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पोंटी के साथ डूब गयी कई राजनेताओं और अधिकारियों की काली कमाई

 

: छिपाना भी हुआ मुश्किल और बताना भी हुआ मुश्किल : देहरादून : पोंटी चड्ढा की मौत के साथ कई राज भी दफन हो गए। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में शराब और चीनी कारोबार सहित खनन और रियल स्टेट में दोनों राज्य के कई राजनेताओं और ब्यूरोक्रेटस का काला धन लगा था जो पोंटी चड्ढा के मरने के बाद डूब गया है। पोंटी चड्ढा की वेव कम्पनी में मात्र व्यवसायिक घरानों का ही नहीं बल्कि राजनेताओं और अधिकारियों का काला धन भी लगा था। यह बात केवल या तो पोंटी चढ्ढा ही जनता था या फिर काला धन लगाने वाले अधिकारी और राजनेताओं को ही पता था कि उन्होंने कितना पैसा लगाया है। 

 

: छिपाना भी हुआ मुश्किल और बताना भी हुआ मुश्किल : देहरादून : पोंटी चड्ढा की मौत के साथ कई राज भी दफन हो गए। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में शराब और चीनी कारोबार सहित खनन और रियल स्टेट में दोनों राज्य के कई राजनेताओं और ब्यूरोक्रेटस का काला धन लगा था जो पोंटी चड्ढा के मरने के बाद डूब गया है। पोंटी चड्ढा की वेव कम्पनी में मात्र व्यवसायिक घरानों का ही नहीं बल्कि राजनेताओं और अधिकारियों का काला धन भी लगा था। यह बात केवल या तो पोंटी चढ्ढा ही जनता था या फिर काला धन लगाने वाले अधिकारी और राजनेताओं को ही पता था कि उन्होंने कितना पैसा लगाया है। 
 
हालांकि अब इस बात के कोई सबूत नहीं है कि पोंटी की कम्पनियों में किसका कितना धन लगा हुआ है। वहीं दूसरी तरफ पोंटी के मरने के बाद आर्थिक नुकसान उसके परिवार को भी हुआ है। एक जानकारी के अनुसार पोंटी की काली कमाई का करोडों रुपया कई व्यवसाय में लगा हुआ था। पोंटी की हत्या के बाद यह धन भी डूब गया है जानकारों का कहना है कि काली कमाई से अर्जित किया गया धन या तो मरने वाले के साथ डूब जाता है और इस तरह के धन को लगाने वाले भी खुल कर सामने नहीं आ पाते हैं। 
 
कहा जा रहा है कि जिन नेताओं और अधिकारियों ने पोंटी की कम्पनी में काला धन लगाया था उन्होंने अपने कार्यकाल में पोंटी से शराब और चीनी मिल की खरीद में अरबों कमाए। सूत्रों का यहां तक कहना है कि उत्तराखंड की सरकारी क्षेत्र की चार चीनी मिलों को घाटे वाली बताकर पोंटी को पीपीपी मोड़ में देने की तैयारी हो चुकी थी लेकिन मामला खुल जाने के बाद सरकार की यह योजना धरी की धरी रह गई। जानकारों का कहना है कि जिन नेताओं और अधिकारियों का काला धन डूबा है उनके घरों में पोंटी के मरने के बाद से मातम का माहौल है। उनकी बिडम्बना है कि वे अपना दुःख न किसी को बता सकते हैं और न यह कह सकते हैं कि पोंटी के साथ उनका पैसा भी डूब गया।
 
देहरादून से नारायण परगाई की रिपोर्ट. 
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