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शैलेंद्रमणि का चौदह साल का राज खत्‍म, अब प्रिंट लाइन में सीकेटी का नाम

चौदह साल तक गोरखपुर में दैनिक जागरण की गद्दी संभालने वाले शैलेंद्र मणि को वनवास पर भेजे जाने की तैयारी शुरू कर दी गई है. अखबार को गोरखपुर में नई उंचाई देने वाले शैलेंद्रमणि के वनवास की खबरें तभी से आनी शुरू हो गई थी, जब चंद्रकांत त्रिपाठी उर्फ सीकेटी से बरेली की गद्दी छीनकर गोरखपुर भेजा गया था. पहली बार शैलेंद्रमणि को संपादकीय से हटाकर केके शुक्‍ला को प्रभारी बनाकर वनवास पर भेजने की शुरुआत की गई थी. इसके बाद भी प्रकाशक के रूप में शैलेंद्रमणि का नाम दैनिक जागरण के प्रिंट लाइन में जा रहा था.

चौदह साल तक गोरखपुर में दैनिक जागरण की गद्दी संभालने वाले शैलेंद्र मणि को वनवास पर भेजे जाने की तैयारी शुरू कर दी गई है. अखबार को गोरखपुर में नई उंचाई देने वाले शैलेंद्रमणि के वनवास की खबरें तभी से आनी शुरू हो गई थी, जब चंद्रकांत त्रिपाठी उर्फ सीकेटी से बरेली की गद्दी छीनकर गोरखपुर भेजा गया था. पहली बार शैलेंद्रमणि को संपादकीय से हटाकर केके शुक्‍ला को प्रभारी बनाकर वनवास पर भेजने की शुरुआत की गई थी. इसके बाद भी प्रकाशक के रूप में शैलेंद्रमणि का नाम दैनिक जागरण के प्रिंट लाइन में जा रहा था.

परन्‍तु फाइनली 24 नवम्‍बर 2011 को शैलेंद्र मणि पूर्ण रूप से पैदल कर दिए गए. अब उनकी जगह चंद्रकांत त्रिपाठी का नाम प्रकाशक के रूप में जाने लगा है. 1997 से गोरखपुर में दैनिक जागरण का काम देख रहे शैलेंद्र मणि को चौदह साल बाद यानी 2011 में जागरण ने प्रिंट लाइन से हटा दिया है. तमाम विवादों के बावजूद दैनिक जागरण को गोरखपुर में ऊंचाई पर पहुंचाने वाले शैलेंद्र मणि के भविष्‍य को लेकर अब चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है. लोग जानना चाह रहे हैं कि क्‍या होगा शैलेंद्र मणि का? उन्‍हें संस्‍थान से विदा कर दिया जाएगा या फिर बिना राजपाट के ही गोरखपुर में रखा जाएगा. वैसे अभी तक स्‍पष्‍ट नहीं हो पाया है कि आगे शैलेंद्र मणि किस रोल में रहेंगे.

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