तमाम कोशिशों के बावजूद कई शहरों में अमर उजाला के काम्पैक्ट से पार नहीं पा सकने वाल जागरण समूह के आई नेक्स्ट को नए साल पर रीलांच किया जा रहा है. बाइलिंगुअल टैबलाइड आई नेक्स्ट न केवल अपना लोगो चेंज कर रहा है बल्कि अपना लुक भी बदल कर रहा है. बताया जा रहा है कि जिस युवा वर्ग को टारगेट करके इस टैबलाइड को लांच किया गया था, वह इस वर्ग में अपनी पहचान नहीं बना पाया. स्थिति यह रही कि इसे जागरण के साथ क्लब करके कम्बो ऑफर मूल्य पर भी बेचने का जुगत लगाया गया, परन्तु सफलता नहीं मिली.
खबर है कि इसी से परेशान प्रबंधन अब नए सिरे से अखबार को रीलांच करने जा रहा है ताकि चेहरा बदलकर ही सही कम से कम इसके पाठक खोजे जाएं. वैसे आई नेक्स्ट अलग तरीके एवं नए कांसेप्ट के साथ लांच किया गया था, जिसमें हिंदी अंग्रेजी शब्दों का साथ में प्रयोग किया गया. पर हिंदी या अंग्रेजी को स्मूथली पढ़ने वाले लोगों को आधी हिंदी आधी अंग्रेजी समझ नहीं आई यानी आई नेक्स्ट के साथ 'माया मिली ना राम' वाली कहावत चरितार्थ हो गई.
जबकि अमर उजाला समूह का टैबलाइड शुद्ध रूप से हिंदी में लांच किया गया और लोगों ने उसे हाथों हाथ लिया. आज जिन जिन शहरों में इन दोनों टैबलाइड एक साथ प्रकाशित हो रहे हैं वहां काम्पैक्ट आई नेक्स्ट को पीछे कर रखा है. बताया जा रहा है कि प्रबंधन युवाओं को फिर से जोड़ने की कोशिश के तहत अपने कंटेंट प्रजेंटेशन और स्टाइल में बदलाव करने के साथ इसे मोबाइल फ्रेंडली भी बनाने जा रहा है. इसी के साथ इस बाइलिंगुअल टैबलाइड के वेबसाइट को अगल अंदाज में चमकाया जाएगा. अब देखना है कि इतने बदलावा के बाद भी आई नेक्स्ट कुछ नए पाठक जोड़ पाता है या नहीं.





