नई दिल्ली : ज़ी न्यूज के संपादक सुधीर चौधरी ने शुक्रवार को पटियाला हाउस कोर्ट में न्यायाधीश जय थरेजा की अदालत में नवीन जिंदल एवं 16 अन्य के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर किया। अदालत ने शिकायत पर विचार करने के लिए तीन जनवरी की तिथि मुकर्रर की है। मानहानि की यह शिकायत 100 करोड़ रुपए वसूले जाने के कथित प्रयास के संबंध में दर्ज प्राथमिकी और यहां एक प्रेस विज्ञप्ति में लगाए गए आरोपों को लेकर की गयी है। चौधरी ने अदालत से कहा कि वसूली के कथित प्रयास संबंधी मामले में दर्ज प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि लाइव इंडिया चैनल के सीईओ के रूप में उन्होंने एक फर्जी स्टिंग आपरेशन किया था
चौधरी के वकील विजय अग्रवाल ने कहा कि प्राथमिकी में लगाए गए आरोप गलत हैं क्योंकि इस मामले में चौधरी के खिलाफ कोई आरोपपत्र नहीं दाखिल किया गया था। उन्होंने दलील दी कि अदालत इस मामले में संज्ञान लेने और शिकायतकर्ता के हलफनामे की जांच के लिए बाध्य है। दलीलें सुनने के बाद अदालत ने शिकायत का संज्ञान लेने पर अपने आदेश के लिए तीन जनवरी की तारीख तय की। विजय अग्रवाल ने बताया कि मेरे मुवक्किल ज़ी न्यूज के संपादक सुधीर चौधरी ने आपराधिक मानहानि के लिए आईपीसी की धारा 499 के तहत शिकायत दर्ज कराई है। मामले में अपराध सिद्ध होने पर आईपीसी की धारा 500 के तहत दो वर्षों की जेल की सजा का प्रावधान है।
मजिस्ट्रेट ने कहा कि संज्ञान लेने के मुद्दे पर दलीलें सुनी गयी हैं। वकील ने कहा कि मानहानि का मुकदमा दर्ज करने की दूसरी वजह जिंदल द्वारा संवाददाता सम्मेलन में की गयी टिप्पणी है। अग्रवाल ने कहा कि इसके बाद यदि जरूरत पड़ी तो अदालत मेरे मुवक्किल के साक्ष्यों पर गौर करेगी और इसके बाद अदालत इन आरोपी व्यक्तियों को तलब कर सकती है। आरोपियों को आगे मानहानि के मामले में सुनवाई का सामना करना होगा। दोष साबित होने पर इस मामले में दो साल की सजा का प्रावधान है।
आज एक अलग घटनाक्रम में दिल्ली पुलिस ने ज़ी के दोनों संपादकों सुधीर चौधरी एवं समीर अहलूवालिया से आवाज के नमूने जबरन लेने और ट्रांस्क्रिप्ट से वाक्य पढ़ाने की कोशिश की जिसे दोनों संपादकों ने अपनी वकील की सलाह पर नकार दिया। अग्रवाल ने कहा कि कोलगेट घोटाले के खुलासे से जुड़े एक मामले में चौधरी एवं अहलूवालिया को गलत तरीके से फंसाया गया है। इस कोयला घोटाला में कांग्रेस सांसद एवं उद्योगपति नवीन जिंदल शामिल हैं। अधिवक्ता ने कहा कि संवाददाता सम्मेलन में यह आरोप लगाया गया कि ब्राडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन (बीईए) ने चौधरी को बुलाया था और उन्होंने (चौधरी ने) उनके सामने अपनी बात रखी थी और इसके बाद चौधरी को हटा दिया गया था। चौधरी के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल कभी भी बीईए में नहीं गए और न ही उसके सामने कोई प्रस्तुतीकरण दिया।
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