अभी-अभी एक बड़ी और अच्छी खबर आ रही है कि प्रबंधन अब अमर उजाला को नहीं बेचेगा. जी समूह के साथ बातचीत बेनतीजा रहा. बताया जा रहा है कि अमर उजाला प्रबंधन और जी समूह में कुछ शर्तों पर बात नहीं बन पाई. एक बार फिर अमर उजाला के बिकने की खबर निराधार साबित हुई. हालांकि इनवेस्टमेंट को लेकर बातचीत लगभग आखिरी दौर में था, पर कुछ शर्तों ने सारी प्रक्रिया को समाप्त कर दिया.
अमर उजाला के न बिकने की खबर जनसरोकारी पत्रकारिता करने वाले लोगों के अच्छी खबर है. सच भी यही है कि कोई भी नहीं चाहता था कि अमर उजाला जैसा ब्रांड और पत्रकारों की बेहतरी चाहने वाला संस्थान ऐसे लोगों के हाथों बिके जिनके माथे पर ब्लैकमेल करने का आरोप लगा हुआ है. अमर उजाला के लाखों पाठक भी इस खबर से हतप्रभ थे. कल तक माना भी जा रहा था कि यह डील लगभग फाइनल है. अमर उजाला के उच्च प्रबंधन से भी ऐसा ही संकेत मिल रहा था. पर खबर बाहर आने तथा कुछ शर्तों पर सहमति नहीं बन पाने से यह डील आखिरी समय में खतम कर दिया गया.
पहले जी समूह द्वारा खरीदे जाने तथा बाद में शेयर खरीदने को लेकर खबरें बाहर आई थी. परन्तु बाद में स्पष्ट हो गया कि अब ये डील पूरी तरह से कैंसिल कर दी गई है. बात केवल बातचीत के स्तर तक ही रह गया. हालांकि ये पता नहीं चल पाया है कि किन शर्तों को लेकर यह डील नहीं हो पाई. पर इस खबर से अमर उजाला के कर्मचारी राहत की सांस ले सकेंगे. क्योंकि नईदुनिया के बाद अमर उजाला का बिकना जनसरोकारी पत्रकारिता के लिए बहुत बड़ा झटका होता, क्योंकि अमर उजाला की पहचान अपने कर्मचारियों को सम्मान देने वाले संस्थान के रूप में होती है.