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अपने वायदों से मुकरती सपा सरकार

समाजवादी सरकार चुनाव के समय किए गये वायदों से बदल गई है। वह इन वायदों को नाकार तो नहीं रही है, लेकिन कुछ नुक्ते लगाकर चुनाव के समय की गई घोषणाओं के साथ खुलकर मजाक किया जा रहा है। सपा प्रमुख से लेकर अदने से नेता और कार्यकर्ता तक को हर वह शख्स और संस्था गलत लगने लगी है जो उसकी सरकार या उसके मुखिया-मुख्यमंत्री पर उंगली उठाता है। समाजवादी चाहते हैं कि वह कुछ भी करते रहें कोई भी फैसला लें उस पर किसी तरह को कोई सवाल न खड़ा किया जाए। उनसे कुछ पूछा न जाए। समाजवादी ठीक वैसे ही सरकार चलाना चाहते हैं जैसे मायावती चलाती थीं, बसपा सुप्रीमो को उनका अहंकार ले डूबा था, परंतु लगता है कि इससे सबक लेने के बजाए समाजवादी पार्टी सरकार भी बसपा के पदचिंहों पर चलते हुए ‘खुदकुशी’ करना चाहती है।

समाजवादी सरकार चुनाव के समय किए गये वायदों से बदल गई है। वह इन वायदों को नाकार तो नहीं रही है, लेकिन कुछ नुक्ते लगाकर चुनाव के समय की गई घोषणाओं के साथ खुलकर मजाक किया जा रहा है। सपा प्रमुख से लेकर अदने से नेता और कार्यकर्ता तक को हर वह शख्स और संस्था गलत लगने लगी है जो उसकी सरकार या उसके मुखिया-मुख्यमंत्री पर उंगली उठाता है। समाजवादी चाहते हैं कि वह कुछ भी करते रहें कोई भी फैसला लें उस पर किसी तरह को कोई सवाल न खड़ा किया जाए। उनसे कुछ पूछा न जाए। समाजवादी ठीक वैसे ही सरकार चलाना चाहते हैं जैसे मायावती चलाती थीं, बसपा सुप्रीमो को उनका अहंकार ले डूबा था, परंतु लगता है कि इससे सबक लेने के बजाए समाजवादी पार्टी सरकार भी बसपा के पदचिंहों पर चलते हुए ‘खुदकुशी’ करना चाहती है।

बसपा सुप्रीमो मायावती ने जनभावनाओं का अनादर करते हुए पत्थरों पर पैसा बहाया था तो अखिलेश सरकार को प्रदेश के विकास से अधिक चिंता उन संसदीय क्षेत्रों की सता रही है जहां से उसके कद्दावर नेता जीते हैं। विकास की तमाम योजनाएं वीआईपी संसदीय क्षेत्रों इटावा, कन्नौज, मैनपुरी, फिरोजाबाद के लिए बनाई जा रही हैं। इसी तरह मुलायम के गॉव सैफई और आजम के विधान सभा क्षेत्र रामपुर को भी तरजीह दी जा रही है। उस पर संसदीय कार्य मंत्री और सपा सरकार के नंबर दो के नेता समझे जाने वाले आजम खॉ साहब तुर्रा यह देते है, ‘इसमें गलत क्या है वैसे भी यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार होता है कि वह अपनी पसंद के जिलों में काम कराए। फिर पिछले पांच साल में सैफई-कन्नौज के साथ क्या हुआ, यह किसी को याद क्यों नहीं आता? रूकी कई योजनओं को शुरू करना गलत कैसे हो गया?’

आजम का यह बयान 5861 करोड़ रुपये के अनुपूरक बजट के दौरान आया। पिछले दिनों अपने खर्चों को पूरा करने के लिए प्रदेश की अखिलेश सरकार ने अनुपूरक बजट पेश किया था, लेकिन विपक्ष यह देख कर हतप्रभ रह गया कि अनुपूरक बजट सैफई-कन्नौज आदि कुछ क्षेत्रों तक सिमट कर रह गया था। बसपा ने तो अनुपूरक बजट को थैली भरने का नाटक ही करार दे दिया। वहीं भाजपा के नेता सदन हुकुम सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार ने विकास कार्यों को तीन-चार जिलों तक ही केन्द्रित कर दिया है। उन्होंने बजट में इटावा, सैफई और कन्नौज के लिये ज्यादा धनराशि का प्रावधान किए जाने पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि क्या समाजवाद की यही परिभाषा है? बजट मे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 16 जिलों में अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाओं के लिए दो करोड़ और जबकि सैफई जैसे छोटे से गॉव के लिए 25 करोड़ का प्रावधान कैसे तर्कसंगत हो सकता है।

सैफई महोत्सव और इटावा नुमाइश में 50-50 लाख रूपये खर्च किया जाना विपक्ष को रास नहीं आया। विपक्ष ने इन खर्चों को जनता की गाढ़ी कमाई की बर्बादी करार दिया तो समाजवादी सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं पावर लूम बुनकरों के बिजली के बिल माफ करने, मुस्लिम बालिकाओें को आर्थिक मदद योजना, डॉ लोहिया ग्राम विकास योजना, कन्या विद्याधन योजना को लेकर भी सरकार को कटघरे में खड़ा किया गया। कांग्रेस के प्रदीप माथुर ने सपा पर हमला बोला और कहा मौजूदा सरकार भी पिछली सरकार के नक्शे कदम पर चल रही है। निचले स्तर पर काफी गड़बड़ियॉ हैं, जिन्हें दुरूस्त किया जाना चाहिए। हमलावर बसपा ने कहा अभी तक पहले ही बजट की स्वीकृतियां ही जारी नहीं हुई है। इससे प्रदेश भर में विकास कार्य ठप पड़े हैं। नहरों में पानी नहीं है और सिल्ट की सफाई नहीं हो रही है, जबकि बेरोजगारी भत्ता और लैपटॉप-टैबलेट के नाम पर पैसे का दुरुपयोग किया जा रहा है। सरकार किसान हितैषी होने का दावा करती है लेकिन गन्ना मूल्य निर्धारण अभी तक नहीं हो पाया है।

यह और बात थी कि विपक्ष सरकार के ऊपर गरम तो था, लेकिन एकजुटता की कमी के चलते वह सरकार के लिए कोई मुश्किल नहीं खड़ी कर पाया, जबकि मुद्दों की कोई कमी नहीं थी। यहां यह भी देखने को मिला एक ही मुद्दे को राजनैतिक पार्टियां अपने-अपने हिसाब से भुनाना चाहती हैं। कानून व्यवस्था की स्थिति में तो सभी सुधार चाहते थे, गन्ना मूल्य 400 रुपये करने की मांग पूरा विपक्ष कर रहा था, लेकिन एक होकर नहीं सभी ने अलग-अलग बहिर्गमन किया। विपक्ष की फूट साबित कर रही थी कि सभी दलों के नेताओं का ध्यान किसी समस्या के समाधान से अधिक अपनी राजनैतिक रोटियां सेंकने पर ज्यादा था। इस फूट की चुटकी सत्ता पक्ष भी लेता दिखा। सरकार ने गोलमोल जवाब देकर विपक्ष को टरका दिया। इतना ही नहीं साम्प्रदायिक दंगों के लिए भी सरकार ने विपक्ष को ही जिम्मेदार ठहरा दिया। आजम खॉ ने इसे साम्प्रदायिक ताकतों की करतूत बताया। आजम ने ऐसा पहली बार नहीं कहा था कुछ दिनों पूर्व वह यूपी के दंगों के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भी संदेह व्यक्त कर चुके थे। उनका इशारा हमेशा भाजपा की तरफ रहता है, यह और बात है कि उनकी सरकार यह सब जानते, बुझते हुए भी भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करने से संकोच करती रहती है।

समाजवादी पार्टी जिस तरह से सरकार चला रही है, उससे तो यही लगता है कि पॉच वर्ष पूरे होते-होते यह सरकार पूरी तरह से अपनी विश्वनीयता खो न दे। समाजवादी सरकार कहीं विफल दिखाई दे रही है तो कई मौकों पर जनता को बरगला भी रही है। कम से कम विधान सभा चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी के घोषणा-पत्र में जनता से किए जाने वायदों के साथ तो ऐसा हो ही रहा है। अभी तक समाजवादी सरकार ने जिनती भी घोषणाएं पूरी करने की है, करीब-करीब सभी घोषणाओं में एक-दो नुक्ते लगा कर उसकी मूल भावना को तिलांजलि दे दी गई है। इस मामले में सभी अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं, चाहें वह मुसलमान हों या फिर अन्य वोटर। बात मुसलमानों की कि जाए तो समाजवादी पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में कहा था कि उनकी सरकार बनने पर दसवीं पास सभी मुस्लिम बालिकाओं को आगे की शिक्षा ग्रहण करने अथवा विवाह हेतु 30 हजार रुपये की आर्थिक मदद की जाएगी, लेकिन जब सरकार बनी तो इसमें जोड़ दिया गया कि मदद उन लड़कियों को ही मिलेगी जिनके परिवार की वार्षिक आय 36 हजार रूपये सलाना से कम होगी।

इसी प्रकार अपने घोषणा पत्र में जेल में बंद बेकसूर मुस्लिम नौजवानों को फौरन रिहा करने और उन्हें मुआवजे के साथ इंसाफ की बात कहने वाली समाजवादी पार्टी ने सरकार बनते ही बेकसूरों की रिहाई के लिए जो प्रक्रिया अपनाई उस पर अच्छा खासा विवाद खड़ा हो गया। सरकार को कोर्ट से तो फटकार लगी ही केन्द्र सरकार ने भी उसे सोच-समझ कर निर्णय लेने की बात कह कर कटघरे में खड़ा कर दिया। ऐसा ही बेरोजगारी भत्ता बांटते समय उम्र की सीमा का बंधन लगाकर किया गया। ऐसा ही नजारा आने वाले दिनों में लैपटॉप और टैबलेट वितरण के समय भी देखने को मिल सकता है। इस मामले में भी सरकार की नियत साफ नजर नहीं आ रही है। इसी तरह से किसानों का 50 हजार तक का कर्ज माफ करते समय भी नुक्ता जोड़ दिया गया कि केवल उन्हीं किसानों का कर्ज माफ होगा जो दस प्रतिशत कर्ज का भुगतान कर चुके होंगे। सपा सरकार के ऐसे तमाम पहलू और घोषणाएं हैं जिस पर जनता अपने आप को ठगा महसूस कर रही है। समाजवादी पार्टी और सरकार को इस समय अगर कुछ राजनैतिक फायदा मिल रहा है तो उसकी वजह विपक्ष का बिखराव है जो उसके हौसलों को बाग-बाग किए हुए है।

अनुपूरक बजट में वीआईपी प्रावधान

– कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कानपुर के इटावा प्रांगण में कृषि अभियांत्रिकी एवं प्रोद्योगिकी महाविद्यालय के निर्माण कार्य हेतु रूपये 1,00,00,000 की आवश्यकता।
    
– लोहिया ग्रामीण आवास योजना के अन्तर्गत रुपये 36000 तक वार्षिक आय की सीमा वाले परिवारों को लाभान्वित किए जाने हेतु रुपये 125,00,00,000 की अतिरिक्त आवश्यकता।
    
– विधान मण्डल क्षेत्र विकास निधि योजना हेतु रूपये 126,00,00,000 की अतिरिक्त आवश्यकता।
    
– अम्बेडकर नगर में लोहिया भवन के निर्माण कार्य पूर्ण कराये जने  हेतु रूपये 1,50,00,000 की अतिरिक्त  आवश्यकता।
    
– इटावा में कुक्कुट हैचरी के अवशेष निर्माण कार्य तथा आवासीय भवनों के निर्माण  कार्य हेतु रूपये 25,00,000 की आवश्यकता।
    
– आजमगढ़ के बूढ़नपुर क्षेत्र में दुग्धशाला की स्थापना हेतु रुपये 75,00,000 तथा जनपद कन्नौज में दुग्ध डेयरी की स्थापना रुपये 75,00,000 अर्थात कुल रुपये 1,50,00,000 की आवश्यकता।
    
– कन्नौज में क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण हेतु रुपये 1,00,00,000 की आवश्यकता।
    
– जनपद रामपुर में स्पोर्टस काम्पलेक्स के निर्माण हेतु रुपये 1,00,00,000 की आवश्यकता।
    
– आपातकालीन अवधि में मीसा एवं डीआईआर में बंद प्रदेश के राजनैतिक बंदियों को सम्मान राशि के भुगतान हेतु रुपये 16,40,00,000 की अतिरिक्त आवश्यकता।
    
– रूरल इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सैफई इटावा में पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट के संचालनार्थ रुपये 1,50,00,000 की अतिरिक्त आवश्यकता।
    
– जनपद कन्नौज में पैरामेडिकल इन्स्टीट्यूट की स्थापना हेतु रुपये 50,00,000 की आवश्यकता।
    
– मेडिकल कालेज, कन्नौज परिसर में हृदय रोग अस्पताल की स्थापना हेतु रुपये 50,00,000 तथा कैन्सर अस्पताल की स्थापना हेतु रुपये 50,00,000 अर्थात् कुल रुपये 1,00,00,000 की आवश्यकता।
   
–  जनपद कन्नौज, औरैया के राजकीय पॉलीटेक्निकों में उपकरण तथा फर्नीचर आदि के क्रय हेतु रुपये 18,72,00,000 की आवश्यकता।
    
– अरबी फारसी मदरसों के सेवा निवृत्त कर्मचारियों के पेंशन भुगतान हेतु रुपये 1,00,00,000 की अतिरिक्त आवश्यकता। मदरसा आधुनिकीकरण योजना हेतु रुपये 20,00,00,000 की अतिरिक्त आवश्यकता तथा 36 हजार रुपये तक वार्षिक आय वाले अल्पसंख्यक समुदाय के अभिभावकों की कक्षा दस पास पुत्रियों को आगे की शिक्षा ग्रहण करने अथवा विवाह हेतु रुपये 30 हजार का अनुदान प्रदत्त किये जाने की योजना हेतु रुपये 250,00,00,000(250 करोड़) की आवश्यकता, जिसमें वित्तीय वर्ष 2012-13 में उत्तर प्रदेश आकस्मिकता निधि से स्वीकृत अग्रिम रुपये 20,00,00,000 की प्रतिपूर्ति भी सम्मिलित है।
    
– मुख्यमंत्री एवं मंत्री आवासों की साज-सज्जा एवं अनुरक्षण हेतु रुपये 28,45,000 तथा अधिकारियों/कर्मचारियों के आवासों के अनुरक्षण हेतु रुपये 21,55,000 की अतिरिक्त आवश्यकता।
    
– सैफई-इटावा में राजकीय बालिका इण्टर कालेज की स्थापना हेतु रुपये 1,00,01,000 की आवश्यकता।
    
– जनपद इटावा में केन्द्रीय विद्यालय की स्थापना के लिए भूमि के क्रय हेतु रुपये 4,23,13,000 की आवश्यकता।
    
– कुरावली (मैनपुरी) में राजकीय महिला महाविद्यालय की स्थापना हेतु रुपये 50,00,000 की आवश्यकता।
    
– जनपद कन्नौज में राजकीय महिला महाविद्यालय की स्थापना हेतु रुपये 50,00,000 की आवश्यकता।
    
– कन्या विद्याधन योजनान्तर्गत रुपये 150,00,00,000 (150 करोड़) की अतिरिक्त आवश्यकता।
    
– सैफई महोत्सव 2012 के आयोजन से संबंधित विभिन्न व्ययों हेतु रुपये 50,00,000 की आवश्यकता।
    
– इटावा नुमाइश पंडाल के विस्तारीकरण हेतु रुपये 50,00,000 की आवश्यकता।
    
– जनपद फिरोजाबाद में सिंचाई की व्यवस्था तथा पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए नवीन जसराना नहर निर्माण परियोजना हेतु रुपये 10,00,00,000 की आवश्यकता।

लेखक अजय कुमार लखनऊ में पदस्थ हैं. वे यूपी के वरिष्ठ पत्रकार हैं. कई अखबारों और पत्रिकाओं में वरिष्ठ पदों पर रह चुके हैं. अजय कुमार वर्तमान में ‘चौथी दुनिया’ और ‘प्रभा साक्षी’ से संबद्ध हैं.

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