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पटना में दैनिक जागरण ने हिंदुस्‍तान को दिया जोर का झटका

 

पटना शहर में हिन्दुस्तान को करारा झटका लगा है। पटना के पुराने एजेंट मेसर्स आजाद न्यूज एजेंसी ने हिन्दुस्तान की एजेंसी छोड़ जागरण का दामन थाम लिया है और पहले दिन से ही हिन्दुस्तान की तुलना में जागरण की 25 हजार कापी ज्यादा खपा कर राजधानी की मीडिया सर्किल में हलचल मचा दी है। इसके साथ ही पटना शहर में दो दर्जन से अधिक मिनी एजेंटों को बहाल कर जागरण प्रबंधन ने अन्य अखबारों की नींद हराम कर दी है। आजाद परिवार की गणना हिन्दुस्तान के वफादार न्यूज पेपर एजेंटों में की जाती थी। अधिक कापी की एजेंसी लेने के बाद पटना शहर में देखते ही देखते जागरण छा सा गया है। 

 

पटना शहर में हिन्दुस्तान को करारा झटका लगा है। पटना के पुराने एजेंट मेसर्स आजाद न्यूज एजेंसी ने हिन्दुस्तान की एजेंसी छोड़ जागरण का दामन थाम लिया है और पहले दिन से ही हिन्दुस्तान की तुलना में जागरण की 25 हजार कापी ज्यादा खपा कर राजधानी की मीडिया सर्किल में हलचल मचा दी है। इसके साथ ही पटना शहर में दो दर्जन से अधिक मिनी एजेंटों को बहाल कर जागरण प्रबंधन ने अन्य अखबारों की नींद हराम कर दी है। आजाद परिवार की गणना हिन्दुस्तान के वफादार न्यूज पेपर एजेंटों में की जाती थी। अधिक कापी की एजेंसी लेने के बाद पटना शहर में देखते ही देखते जागरण छा सा गया है। 
 
इस सुनहरे अवसर का लाभ उठाने में प्रभात खबर फिसड्डी साबित हुआ क्योंकि पीके प्रबंधन की कमजोर पकड़ के कारण इस घटनाक्रम की उसे भनक तक नहीं लगी। बारी अब हिन्दुस्तान के सबसे बड़े एजेंट माने जाने वाले विनोद सिंह की है। जागरण ने इन पर डोरा डालना प्रारंभ कर दिया है। सम्पूर्ण उत्तर बिहार और मगध का एक बड़ा इलाका विनोद सिंह के हवाले है। यदि विनोद सिंह का हिन्दुस्तान से मोह भंग हुआ तो यह अखबार के लिए सबसे बड़ी बुरी खबर होगी। 
 
यह सब जानते हैं कि अखबार की प्रति बिके या नहीं, प्रिन्ट आर्डर को बढ़ा कर बरकरार रखने में एजेंटों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इसके एवज में कंपनी उनकी झोली को कई प्रकार के सौगातों से भरते रहती है। वैसे भी हिन्दुस्तान में रिडिंग मैटेरियल कम और विज्ञापनों की भरमार रहती है। जन समस्याओं को उजागर करने में तो हिन्दुस्तान कोसों दूर हो गया है क्योंकि इससे सरकार की आलोचना होगी और इसे मैनेजमेंट बर्दाश्त नहीं करेगा।
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