नई दिल्ली : सहारा रिफंड केस में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक अहम फैसला दिया। कोर्ट ने सहारा समूह को अपने निवेशकों को अगले साल सात फरवरी तक किस्तों में 24,000 करोड़ रुपये वापस करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सहारा ग्रुप को तुरंत 5 हजार 120 करोड़ रुपये सेबी को जमा करने को कहा है। इसके बाद बाकी पैसे दो किश्तों में जमा कराने होंगे। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने निवेशकों के 27 हजार करोड़ की राशि लौटाने के बारे में स्थिति स्पष्ट करने के लिए सहारा समूह को बुधवार तक का वक्त दिया। शीर्ष कोर्ट में आज इस मसले पर सुनवाई हुई।
दो दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने सहारा ग्रुप को फटकार लगाते हुए पूछा था कि वो यहां-वहां की बातों में न फंसें और साफ बताए कि जनता का पैसा लोटाने की उनकी मंशा है या नहीं। प्रधान न्यायाधीश अलतमस कबीर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मंगलवार को सहारा को इसका जबाव देने के लिए एक दिन और मोहलत दी। पहले उन्हें न्यायालय को पैसा लौटाने के बारे में बताना था। सहारा समूह इस मसले पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए अतिरिक्त समय चाहता था।
सहारा समूह की ओर से खड़े वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रमणियम ने समय बढाने का अनुरोध किया। इस पर न्यायालय ने याचिका पर सुनवाई बुधवार के लिए स्थगित कर दी। सहारा समूह को न्यायालय ने कल ही निर्देश दिया था कि वह निवेशकों का धन लौटाने के मसले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करे।
आपको बता दें कि सहारा ग्रुप ने अपने दो रियल एस्टेट कंपनियों सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉर्पोरेशन और सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉर्पोरेशन ने कनवर्टेबल डिवेंचर के जरिए निवेशकों से 24 हजार करोड़ रुपये जमा करवाए थे। सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया यानी सेबी ने इन दोनों कंपनियों के कामकाज को गैरकानूनी करार देते हुए निवेशकों के पैसे लौटाने को कहा था। सेबी के आदेश के खिलाफ सहारा ग्रुप सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, लेकिन इसी साल अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने सेबी के फैसले को सही ठहराते हुए सहारा से निवेशकों के 24 हजार करोड़ रुपये 15 फीसदी ब्याज के साथ लौटाने को कहा था।





