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टीवी पत्रकारिता छोड़ पूरी तरह बॉलीवुड में रम गए विजय पाण्‍डेय

कभी ईटीवी, दूरदर्शन, हमार टीवी और महुआ टीवी जैसे चैनलों के साथ काम कर चुके विजय पांडेय अब पूरी तरह एक्टिंग में रम गए हैं. पत्रकारिता को कभी सीने से लगाए रखने वाले विजय का इस विधा से ऐसा मोह भंग हुआ कि उन्‍होंने इस क्षेत्र को ही अलविदा कह दिया. अपनी जिंदादिली और हाजिर जवाबी में माहिर विजय धीरे धीरे नई पहचान बनाते जा रहे हैं. कई चैनलों पर चलने वाले क्राइम शो के साथ अब वो फिल्‍मों में भी नजर आने लगे हैं. आज यानी रविवार को कलर्स पर भी रात दस बजे शैतान नामक धारावाहिक में अभिनय करते दिखेंगे.  

कभी ईटीवी, दूरदर्शन, हमार टीवी और महुआ टीवी जैसे चैनलों के साथ काम कर चुके विजय पांडेय अब पूरी तरह एक्टिंग में रम गए हैं. पत्रकारिता को कभी सीने से लगाए रखने वाले विजय का इस विधा से ऐसा मोह भंग हुआ कि उन्‍होंने इस क्षेत्र को ही अलविदा कह दिया. अपनी जिंदादिली और हाजिर जवाबी में माहिर विजय धीरे धीरे नई पहचान बनाते जा रहे हैं. कई चैनलों पर चलने वाले क्राइम शो के साथ अब वो फिल्‍मों में भी नजर आने लगे हैं. आज यानी रविवार को कलर्स पर भी रात दस बजे शैतान नामक धारावाहिक में अभिनय करते दिखेंगे.  

टीवी पत्रकारिता के प्रोग्रामिंग डिविजन में जबर्दस्‍त पकड़ रखने वाले विजय पांडेय ने शुरुआत दूरदर्शन से की थी. वे प्रोग्राम का निर्देशन करने के साथ डीडी पर प्रसारित धारावाहिक सांची पिरितिया में पहली बार अभिनय करते भी नजर आए. सराहना मिलने के बाद वे पत्रकारिता के साथ अभिनय में भी हाथ आजमाने लगे. डीडी पर ही 'तोहरे से घर बसाइब' में अभिनय किया. ईटीवी के चर्चित गेम शो 'गलियों के राजा' से एंकरिंग में भी अपना लोहा मनवाया. इसके बाद वे एनएसडी के नामीगिरामी साथियों के सानिध्‍य में आए तो निर्देशन, अभियन से लेकर व्‍यंग्‍य लेखन में भी अपनी एक अलग पहचान बनाई.

इस दौरान वे अजीत गांगुली, अर्पित अरुण, अरुण सिन्‍हा, आरपी तरुण, विजय कुमार, रणधीन कुमार, पुंज प्रकाश मुनचुन, अरविंद पाठक, शशि भूषण, पंकज त्रिपाठी जैसे एनएसडीएन के साथ भी रंगमंच पर अभिनय किया. इसके पहले वे लम्‍बे समय तक भोजपुरी न्‍यूज चैनल हमार टीवी के साथ जुड़े रहे. हमार टीवी के लिए इन्‍होंने 'बड़का बकलोल', 'बात संभाल के', 'जय शनिदेव', 'कालचक्र' एवं 'रागरंग' जैसे कार्यक्रमों को प्रोड्यूस एवं डाइरेक्‍ट किया. एंकरिंग भी की. महुआ के टैवेल शो 'बिहार एक खोज' का निर्देशन भी किया. विजय रंगमंच पर 'बकरा किस्‍तों का', 'राग दरबारी', 'सैंया भये कोतवाल' और 'पंच लाइट' जैसे चर्चित नाटकों में मुख्‍य भूमिका निभा चुके हैं. मुंबई में कदम रखने से पहले ही विजय पाण्‍डेय भोजपुरी फिल्‍मों में अपने अभिनय का जौहर दिख चुके हैं. वे भोजपुरी फिल्‍म 'गंगा के पार सइयां हमार' तथा हिंदी फिल्‍म 'बनारस-1918 एक प्रेम कहानी' में भी काम कर चुके हैं.

बिना किसी गॉड फादर के लगभग डेढ़ साल पहले मायानगरी में कदम रखने वाले विजय पाण्‍डेय आज छोटे एपीसोड वाले धारावाहिकों की जरूरत बन चुके हैं. 'क्राइम पेट्रोल', 'शैतान', 'फूलवा', 'माता की चौकी', 'नव्‍या', 'तारक मेहता का उल्‍टा चश्‍मा' जैसे धारावहिकों में दर्जनों बार दिखाई दे चुके हैं. अब वे फिल्‍मों की तरफ भी कदम बढ़ा रहे हैं. हाल ही में आई परेश रावल एवं मिथुन अभिनित फिल्‍म 'ओह माई गॉड' में एक छोटी भूमिका निभाकर इसकी शुरुआत की थी. उसके बाद राजपाल यादव के साथ 'अता पता लापता' में अच्‍छे रोल के साथ नजर आए थे. वे जल्‍द ही तमचें में भी दिखने वाले हैं. इसके अलावा भी वे कई फिल्‍मों में कास्‍ट हो चुके हैं, जो जल्‍द ही फ्लोर पर आने वाली हैं. 

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