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सहारा समूह के खिलाफ सेबी ने खटखटाया कोर्ट का दरवाजा

मुंबई : सहारा ग्रुप और कैपिटल मार्केट रेग्युलेटर सेबी की जंग क्लाइमेक्स की ओर बढ़ रही है। सहारा के बॉस सुब्रत रॉय और ग्रुप की दो कंपनियों के खिलाफ कार्यवाही शुरू करने के लिए सेबी ने मुंबई की अदालत का दरवाजा खटखटाया है। इन कंपनियों को इन्वेस्टर्स का पैसा लौटाने का आदेश दिया गया था। रेग्युलेटरी ऑर्डर नहीं मानने के चलते सहारा ग्रुप की इन कंपनियों को पैसा रिफंड करने के लिए कहा गया था।

मुंबई : सहारा ग्रुप और कैपिटल मार्केट रेग्युलेटर सेबी की जंग क्लाइमेक्स की ओर बढ़ रही है। सहारा के बॉस सुब्रत रॉय और ग्रुप की दो कंपनियों के खिलाफ कार्यवाही शुरू करने के लिए सेबी ने मुंबई की अदालत का दरवाजा खटखटाया है। इन कंपनियों को इन्वेस्टर्स का पैसा लौटाने का आदेश दिया गया था। रेग्युलेटरी ऑर्डर नहीं मानने के चलते सहारा ग्रुप की इन कंपनियों को पैसा रिफंड करने के लिए कहा गया था।

सेबी ने मुंबई मेट्रोपॉलिटन कोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें रॉय और उनकी कंपनियों के खिलाफ आपराधिक मामले में कार्यवाही शुरू करने की इजाजत मांगी गई है। सहारा ग्रुप की इन दो कंपनियों के नाम इंडिया रियल एस्टेट कॉर्पोरेशन और सहारा इंडिया हाउसिंग कॉर्पोरेशन हैं। इन कंपनियों ने करीब 3 करोड़ इन्वेस्टर्स से ऑप्शनली फुली कनवर्टिबल डिबेंचर्स (ओएफसीडी) के जरिए 24,000 करोड़ रुपए जुटाए हैं। इस मामले से वाकिफ एक सूत्र ने यह जानकारी दी है। कुछ ही दिनों पहले सहारा ने सिक्युरिटीज अपेलेट ट्राइब्यूनल (सैट) में अपील दायर की थी। इसमें उसने सेबी के उसकी ओर से दिए गए डॉक्युमेंट्स स्वीकार नहीं करने की शिकायत की है। सैट ने इस मामले में सेबी से जवाब मांगा है। वहीं, इस बारे में मार्केट रेग्युलेटर का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने ओएफसीडी के इन्वेस्टर्स की जानकारी देने के लिए सहारा को 10 दिन का वक्त दिया था। सेबी के मुताबिक, सहारा ग्रुप इस तय समय सीमा में यह जानकारी नहीं दे पाया। सहारा का कहना है कि उसने डेडलाइन के आखिरी दिन ट्रकों में पेपर भरकर सेबी ऑफिस में भेजे थे, जिनमें इन्वेस्टर्स की जानकारी दी गई थी।
 
इस बारे में सहारा के लीगल अडवाइजर्स में से एक ने कहा, 'हमें किसी आपराधिक शिकायत की जानकारी नहीं मिली है। जहां सेबी ने इन्वेस्टर्स डिटेल वाली सीडी अक्सेप्ट कर ली है, वहीं, वह इससे जुड़े डॉक्युमेंट्स लेने को वह राजी नहीं है। सहारा ने इसके लिए और समय की मांग की है। उसके लिए इतने कम समय में 30 करोड़ डॉक्युमेंट्स जमा करना लॉजिस्टिक्स के लिहाज से आसान नहीं था। रेग्युलेटर देरी के लिए सजा दे सकता है, लेकिन वह डॉक्युमेंट्स स्वीकार करने से इनकार नहीं कर सकता। सहारा का इस बारे में यही मानना है।' इस मामले में सहारा के प्रवक्ता ने कुछ भी कहने से मना कर दिया।
 
सेबी ने यह कहकर डॉक्युमेंट्स लेने से मना कर दिया था कि वे ऑफिस आवर्स के बाद पहुंचे थे। उसने यह भी कहा था कि वह कई बार में इन्हें जमा नहीं करेगा। इसके बाद सहारा ने रेग्युलेटर को लेटर लिखा था। इसमें उसने कहा था कि वह ओएफसीडी के हजारों इन्वेस्टर्स के ऐप्लिकेशंस किस्तों में भेज सकता है। उसने इसके लिए इस साल दिसंबर तक का वक्त मांगा था। सेबी ने सहारा की यह मांग ठुकरा दी थी। (ईटी)

 

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