मैनेजमेंट के बड़े बड़े गुण सिखाने वाले तथा टीवी चैनलों तथा अखबारों में विज्ञापन के साथ छपने के शौकीन अरिंदम चौधरी अपने खुद की मीडिया कंपनी प्लानमैन मीडिया का ही मैनेजमेंट नहीं संभाल पा रहे हैं. पिछले दो सालों से प्लानमैन मीडिया के कर्मचारी अरिंदम चौधरी के आश्वासनों से परेशान हैं. संडे इंडियन समेत कई अंग्रेजी मैगजीन प्रकाशित करने वाली अरिंदम की प्लानमैन मीडिया के लगभग पांच सौ कर्मचारी सैलरी ना मिलने से मुश्किलों में हैं.
संडे इंडियन समेत सभी पत्रिकाओं में कार्यरत पत्रकारों को अगस्त के बाद की सैलरी अब तक नहीं मिली है. जबकि दिसम्बर का महीना भी बीतने जा रहा है. प्लानमैन मीडिया के अनप्लान रवैये से इन कर्मचारियों का नया साल भी बुरा बीतने वाला है. अरिंदम चौधरी के यहां काम करने वाले लगभग सभी कर्मचारी उधार की जिंदगी जी रहे हैं क्योंकि सैलरी के चार महीने लेट चलने की वजह से वे इधर उधर से पैसा लेकर अपना काम चला रहे हैं. पिछले दिनों एक कर्मचारी को चंदा देकर सहयोगियों ने बेघर होने से बचाया था.
बातों में लम्बी चौड़ी फेंकने और हांकने वाले अरिंदम चौधरी सैलरी के मुद्दे पर अपने कर्मचारियों से मिलना भी पसंद नहीं करते हैं. बताया जा रहा है कि नए साल से पहले सैलरी को लेकर कुछ कर्मचारी अरिंदम चौधरी के घर गए थे, परन्तु अरिंदम ने उनसे मुलाकात नहीं की. वहां मौजूद कुछ लोगों ने बस आश्वासन देकर टरका दिया. कर्मचारियों का कहना है कि अरिंदम इतना असंवेदनशील हो गया है कि इधर कर्मचारियों की चार महीने से सैलरी नहीं मिली और वो अपने परिवार के साथ मौज मस्ती करने कार्बेट पार्क जा रहा है.
पिछले दो सालों से अस्थिर सैलरी से परेशान कर्मचारी अब आंदोलन के मूड में आ चुके हैं. अपने ही वादों पर खरा नहीं उतरने के चलते अरिंदम के मैनेजमेंट स्कूल का ग्राफ भी काफी गिरा है. उसका असर भी प्लानमैन मीडिया पर पड़ा है. इसके चलते ही संडे इंडियन के कई इश्यू साप्ताहिक से मंथली कर दिए गए थे. इसके बाद भी प्लानमैन मीडिया की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ, जिसका खामियाजा मीडियाकर्मियों को भुगतना पड़ रहा है. यहां काम करने वालों का कहना है कि अगर जल्द उन लोगों की सैलरी नहीं दी गई तो वे अब सांगठित होकर लड़ाई करने की तैयारी करेंगे.






