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…तो क्‍या इंडियन एक्‍सप्रेस ने विशेषांक का प्रस्‍ताव नकारे जाने के बाद ये खबर लिखा है?

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने उस पर (पेड न्यूज) के तौर पर विज्ञापन देने के आरोप संबंधी एक अंग्रेजी दैनिक में आज छपी उस रिपोर्ट को कपोल कल्पित और भ्रामक करार देते हुए अखबार पर उलटे आरोप लगाया कि अंग्रेजी दैनिक ने उसके विशेषांक निकालने के प्रस्ताव नहीं माने जाने पर चिढ़ के कारण ये आरोप लगाये गये हैं। राज्‍य सरकार ने जोर देकर कहा कि वह पेड न्यूज को कतई बढ़ावा नहीं देती और उक्त अंग्रेजी दैनिक को भी उसी नीति से विज्ञापन मिलते हैं जिसके आधार पर अन्य मीडिया संस्थानों को दिये जाते हैं।

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने उस पर (पेड न्यूज) के तौर पर विज्ञापन देने के आरोप संबंधी एक अंग्रेजी दैनिक में आज छपी उस रिपोर्ट को कपोल कल्पित और भ्रामक करार देते हुए अखबार पर उलटे आरोप लगाया कि अंग्रेजी दैनिक ने उसके विशेषांक निकालने के प्रस्ताव नहीं माने जाने पर चिढ़ के कारण ये आरोप लगाये गये हैं। राज्‍य सरकार ने जोर देकर कहा कि वह पेड न्यूज को कतई बढ़ावा नहीं देती और उक्त अंग्रेजी दैनिक को भी उसी नीति से विज्ञापन मिलते हैं जिसके आधार पर अन्य मीडिया संस्थानों को दिये जाते हैं।

राज्‍य सरकार ने यहां जारी एक बयान में कहा कि अंग्रेजी दैनिक ने राज्‍योत्सव 2012 के अवसर पर विज्ञापन नहीं देने पर मीडिया पर गंभीर आरोप लगाते आज एक समाचार प्रकाशित किया है, जिसमें इलेक्ट्रानिक मीडिया के विभिन्न चैनलों का नाम उल्लेख करते हुए छत्तीसगढ सरकार द्वारा एक चैनल द्वारा प्रस्ताव देने एवं उन्हें अपेक्षित राशि का विज्ञापन स्वीकृत करने का उल्लेख किया है लेकिन स्वयं उक्त समाचार पत्र को छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा स्वीकृत विज्ञापन का उल्लेख नहीं किया है, जबकि समय-समय पर छत्तीसगढ शासन द्वारा उसे अल्प अवधि में ही 54.50 लाख का विज्ञापन स्वीकृत किये गये हैं। इसके अलावा जनसम्पर्क विभाग ने वर्ष 2011 एवं 2012-13 में निविदा सूचना पर आधारित लगभग 42 लाख रुपए तथा छत्तीसगढ संवाद के माध्यम से विभिन्न निगम मंडलों के तकरीबन 04 लाख 44 हजार रुपए के विज्ञापन दिये तथा लगभग 40 लाख रुपए के वर्गीकृत विग्यापन जारी किए हैं।

बयान में आरोप लगाया गया है कि उक्त अंग्रेजी दैनिक प्रबंधन कपोल-कल्पित समाचार प्रकाशित कर यह भ्रामक संदेश देना चाहता है कि छत्तीसगढ़ शासन मीडिया को विज्ञापन देकर उसे अपने प्रभाव में रखना चाहता है। जबकि स्वयं वह अखबार भी ऐसे विज्ञापन इस प्रकार की पहल कर विज्ञापन हासिल करता है। बयान में राय सरकार ने कहा कि उक्त अंग्रेजी दैनिक का 11 अक्टूबर 2012 का तीन पृष्ठ विज्ञापन 22 लाख रुपए के स्थान पर 15 लाख रुपए में और 14 मई 2012 के 18 लाख रपए के प्रस्ताव को 15 लाख रपए में तब्दील कर दिया गया था तथा 19 अगस्त 2011 को अंग्रेजी दैनिक के 69 वें स्थापना दिवस के विशेषांक के लिए आये विज्ञापन के 27 लाख रुपए के प्रस्ताव को अस्वीकृत किया गया था। इसी प्रकार 23 फरवरी 2011के एक विशेषांक प्रस्ताव सहित कई अन्य विज्ञापन प्रस्ताव थे, जो उपयुक्त एवं सामयिक नहीं होने के कारण अमान्य कर दिये गये थे जिसके कारण उन्हें नाराजगी है। संभवत. अंग्रेजी दैनिक में उक्त समाचार के जरिए अपनी सीज निकालने की कोशिश की गयी होगी।

राज्‍य सरकार ने कहा. ..न्यूज किसी भी फार्म में हो. चाहे वह प्रिन्ट मीडिया हो अथवा इलेक्ट्रोनिक मीडिया, उसमें न्यूज के लिए विज्ञापन नहीं दिया जाता। जनसम्पर्क विभाग केवल जन कल्याणकारी योजनाओं, सफलता की कहानी, विशेष आलेख और जनसम्पर्क विभाग की विज्ञापन नीति के अनुसार संबंधित विषयों पर विज्ञापन और संपादकीय, विशेष कार्यक्रम, विशेष आलेख आदि के लिए किसी भी समाचार पत्र या इलेक्ट्रोनिक मीडिया से प्रस्ताव प्राप्त होने पर जनहित में और लोक सम्पर्क के आधार पर महत्वपूर्ण तथा उचित होने पर महत्वपूर्ण जानकारी एवं कार्यक्रमों के लिए विज्ञापन दिए जाते हैं। (देशबंधु)

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