सरकार ने उन पांच दूरदर्शन मुलाजिमों को निलंबित कर दिया है, जिनकी वजह से कल प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन में अंत में तुरंत बोले गए दो शब्द टीवी पर चले गए जो कि भाषण का हिस्सा नहीं थे। अंगरेजी संबोधन के बाद प्रधानमंत्री ने हिंदी में कहा था — "ठीक है?" जो हो, इस भूल-चूक लेनी-देनी से देश की बड़ी सेवा हुई है। एक तो पता चला कि प्रधानमंत्री बगैर लिखकर दिए हुए भी कुछ बोल सकते हैं। वह भी सहज होकर, राष्ट्र की राजभाषा में। फिर देश के ठीक-बेठीक हालात पर बोलने में तो उन्हें एक हफ्ता लगा; पर भाषण कैसा रहा, यह उन्होंने उसी सांस में जानना चाहा। यानी सजग भी हैं। और फिर गलत प्रसारण पर फौरन एक्शन भी ले लिया। कर्मठ हैं। ठीक है, सर, सब ठीक है। भाषण ठीक, देश भी ठीक। बादल सरकार के एक नाटक में लाठी की ठक-ठक के साथ चौकीदार की अनवरत पुकार याद आती है — किसी का खून नहीं हुआ … कोई बलात्कार नहीं हुआ … सब ठीक है!!
वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी के फेसबुक वॉल से साभार.






