: अन्य अखबार के पत्रकारों के लिए भी सबक : प्रबंधन को कोर्ट में घसीट रखा है इस पत्रकार ने : अपने हक की आवाज उठाना राजस्थान पत्रिका के वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार बिहारी को मुश्किल में डाल गया है. इसके बावजूद यह पत्रकार अपने तथा राजस्थान पत्रिका के तमाम पत्रकारों के हितों को देखते हुए पीछे हटने को तैयार नहीं है. अजय की आवाज दबाने के लिए अखबार प्रबंधन ने उन्हें गलत तरीके से टर्मिनेट कर दिया, जिस पर उन्होंने कोर्ट की शरण ली और मुंबई लेबर कोर्ट में प्रबंधन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है, जो अब भी चल रहा है.
राजस्थान पत्रिका के मुंबई ब्यूरो में सात साल से काम कर रहे अजय कुमार बिहारी ने पिछले साल मनीसाना और कुरुप वेज बोर्ड के तहत सेलरी और अंतरिम देने की मांग प्रबंधन से की थी. प्रबंधन को अजय की यह मांग नागवार गुजरी. प्रबंधन ने अजय को सबक सिखाने के लिए सजा के तौर पर इनका तबादला राजस्थान में पाकिस्तान के बार्डर से लगे बाड़मेर जिले के लिए कर दिया. साथ ही तीन दिनों में बाड़मेर में रिपोर्ट करने को कहा. श्री बिहारी का कांट्रेक्चुअल कर्मचारी बनने से इनकार करना भी इस तबादला का एक बहुत बड़ा कारण बना. परन्तु अजय बिहारी ने प्रबंधन के सामने झुकने से इनकार कर दिया.
प्रबंधन के रवैये तथा तबादले के विरुद्ध अजय कुमार बिहारी ने मुंबई के औद्योगिक कोर्ट में चुनौती दिया, जो अब भी पेडिंग हैं. इसी बीच प्रबंधन ने अजय बिहारी के खिलाफ एक आंतरिक जांच शुरू करा दी. जांच रिपोर्ट श्री बिहारी के खिलाफ तैयार हुई, जिसके आधार पर प्रबंधन ने उन्हें 14 जून 2010 को टर्मिनेट कर दिया. इसके खिलाफ भी अजय बिहारी लेबर कोर्ट पहुंचे. एक लंबी सुनवाई प्रकिया के बाद लेबर आफिसर ने श्री बिहारी की नियुक्ति एवं पूरा वेतन की मांग के बाद इस केस को 26 अगस्त 2011 को मुबई के छठे लेबर कोर्ट के पास स्थानंतरित कर दिया है. जहां इसकी आगे की सुनवाई होनी है.
पत्रिका प्रबंधन के खिलाफ अजय बिहारी के इस संघर्ष में इस अखबार के तमाम पत्रकार भी आर्थिक एवं मानसिक रूप से उनका सहयोग कर रहे हैं. इस ऐतिहासिक लड़ाई के चलते पत्रिका प्रबंधन परेशान है. वहीं अजय बिहारी किसी भी कीमत पर पत्रकारों के लिए वेज बोर्ड के अनुसार सेलरी पैकेज दिलवाने के लिए प्रतिबद्ध नजर आ रहे हैं. अब देखना दिलचस्प होगा कि एक बड़ी लड़ाई लड़ रहे अजय कुमार बिहारी के संघर्षों को कब मंजिल मिलती है और कब कोर्ट अपना फैसला सुनाता है. साथ ही यह लड़ाई अन्य अखबारों के पत्रकारों के लिए भी नजीर होगा, जो अपने पत्रकारों का हक मारने के लिए किसी भी स्तर पर जाने से परहेज नहीं करते.





