्ट्रेट, गुडगाँव के कोर्ट में इन चारों लोगों के खिलाफ मुक़दमा दर्ज करने के लिए जून 2012 को प्रार्थनापत्र दिया गया था.
यह शिकायत धारा 295ए आईपीसी (एक समूह की धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाना) के अंतर्गत की गयी थी. शिकायत में कहा गया था कि इन बच्चों सहित चारों व्यक्तियों द्वारा निर्मल बाबा के खिलाफ अनुचित शब्दों का प्रयोग कर तथा एफआईआर दर्ज कर उनकी धार्मिक भावनाओं पर चोट पहुँचाया गया है. आशु कुमार जैन, ज्युडिशियल मैजिस्ट्रेट, गुडगाँव ने अपने निर्णय में कहा कि शशि यादव द्वारा अपने आरोपों के पक्ष में कोई समुचित साक्ष्य नहीं दिया जा सका.
निर्णय में कहा गया कि प्रथमदृष्टया भी यह बात प्रमाणित नहीं किया गया कि निर्मल बाबा किसी अलग धर्म को प्रतिबिंबित कर रहे हैं जिससे उस धर्म के अनुनायियों की भावनायें आहत हुई हों. इन तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने शशि यादव द्वारा अमिताभ, नूतन और उनके दोनों बच्चों पर निर्मल बाबा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और उनके प्रति अनुचित शब्द कह कर उनके अनुनायियों की धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाने सम्बंधित शिकायत शुरुआती सुनवाई में ख़ारिज कर दी.