बलात्कारियों और स्त्री का यौन शोषण के खिलाफ दिल्ली और दूसरे महानगरों में चल रहा गुस्से का इजहार काबिले तारीफ है। मुझे पक्का यकीन है कि इससे वे लोग भी सबक लेंगे जो दफ्तरों में अपने पद का फायदा उठाकर काम करने वाली अधीनस्थ लड़कियों का यौन शोषण करते हैं। इससे वे लोग भी सबक लेंगे जो स्त्री शरीर के प्राप्ति के बिना कोई वह काम नहीं करते जिसे पूरा करना उनकी जिम्मेदारी है।
थानों में बैठे दारोगा और आईपीएस एवं आईएएस तो सबक लेंगे ही जो बयान के नाम पर बलत्कृत लड़की का न जाने कितने दफे बलात्कार करते हैं। वे रिश्तेदार भी सबक लेंगे जो अपने परिजनों की महिलाओं के साथ भी सहज तरीके से पेश नहीं आते। उन बीएमडब्लू मालिकों के घरों के बच्चे भी अब कभी डिस्कोथिक में जाकर बार गर्ल्स और वहां आई लड़कियों से बदतमीजी नहीं करेंगे। यौन शोषण और स्त्री की अस्मिता के लिए लडऩे वाले वाकई महान काम कर रहे हैं। यकीनन वे सारे बलात्कारियों को फांसी पर लटकवा कर ही मानेंगे। इसमें वे अपने-पराए, गरीब-अमीर तथा छोटे-बड़े का फर्क नहीं करेंगे। मोमबत्ती जलाकर विरोध जताने वाले बताएंगे कि उन्होंने अपने जीवन में कभी भी किसी तरह का शोषण किसी भी स्त्री से नहीं किया?
वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ला के फेसबुक वॉल से साभार.






