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हिंदी आउटलुक और गीता श्री के दस साल पूरे

 

Geeta Shree : कल हिंदी आउटलुक के प्रकाशन के 10 साल पूरे हो गए…साथ ही मुझे भी…दस साल पहले अगस्त में मैंने इस ग्रुप को ज्वाइन किया था। इस बीच कई साथी आए गए..मैं वहीं टिकी रही। मैंने वहां रहते हुए अपने पत्रकारीय जीवन के बेहतरीन दौर जिए, खूब काम किए, जिसमें वैविध्य भी था और उपलब्धियों के अवसर भी। बहुत कुछ सीखा और पाया। इस कुंठा से बची रही कि पत्रकारिता में घोर निराशा होती है..मैंने वहीं रहते हुए अपनी रचनात्मक जमीन भी तलाश ली। मुझे काम करने की जो आजादी मिली उसके लिए संपादक-त्रयी का शुक्रिया। विनोद मेहता, आलोक मेहता और वर्तमान संपादक नीलाभ मिश्रा। ये तस्वीर ताजा है, अपने फेवरेट एडटर विनोद मेहता के साथ..जिनकी तरह हिंदी में लिखने की कोशिश करती रही हूं। नीलाभ जी अपने आप में पत्रकारिता के गुरुकुल हैं..उनकी पाठशाला में पत्रकारिता के पाठ से लेकर जीवन का पाठ भी सीखा..हमें दोस्ताना माहौल में काम करने की आदत पड़ चुकी है। मैं इस समय जश्नी मूड में हूं…कि ईदी खाने-देने भी जाना है दोस्तों के घर…

 

Geeta Shree : कल हिंदी आउटलुक के प्रकाशन के 10 साल पूरे हो गए…साथ ही मुझे भी…दस साल पहले अगस्त में मैंने इस ग्रुप को ज्वाइन किया था। इस बीच कई साथी आए गए..मैं वहीं टिकी रही। मैंने वहां रहते हुए अपने पत्रकारीय जीवन के बेहतरीन दौर जिए, खूब काम किए, जिसमें वैविध्य भी था और उपलब्धियों के अवसर भी। बहुत कुछ सीखा और पाया। इस कुंठा से बची रही कि पत्रकारिता में घोर निराशा होती है..मैंने वहीं रहते हुए अपनी रचनात्मक जमीन भी तलाश ली। मुझे काम करने की जो आजादी मिली उसके लिए संपादक-त्रयी का शुक्रिया। विनोद मेहता, आलोक मेहता और वर्तमान संपादक नीलाभ मिश्रा। ये तस्वीर ताजा है, अपने फेवरेट एडटर विनोद मेहता के साथ..जिनकी तरह हिंदी में लिखने की कोशिश करती रही हूं। नीलाभ जी अपने आप में पत्रकारिता के गुरुकुल हैं..उनकी पाठशाला में पत्रकारिता के पाठ से लेकर जीवन का पाठ भी सीखा..हमें दोस्ताना माहौल में काम करने की आदत पड़ चुकी है। मैं इस समय जश्नी मूड में हूं…कि ईदी खाने-देने भी जाना है दोस्तों के घर…

 

 
Richa Choudhary Patrakarita ke charmotkarsh tak pahuchen ap- aisi meri shubhkamnaaen hain…..
 
Geeta Shree शुक्रिया रिचा…मेरे साथ की बहुत सी महिला पत्रकार बीच में ही करियर छोड़ गईं…मैं हिली नहीं..मुझे अपनी जगह चाहिए थी…बना रही हूं..थोड़ी बहुत बनाई..हालांकि हिलाने वाले लगे रहते हैं…हम तो अंगद के पांव हैं..जम गए तो जम गए..
 
Awesh Tiwari बड़की बहिन बधाई
 
Geeta Shree आवेश भाई….शुक्रिया….
 
Manish Agrawal Geeta Shree: असल में पत्रकारों को अंगद के पांव की तरह जमना आना ही चाहिए, वरना कोई भी हल्का सा हवा का झोंका (नैराश्य का भाव) आपको उड़ाकर ले जाने के लिए काफी होता है।
 
Manish Agrawal शुभकामनाएं।।।।
 
Mukta Pathak best wishes
 
Achlendra Katiyar Wow a long journey…
 
राजू मिश्र बधाई।
 
Manoj Malayanil मुबारक हो!
 
Pappu Kumawat like this
 
Shikha Varshney Jo jame rahna chahte hain uneh kaun hila paya hai . Unhin bulandi par jhande gadte rahiye aseem shubhkamnayen.
 
डॉ. सुधा उपाध्याय सार्थक mai iss pariwaar ka hissa kab banugee
 
Anupam Ojha Badhaai ho Geeta Ji aapko aur samuche Outlook parivar ko. Is Samooh ne patrkarita ko ek kamyaab unchaai par banaye rakkha hai. Meri shubhkamnayen.
 
Rakesh Singh samast outlook parivar ko haardik badhai !!
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