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प्रवीण का अहमदाबाद तबादला, गिरीश काम पर लौटे

राजस्थान पत्रिका, ग्‍वालियर के सीनियर रिपोर्टर प्रवीण मिश्रा का तबादला अहमदाबाद कर दिया गया है। प्रवीण दो साल पहले पत्रिका की लांचिंग के समय से ही जुड़े रहे और इससे पहले यहीं दैनिक भास्कर में कार्यरत थे। ग्‍वालियर के रहने वाले प्रवीण का तबादला अचानक इतनी दूर किए जाने का कारण तो पता नहीं चल सका है, लेकिन बताते हैं कि प्रबंधन को कुछ रिपोर्टरों के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही हैं। इनमें प्रवीण मिश्रा भी शामिल हैं। उन्हे 14 दिसंबर को ट्रांसफर ऑर्डर थमाने के साथ रिलीव भी कर दिया गया। प्रवीण ग्‍वालियर पत्रकार यूनियन के संभागीय महामंत्री भी हैं। यह पता नहीं चल सका है कि वे अहमदाबाद जाएंगे अथवा कोई ग्‍वालियर में ही कहीं और ठिकाना तलाशेंगे। दो अन्य रिपोर्टर भी निशाने पर हैं।

राजस्थान पत्रिका, ग्‍वालियर के सीनियर रिपोर्टर प्रवीण मिश्रा का तबादला अहमदाबाद कर दिया गया है। प्रवीण दो साल पहले पत्रिका की लांचिंग के समय से ही जुड़े रहे और इससे पहले यहीं दैनिक भास्कर में कार्यरत थे। ग्‍वालियर के रहने वाले प्रवीण का तबादला अचानक इतनी दूर किए जाने का कारण तो पता नहीं चल सका है, लेकिन बताते हैं कि प्रबंधन को कुछ रिपोर्टरों के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही हैं। इनमें प्रवीण मिश्रा भी शामिल हैं। उन्हे 14 दिसंबर को ट्रांसफर ऑर्डर थमाने के साथ रिलीव भी कर दिया गया। प्रवीण ग्‍वालियर पत्रकार यूनियन के संभागीय महामंत्री भी हैं। यह पता नहीं चल सका है कि वे अहमदाबाद जाएंगे अथवा कोई ग्‍वालियर में ही कहीं और ठिकाना तलाशेंगे। दो अन्य रिपोर्टर भी निशाने पर हैं।

उधर दैनिक भास्कर ग्‍वालियर में लगभग एक सप्ताह बाद रिपोर्टर गिरीश अग्रवाल काम पर लौट आए हैं। वे एनई भगवान उपाध्याय के व्यवहार से क्षुब्‍ध होकर ऑफिस नहीं आ रहे थे, उन्होंने छुट्टी की कोई दरखास्त भी नहीं दी थी। भास्कर ग्रुप के चैयरमैन रमेश चंद्र अग्रवाल के नजदीकी समझे जाने वाले गिरीश 12 साल से पत्रकारिता में है। बाद में इन्हें संपादक ने घर से बुलवाकर काम पर आने को कहा और इनकी शिकायत पर गौर करने का आश्वासन दिया तो ये काम पर लौट आए। भगवान उपाध्याय के बारे में उनके सहयोगियों की शिकायत है कि वे न्यूज की समझ नहीं रखते और शब्‍दों को लेकर हमेशा भ्रम की स्थिति पैदा करते हैं। वे जबरन अपनी ही बात मनवाते हैं भले गलत ही क्यों न हो? स्टाफ के 90 प्रतिशत से अधिक लोग संपादक सुनील शुक्ला से शिकायत कर उनके साथ काम करने से इनकार करने की इच्‍छा जता चुके हैं। संपादक ने कई बार उपाध्याय को चेतावनी भी दी लेकिन उनपर कोई असर नहीं पड़ा। आए दिन किसी न किसी रिपोर्टर या डेस्क प्रभारी से उनकी चिकचिक होती रहती है। रिपोर्टर व डेस्क प्रभारी अब स्टेट एडिटर से शिकायत करने की तैयारी कर रहे हैं।

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