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भविष्‍य को लेकर अमर उजाला के कर्मचारी परेशान

 

अमर उजाला के बिक जाने की खबर के बाद से अखबार के कर्मचारी परेशान हैं. उन्‍हें अपने भविष्‍य के साथ नए मीडिया समूह के कार्य प्रणाली को लेकर भी चिंता हो रही है. कम से कम अमर उजाला में काम करने को लेकर कर्मचारियों में कभी बहुत ज्‍यादा परेशानी नहीं रही. अमर उजाला में काम करना पत्रकारों के लिए गौरव की बात रही है क्‍योंकि अन्‍य दूसरे अखबारों में गाली-ग्‍लौज और चम्‍मचागिरी का बोलबाला रहा है तो अमर उजाला में यह माहौल बहुत कम या कह सकते हैं कि ना के बराबर रहा है. 

 

अमर उजाला के बिक जाने की खबर के बाद से अखबार के कर्मचारी परेशान हैं. उन्‍हें अपने भविष्‍य के साथ नए मीडिया समूह के कार्य प्रणाली को लेकर भी चिंता हो रही है. कम से कम अमर उजाला में काम करने को लेकर कर्मचारियों में कभी बहुत ज्‍यादा परेशानी नहीं रही. अमर उजाला में काम करना पत्रकारों के लिए गौरव की बात रही है क्‍योंकि अन्‍य दूसरे अखबारों में गाली-ग्‍लौज और चम्‍मचागिरी का बोलबाला रहा है तो अमर उजाला में यह माहौल बहुत कम या कह सकते हैं कि ना के बराबर रहा है. 
 
अब जब जी समूह ने इस अखबार को खरीद लिया है तो पत्रकार भी परेशान हैं. कुछ समय पहले ही जी समूह के दो संपादकों पर 100 करोड़ रुपये ब्‍लैकमेलिंग करने के आरोप लगे हैं. इस स्थिति में अमर उजाला के नए मालिकों के हाथ में जाने के बाद काम का माहौल कैसा रहेगा इसको लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है. साथ ही समूह कितने लोगों को हटाएगा, निकालेगा या फिर कर्मचारियों के साथ क्‍या करेगा इसको लेकर भी लोगों की नसें तनने लगी हैं. जिस तरीके से कुछ समय पहले दैनिक जागरण के हाथों बिकने के बाद नईदुनिया का माहौल बिगड़ा और कई पुराने लोगों को बाहर जाना पड़ा कुछ वैसी ही चिंता अमर उजाला के लोगों में है.
 
गौरतलब है कि नईदुनिया, जिसे एमपी-छत्‍तीसगढ़ में जनसरोकारी पत्रकारिता के लिए जाना जाता था, जहां काम करके लोग गौरवान्वित होते थे, जिस अखबार ने कई बड़े और नामी पत्रकार दिए, का माहौल अब पूरी तरह बिगड़ चुका है. गाली-ग्‍लौज, अपमान इस अखबार में काम करने वालों की रूटीन में शामिल हो गया है. अमर उजाला के लोग भी इसी तरह की बातों को लेकर चिंतित हैं. खासकर सीनियर पदों पर बैठे लोग, जिन्‍हें समझ में नहीं आ रहा है कि वे आगे कौन सा कदम उठाएं. फिलहाल कुछ वरिष्‍ठों ने बातचीत में कहा कि वे फिलहाल हवा का रूख देख रहे हैं, अगर स्थितियां अनुकूल रहीं तो ठीक, नहीं तो नए ठिकाने की तलाश की जाएगी. 
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