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संजीव को बदायूं में सौंपी गई अमर उजाला की तात्‍कालिक जिम्‍मेदारी

 

: इसके पहले पीलीभीत का पूरा स्‍टाफ भी हो चुका है निलंबित : अमर उजाला बदायूं कार्यालय के पूरे स्टाफ को निलंबित करने की कार्रवाई के बाद संजीव पाठक को यहाँ तैनात कर दिया गया है. यह अब तक बरेली में ग्रामीण क्षेत्र के प्रभारी थे. इससे पहले संजीव बदायूं के ही ब्यूरो चीफ थे. बदायूं में तैनाती के दौरान रोडवेज बस अड्डे के पास शराब की दूकान पर एक रात शराब माफिया के गुर्गे से हुई मारपीट की घटना के बाद इनका भी फील्ड में निकलना लगभग बंद हो गया था. हालांकि बाद में शराब माफिया के प्रबंधक ने कार्यालय में आकर संजीव से माफी मांगी थी, पर वह खोया हुआ सम्मान पुनः हासिल नहीं कर पाए. तभी लोकसभा चुनाव के पहले इन्हें यहाँ से हटा कर बरेली तैनात किया गया.

 

: इसके पहले पीलीभीत का पूरा स्‍टाफ भी हो चुका है निलंबित : अमर उजाला बदायूं कार्यालय के पूरे स्टाफ को निलंबित करने की कार्रवाई के बाद संजीव पाठक को यहाँ तैनात कर दिया गया है. यह अब तक बरेली में ग्रामीण क्षेत्र के प्रभारी थे. इससे पहले संजीव बदायूं के ही ब्यूरो चीफ थे. बदायूं में तैनाती के दौरान रोडवेज बस अड्डे के पास शराब की दूकान पर एक रात शराब माफिया के गुर्गे से हुई मारपीट की घटना के बाद इनका भी फील्ड में निकलना लगभग बंद हो गया था. हालांकि बाद में शराब माफिया के प्रबंधक ने कार्यालय में आकर संजीव से माफी मांगी थी, पर वह खोया हुआ सम्मान पुनः हासिल नहीं कर पाए. तभी लोकसभा चुनाव के पहले इन्हें यहाँ से हटा कर बरेली तैनात किया गया.
 
बदायूं जिले के ही क़स्बा उघैती के निवासी होने के कारण प्रबंधन ने तात्कालिक व्यवस्था की दृष्टि से संजीव को यहाँ तैनात किया गया है. अभी यह निश्चित नहीं है कि संजीव पाठक यहाँ रहेंगे अथवा नहीं. ख़बरों की संख्या बढ़ाने के लिए अमर उजाला के तहसील रिपोर्ट्स को और अधिक सक्रिय कर दिया गया है. उधर इसी तरह की कार्रवाई अमर उजाला प्रबंधन पीलीभीत में भी कर चूका है. 11 मई 2011 को पीलीभीत पुलिस ने दो स्‍थानों पर छापा मारकर आठ लड़कियों सहित पन्‍द्रह लोगों को गिरफ्तार किया था, जिसमें अमर उजाला का क्राइम रिपोर्टर राजेश शर्मा भी शामिल था. राजेश की गिरफ्तारी के बाद अमर उजाला प्रबंधन ने पूरे स्टाफ को हटा दिया था. ऐसे में लोग यह भी चर्चा करने लगे हैं कि बरेली में तैनात एक बड़ा अधिकारी नोयडा तक तमाम कमियों को नहीं पहुँचने देता, जिससे स्वार्थी और चरित्रहीन लोगों का हौसला बढ़ता चला जाता है और फिर एक दिन अचानक खुलासा होने पर शीर्ष प्रबंधन को ऐसे निर्णय लेने पड़ते हैं.  
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