आज जो संजय निरुपम स्मृति ईरानी को ठुमके लगाने वाली कह रहे हैं, उनकी औक़ात ठुमके लगाने की भी नहीं है। याद कीजिए, बिग बॉस में संजय निरुपम लोकप्रियता की चाह में गए और पहले-दूसरे हफ्ते में ही दर्शकों ने उन्हें निकाल फेंका। मुझे परेशानी यह भी है कि संजय निरुपम ने अपना करियर बतौर पत्रकार शुरु किया था, लेकिन ओछी राजनीति करते करते मानसिक दिवालियापन इस कदर हो लिया कि पेशे से बौद्धिक क्षमता को जोड़ लिया। भाई, यही बात थी तो गोविंदा को कांग्रेस ने टिकट क्यों दिय़ा था? वो भी तुम्हारे ही शहर से? दरअसल, निरुपम जैसे लोग घटिया बयानबाजी से ही चर्चा में रहने का गुर जानते हैं। मेरी माँग है कि कांग्रेस को फौरन अपने इस प्रवक्ता को पद से हटाना चाहिए। आपकी है?
साइबर पत्रकार पीयूष पांडेय के फेसबुक वॉल से साभार.





