दुनिया के सबसे बड़े अखबार का दावा करने वाले जागरण प्रबंधन का क्रूर और अमानवीय चेहरा एक बार फिर उजागर हुआ है. जिस वरीय समाचार संपादक के मिस मैनेजमेंट के चलते पटना में सोनिया और प्रियंका प्रकरण को लेकर चार कर्मचारियों को कार्यालय आने से फिलहाल रोका गया है उनका तो पिछले माह काम करने के बावजूद खाते में वेतन नहीं भेजा गया, जबकि जिसके चलते इतनी बड़ी चूक हुई उन्होंने मोटी रकम ऐंठ ली और सारे कर्मचारियों को भी वेतन मिल गया.
प्रबंधन ने ये भी नहीं सोचा कि आखिर उनके बच्चे दीपावली कैसे मनाएंगे. वैसे यह मौलिक अधिकारों के साथ ही नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के विपरीत है. सवाल यह उठता है कि अगर मैनेजमेंट कोई और निर्णय लेना चाहता है तो जांच के नाम पर लीपा-पोती क्यों कर रहा है. इसमें तो इलाहाबाद उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश रहते समय नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के आधार पर तमाम फैसले देने वाले प्रेस काउंसिल के अध्यक्ष माननीय न्यायमूर्ति काटजू को हस्तक्षेप करना चाहिए. प्रबंधक बुरी तरह चुप्पी साधे बैठा है और कर्मचारियों को कोई सूचना भी नहीं दे रहा है.
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.
इस प्रकरण से संबंधित अन्य खबरों के लिए यहां क्लिक करें- dj letter