युवा फिल्मकार अनुराग कश्यप को बतौर अतिथि संपादक हिन्दुस्तान के न्यूजरूम में देखना एक सुखद अनुभव था। संपादकीय टीम के साथ उन्होंने लंबा वक्त बिताया। न्यूजलिस्ट को बारीकी से देखा और देश-दुनिया की खबरों पर चर्चा की। कुछ खबरों के साथ हम आपको अनुराग द्वारा उन्हें चुनने का कारण भी बता रहे हैं।
अनुराग कश्यप के मुताबिक लोगों की जिंदगी से सीधे जुड़ने वाली जानकारियों को सबसे ज्यादा अहमियत देनी चाहिए। खबरों की लिस्ट देखें तो.. करप्शन का खुलासा बड़ी बात है। मगर मिस्टर केजरीवाल ने इसे आईपीएल बना डाला है। एक के बाद एक.. फटाफट। इससे मुद्दों की गंभीरता खत्म होती है। एक बहस पूरी हुई नहीं, दूसरी शुरू। ..जो सवाल खड़े किए, यूं ही खो गए। मगर ये मसले गंभीर हैं। पाठकों को झकझोरते हैं।
अगर खबरों को छांटने की बात की जाए तो मेरे हिसाब से उन जानकारियों को सबसे ज्यादा अहमियत दी जानी चाहिए है जो सीधे लोगों की जिंदगी से जुड़ी हैं। मुझे अखबार तैयार करना है तो मैं इसे फिल्म यानी विजुअल की तरह संवारूंगा। अच्छी फोटो को पूरी जगह मिलनी चाहिए। फोटो इस तरह से छांटी जाए जिससे खबर का मर्म सामने आता हो। मसलन, सुपरस्टॉर्म सैंडी की खबर में अमेरिका की प्रचलित खुशहाल सी प्रतीकात्मक तस्वीर लगाने का कोई मतलब नहीं। यहां विध्वंस की भयावहता दिखनी चाहिए। बुधवार के हिन्दुस्तान में पहले पन्ने पर बहुत सटीक फोटो लगी है। वैसे, इस समूह की पत्र-पत्रिकाओं से मेरा नाता पुराना है। छोटा था तो नंदन पढ़ता था।
बनारस में कॉलेज के दिनों में हिन्दुस्तान का साथ रहा और कादंबिनी भी पढ़ी। इसके अलावा विजुअल के तौर पर ग्राफिक का अपना महत्व होता है। कई बार पाठक के पास ज्यादा वक्त नहीं होता, ऐसे में छोटे विजुअल के संग जानकारियां देना बहुत अच्छा है। मेरा मानना है कि चाहे फिल्म हो या अखबार, दर्शक या पाठक के लिए चीजें एक खास क्रम से पेश की जाएं तो असर गहरा होता है। अगर एक जैसे मिजाज की खबरें आस-पास या आपस में गूंथकर लगाएं तो यह ज्यादा प्रभावी लगेगा और बात पाठक के जेहन में आसानी से दर्ज होगी। (हिंदुस्तान)