मुंबई में पत्रकार ज्योतिर्मय डे की हत्या के मामले में गिरफ्तार एशियन एज की महिला पत्रकार जिगना वोरा को कोर्ट ने एक दिसम्बर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। जिगना को कड़े कानून महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत गिरफ्तार किया गया है। मकोका कोर्ट के न्यायाधीश एसएम मोदक को उनके वकील ने एक आवेदन दिया, जिसमें जिगना ने आशंका जताई कि पुलिस उन पर अपराध स्वीकार करने के लिए दबाव डाल सकती है, लेकिन वे इस तरह का कोई खुलासा नहीं करना चाहतीं क्योंकि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है।
पुलिस जिगना को लेकर जैसे ही अदालत में घुसी, जिगना को उनके साथी मिले और वह जोर-जोर से रोने लगीं। सहयोगियों ने उन्हें धैर्य बनाए रखने को कहा। जिगना को आईपीसी की धाराओं 120-बी (साजिश), 302 (हत्या), 34 (सामान्य आशय) के अलावा शस्त्र अधिनियम की धाराओं तीन, 25 और 27 के तहत गिरफ्तार किया गया है। जिगना पर मकोका की 3 (1), 3 (2) और 3 (4) धाराएं भी लगाई गई हैं। पुलिस के अनुसार, जिगना ने अपराध जगत के सरगना छोटा राजन को कथित रूप से जेडे की मोटरसाइकिल का पंजीकरण नंबर उपलब्ध कराया था। छोटा राजन ने कथित रूप से हत्या की सुपारी दी थी क्योंकि जेडे ने उसके खिलाफ लेख लिखे थे। गौरतलब है कि 11 जून को मुंबई के पवई इलाके में डे की हत्या कर दी गई थी।
अभियोजक दिलीप शाह ने दलील दी कि पुलिस को जांच के दौरान पता चला कि जिगना ने छोटा राजन गिरोह को महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराई थीं, जिसके बाद जेडे की हत्या की गई। हालांकि अपराध के मकसद का अब तक पता नहीं चला है और पुलिस इस दिशा में जांच कर रही है। जिगना की पुलिस हिरासत की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस जानना चाहती है कि क्या उन्होंने डे के बारे में छोटा राजन या उसके गिरोह के किसी सदस्य को सीधे जानकारियां दी थीं। जिगना से पहले भी पूछताछ की जा चुकी है, लेकिन उन्होंने उस समय पुलिस को गुमराह किया था।
पुलिस आयुक्त अरूप पटनायक ने कहा कि गिरफ्तारी दोषी होने का संकेत नहीं है। उन्हें संदेह के आधार पर गिरफ्तार किया गया है और प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि उनकी भूमिका है, लेकिन जांच में सचाई सामने आएगी। ‘एशियन एज’ के स्थानीय संपादक हुसैन जैदी ने कहा कि मैं पिछले कुछ वर्षों से जिगना को जानता हूं। वह कुछ गलत नहीं कर सकती। आखिरकार सच सामने आएगा।
अदालत में अभियोजक ने जिगना की हिरासत की मांग करते हुए कहा कि पुलिस जिगना के टेलीफोन रिकॉर्ड और कम्प्यूटर डाटा का सत्यापन करना चाहती है ताकि उनकी कथित भूमिका की जांच हो। बचाव पक्ष के वकील गिरीश कुलकर्णी ने दावा किया कि इस मामले में गिरफ्तार 11वीं आरोपी जिगना के खिलाफ मामला पूरी तरह से अंधेरे में है क्योंकि पुलिस को यह नहीं पता कि इस महिला पत्रकार की क्या भूमिका थी। उन्होंने कहा कि पुलिस को अब तक स्पष्ट नहीं है कि जिगना की भूमिका साजिशकर्ता की थी या उकसाने वाले की। ऐसी स्थिति में मकोका के तहत गिरफ्तारी को सही नहीं ठहराया जा सकता। पुलिस ने उनका मोबाइल जब्त कर लिया है और कम्प्यूटर डाटा की जांच करना चाहती है। इसके लिए जिगना की हिरासत जरूरी नहीं थी।
वकील ने कहा कि पत्रकार का काम सूत्रों से बात करना, खबरें और लेख लिखना होता है तथा इसके लिए अपराध जगत से बात करने की भी जरूरत पड़ती है। हालांकि पुलिस के पास यह दिखाने के लिए कुछ नहीं है कि जिगना ने डे या उसकी हत्या के बारे में राजन से बात की थी। उल्लेखनीय है कि इस मामले में पुलिस ने अभी तक छोटा राजन गिरोह के 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जिनमें रोही थंगप्पन, जोसफ उर्फ सतीश कालिया, अभिजीत शिंदे, अरुण डाके, सचिन गायकवाड़, अनिल वाघमोडे, निलेश शिंदे, मंगलेश अगावने, विनोद असरानी, पॉलसन जोसफ और दीपक सिसोदिया शामिल हैं।





