Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

सुख-दुख...

जालसाज संपादक प्रभा वर्मा का गैर कानूनी खेल!

: सूचना विभाग के अभिलेखों में 9 समाचार पत्रों का संचालन करने की पुष्टि : देहरादून। उत्तराखण्ड में बिना प्रसार के समाचार पत्रों की विभिन्न विभागों में विज्ञापन के नाम पर लूट जारी है। नियम कानूनों को ताक पर रखकर ऐसे समाचार पत्रों को विज्ञापन जारी किए जा रहे हैं जिनका वजूद सिर्फ फाइलों तक सीमित है। कई विभागों में अधिकारियों की मिली भगत से ऐसे समाचार पत्रों को विज्ञापन जारी किए जा रहे हैं, जिनका डीएवीपी तक जारी नहीं है और उनकी प्रसार संख्या सिर्फ सरकारी कागजों में मौजूद है। उत्तराखण्ड को शुरू से ही दुधारू गाय के रूप में बाहरी लोग इस्तेमाल करते आए हैं और अधिकारियों से लेकर बाहरी लोग यहां एनजीओ, समाचार पत्रों व कई योजनाओं में लाखों के वारे न्यारे चुके हैं, जिनकी जांच विजय बहुगुणा सरकार वर्तमान समय में कर रही है।

: सूचना विभाग के अभिलेखों में 9 समाचार पत्रों का संचालन करने की पुष्टि : देहरादून। उत्तराखण्ड में बिना प्रसार के समाचार पत्रों की विभिन्न विभागों में विज्ञापन के नाम पर लूट जारी है। नियम कानूनों को ताक पर रखकर ऐसे समाचार पत्रों को विज्ञापन जारी किए जा रहे हैं जिनका वजूद सिर्फ फाइलों तक सीमित है। कई विभागों में अधिकारियों की मिली भगत से ऐसे समाचार पत्रों को विज्ञापन जारी किए जा रहे हैं, जिनका डीएवीपी तक जारी नहीं है और उनकी प्रसार संख्या सिर्फ सरकारी कागजों में मौजूद है। उत्तराखण्ड को शुरू से ही दुधारू गाय के रूप में बाहरी लोग इस्तेमाल करते आए हैं और अधिकारियों से लेकर बाहरी लोग यहां एनजीओ, समाचार पत्रों व कई योजनाओं में लाखों के वारे न्यारे चुके हैं, जिनकी जांच विजय बहुगुणा सरकार वर्तमान समय में कर रही है।

उत्तराखण्ड में लूट का यह खेल वर्ष 2002 में सत्ता में काबिज हुई एनडी तिवारी के शासनकाल में शुरू हुआ था और उस समय की सरकार के शासनकाल में ऐसे लोगों को कृपा का पात्र बनाया गया, जो उसकी परिधि में नहीं आते थे। उसके बाद भाजपा शासनकाल में भी यह कुछ हद तक जारी रहा लेकिन बहुगुणा की सरकार आते ही इस पर रोक लगाने की कोशिशें शुरू हो गई। उत्तराखण्ड में समाचार पत्रों के माध्यम से विज्ञापनों का खेल वर्तमान समय में भी जारी है और महिला पत्रकार के रूप में चर्चित माने जाने वाली प्रभा वर्मा द्वारा सूचना विभाग के अभिलेख अनुसार 9 समाचार पत्रों का संचालन किया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि उक्त महिला द्वारा करीब दो दर्जन समाचार पत्रों के माध्यम से विभिन्न विभागों में विज्ञापनों की लूट का खेल खेला जा रहा है। एक समय में पत्रकारिता को मिशन के तौर पर देखा जाता था, लेकिन अब उक्त महिला द्वारा अपना मिशन विभिन्न विभागों से विज्ञापन के तौर पर मिलने वाले अपने समाचार पत्रों बना लिया गया है और सूचना विभाग के शिखंडियों की कृपा के चलते उक्त महिला के समाचार पत्रों को सूचीबद्ध कर सूचना विभाग से भी विज्ञापन के रूप में कृपा लगातार जारी है।

वर्तमान में हिन्दी दैनिक उत्तराखण्ड तहकीकात, साप्ताहिक सिद्ध टाइम्स, साप्ताहिक उत्तराखण्ड तहकीकात, साप्ताहिक सच होता सपना का प्रकाशन स्थल जिस प्रिन्टिग प्रेस में दर्शाया गया है, वह पूरी तरह से फर्जी है। उक्त शातिर महिला द्वारा अधिकारियों को गलत सूचना देकर अपने समाचार पत्रों को इन्टर ग्राफिक्स प्रिन्टर्स 64 नैशविला रोड देहरादून से मुद्रित होना बताया गया है, जबकि इन्टर ग्राफिक्स के स्वामी सच्चिदानन्द द्वारा कोई भी समाचार पत्र इन्टर ग्राफिक्स में मुद्रित प्रकाशित ना होने की शिकायत देहरादून के जिला मजिस्‍ट्रेट से की गई है। प्रेस के स्वामी द्वारा जिलाधिकारी को  भी अवगत कराया गया है कि प्रेस अनुबन्ध पत्र पर प्रिन्टिग प्रेस स्वामी के फर्जी हस्ताक्षर बनाए गए हैं और इन्हीं फर्जी हस्ताक्षरों के माध्यम से आरएनआई में प्रेस अनुबन्ध जमाकर अधिकारियों को गुमराह करते हुए आरएनआई रजिस्‍ट्रेशन गैर कानूनी तरीके से हासिल किया है। वहीं देहरादून से प्रकाशित हिमवत उत्तराखण्ड नामक साप्ताहिक समाचार पत्र के सम्पादक धर्मेन्द्र वर्मा द्वारा 19 अप्रैल 2010 को प्रस्तुत किए गए प्रेस अनुबन्ध पत्र पर भी प्रिन्टिग प्रेस स्वामी के फर्जी हस्ताक्षर बनाए गए हैं, जबकि वर्ष 2011 में धर्मेन्द्र वर्मा का निधन हो चुका है।

दूसरी तरफ उत्तराखण्ड सिद्ध टाइम्स, सच होता सपना की सम्पादक नीरू वर्मा द्वारा भी प्रिन्टिग प्रेस स्वामी के फर्जी हस्ताक्षर आरएनआई में जमा किए गए हैं। सवाल यह उठ रहा है कि मीडिया की विश्‍वसनीयता पाठकों व जनता के बीच चौथे स्तम्भ की रहती है, लेकिन ऐसे लोगों ने जहां पत्रकारिता की विश्‍वसनीयता को बट्टा लगाने के साथ-साथ स्टाम्प पेपर में फर्जी अनुबन्धों की कारगुजारी को अंजाम दिया है, उससे निश्चित रूप में उत्तराखण्ड की मीडिया सवालों के घेरे में आ गई है। वरिष्‍ठ पत्रकरों का भी मत है कि ऐसे लोगों ने मीडिया की पूरी जमात को बदनाम कर दिया है और इन लोगों को मीडिया जगत में बहिष्‍कार किया जाना चाहिए, जो पत्रकारिता की आड़ में अपने निजी हितों को गैरकानूनी तरीके से साधने का काम कर रहे हैं।

देहरादून से नारायण परगाईं की रिपोर्ट.

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...