यशवंत जी, गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में चार सितम्बर को कुछ जूनियर डॉक्टरों ने पत्रकारों को बुरी तरह पीटा था. घटना के बाद प्रेस क्लब, गोरखपुर जर्नलिस्ट एसोसिएशन और अखबारों के संपादकों का जमीर कई दिनों तक जागा रहा. आंदोलन और खबरों के जरिए जूनियर डाक्टरों के खिलाफ मोर्चा खुला रहा लेकिन अब तीनों संस्थाएं चुप हो गई हैं. गंभीर धाराओं में मुकदमा है फिर भी कोई आरोपी गिरफ्तार नहीं हुआ. ये करिश्मा यहां के संपादकों की दलाली के कारण हुआ.
डॉक्टरों से हाथ मिलाकर संपादकों ने रिपोर्टरों पर दबाव डाला कि कालेज की छवि बेहतर बनाई जाए. ये अभियान शुरू भी हो चुका है. एक संपादक ने तो अपने दो फोटोग्राफरों को 60-60 हजार का मुआवजा कमिश्नर से मिलकर दिलवा दिया. इसी दलाली के कारण पत्रकार संगठन भी सरेंडर बोल चुके हैं. इस मामले में दैनिक जागरण, अमर उजाला और हिंदुस्तान अखबार की भूमिका घटिया रही है. पुलिस ने माहौल भांपकर अपनी गति और धीमी कर ली है. कई क्राइम रिपोर्टर पुलिस की गोद में सो रहे हैं. इस मामले में वे कोई सवाल नहीं पूछते. मेडिकल कॉलेज में अब कोई पत्रकार पीटा जाए तो लोगों की भी सहानुभूति नहीं मिलेगी.
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.






