लखनऊ : यूपी में समाजवादी पार्टी की सरकार का अभी एक साल भी पूरा नहीं हो पाया है, पत्रकारों का दिल मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के प्रति फट चुका है। नये साल के पहले दिन की दोपहर पत्रकारों ने आज अखिलेश यादव और उनके अफसरों के रवैये पर ऐतराज जताते हुए उनके बुलावा को बाकायदा ठुकरा दिया। हालांकि इसके बावजूद चंद पत्रकार मुख्यमंत्री की चौखट पर अरदास लगा ही गये। बाद में बायकाट करने वाले पत्रकारों और उनके विरोधियों के बीच खासी तू-तू मैं-मैं भी हुई।
दरअसल, 31 दिसम्बर की शाम से ही सूचना विभाग के अफसरों ने कुछ चुनिंदा पत्रकारों को मुख्यमंत्री की ओर से न्योता बांटना शुरू कर दिया था, जो आज सुबह तक चलता रहा। तयशुदा वक्त पर यह पत्रकार मुख्यमंत्री आवास पर अपने ताम-झाम के साथ पहुंच गये। इनमें चैनल वाले भी खूब थे। लेकिन पता चला कि मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचने का रास्ता ही नहीं है, क्योंकि उस पूरे रास्ते पर समाजवादी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे। कई बड़े अफसर भी लाइन में लगे हुए थे।
बहुत कहासुनी के बाद पत्रकारों को आवास तक पहुंचाया गया। लेकिन पता चला कि मुख्यमंत्री तक पहुंचने वाला रास्ता जाम है। बताया गया कि जल्दी ही इन पत्रकारों को मुख्यमंत्री तक पहुंचाया जाएगा। लेकिन करीब डेढ़ घंटे बाद भी पत्रकारों की भेंट की कोई खबर नहीं मिल पायी। कुछ खोजी पत्रकारों ने सूंघ लिया कि कई वरिष्ठ-किस्म के पत्रकार अफसरों के साथ घिघियाते हुए हाथ बांधे प्रतीक्षा में हैं। इसी बीच जानकारी मिली कि कुछ कार्यकर्ताओं और अफसरों ने पत्रकारों से बदतमीजी कर डाली। माहौल तनावपूर्ण हो गया।

कई पत्रकारों ने सूचना विभाग के अफसरों को फोन मिलाया लेकिन उनके फोन ही आफ थे। जिनकी घंटी भी बजी, उन्होंने फोन ही नहीं उठाया। इधर खबर आयी कि समाजवादी पार्टी के करीब माने जाने वाले कुछ पत्रकार मुख्यमंत्री के पास पहुंच चुके हैं। इस पर पत्रकारों का तेवर बदल गया और अचानक इन पत्रकारों ने तय किया कि वे इस बदतरीन व्यवस्था से नाराज होकर बायकाट कर दें। वहां मौजूद पत्रकारों ने एकराय होकर ऐलान कर दिया कि वे वापस लौट रहे हैं। इस पर वहां मौजूद पत्रकार वापस लौटने लगे।
हैरत की बात है कि कार्यक्रम का बायकाट करने वाले पत्रकारों की बात सुनने के लिए कोई अफसर दिख ही नहीं पाया। बाद में पता चला कि कई घाघ किस्म के पत्रकार अचानक मुख्यमंत्री के सामने नमूदार हुए। मुख्यमंत्री के साथ-साथ बातचीत की, पत्रकारों और निजी हितों को लेकर गंभीर तबादला-ए-ख्यालात किया और बाकायदा मुख्यमंत्री के साथ फोटो सेशन करते हुए वापस लौट गये। बाद में मीडिया सेंटर में हंगामा खड़ा हो गया। बायकाट कर लौटे पत्रकारों ने उन पत्रकारों की लानत-मलामत शुरू कर दी जो बायकाट के फैसले के बावजूद मुख्यमंत्री से मिलने गये थे।
बहरहाल, बायकाट करने वाले पत्रकारों का तर्क था कि जब उन्हें मुख्यमंत्री की तरफ से आमंत्रण किया गया था, और वे लोग

कुमार सौवीर
लेखक कुमार सौवीर यूपी के जाने माने और वरिष्ठ पत्रकार हैं. उनसे संपर्क [email protected] या [email protected] या 09415302520 के जरिए किया जा सकता है.






