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पढि़ए.. पुष्‍प सवेरा ने कैसे इन खबरों से किसी का ”आनंद” खराब किया

आगरा की मीडिया में एक बड़ी दिलचस्‍प लड़ाई शुरू हो चुकी है. दैनिक जागरण एवं हिंदुस्‍तान ने पुष्‍प सवेरा अखबार के मालिक के पुत्र पुनीत के खिलाफ बड़ी खबर क्‍या छापी इस अखबार ने भी अपनी तोप का मुंह उसी तरफ घुमा दिया है. इशारों ही इशारों में अखबार ने एक बड़े अखबार के बड़े पत्रकार को मीडिया माफिया बताते हुए उनके पुराने इतिहास को नए सिरे से लिखने की कोशिश शुरू कर दी है. जिस तरह की स्थिति है उसमें स्‍पष्‍ट है कि अब यह लड़ाई लम्‍बी चलने वाली है. आप भी देखिए पुष्‍प सवेरा में प्रकाशित समस्‍त खबरों को.

आगरा की मीडिया में एक बड़ी दिलचस्‍प लड़ाई शुरू हो चुकी है. दैनिक जागरण एवं हिंदुस्‍तान ने पुष्‍प सवेरा अखबार के मालिक के पुत्र पुनीत के खिलाफ बड़ी खबर क्‍या छापी इस अखबार ने भी अपनी तोप का मुंह उसी तरफ घुमा दिया है. इशारों ही इशारों में अखबार ने एक बड़े अखबार के बड़े पत्रकार को मीडिया माफिया बताते हुए उनके पुराने इतिहास को नए सिरे से लिखने की कोशिश शुरू कर दी है. जिस तरह की स्थिति है उसमें स्‍पष्‍ट है कि अब यह लड़ाई लम्‍बी चलने वाली है. आप भी देखिए पुष्‍प सवेरा में प्रकाशित समस्‍त खबरों को.

मीडिया माफिया ने तिल का ताड़ बनाया

कार्यालय प्रतिनिधि
आगरा। यहां के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब मीडिया में घुसे माफिया ने समाचार पत्रों और पत्रकारों के बीच स्थापित सौहार्द तथा एकता को तार-तार किया है। एक नगण्य और मामूली सी घटना को मीडिया माफिया ने तिल का ताड़ बना दिया। यह किसी की निजता पर रंजिशवश और ब्लैकमेलिंग के लिए किया गया भीषण हमला था। शहर के दो नामचीन अखबारों ने पुष्पांजलि ग्रुप के डाइरेक्टर पुनीत अग्रवाल से सम्बंधित मामूली खबर को जिस तरह सनसनीखेज बनाकर आक्रामक अंदाज में छापा, उसकी सर्वत्र निंदा हो रही है। सवाल यह है कि तमाम तरह की कालिख में लिपटे ये अखबार नवीस अपने गिरेबान में कभी क्यों नहीं झांकते? इसमें घुसे मीडिया माफिया के कई चेहरे ऐसे हैं जिनके दामन पर शर्मनाक रंगरेलियों, अय्याशियों, शराबखोरियों और गुंडागर्दी के अनेक दाग लगे हैं। पूर्व में आगरा के समाचार पत्र जगत में सौहार्द और एकता का माहौल था। रंजिश और ब्लैकमेलिंग के उद्देश्य से तब मामूली निजी बातों को सनसनीखेज बनाकर नहीं छापा जाता था। बाजारवाद और व्यावसायिकता तब मीडिया के रिश्तों के आड़े नहीं आती थी।
 
आज परिदृश्य बदल गया है और मीडिया पर पीत पत्रकारिता के जरिए काली कमाई करने वाले बदनाम चेहरे काबिज हो गये हैं जो प्रभारी के तौर पर हर पत्रकार की सीट को बेचते हैं। आय से ज्यादा सम्पत्ति के मामले में इनकी जांच होनी चाहिए क्योंकि इन्होंने अकूत चल-अचल सम्पत्ति अर्जित कर ली है। मीडिया में घुसे कई खतरनाक और निम्न श्रेणी के असामाजिक लोग अब जंगल में पशुओं की तरह खूंखार हो गये हैं। ये नौकरशाहों और राजनीतिज्ञों के सामने श्वान की तरह दुम हिलाते हैं तथा जोकर की तरह हंसते हैं। समाचार पत्रों की आड़ में मीडिया से जुड़े ऐसे लोग जमकर दलाली करते हैं और पत्रकारिता का खौफ दिखाकर व्यापारियों, सामाजिक लोगों को ब्लैकमेल करते हैं। यह लोग पुष्पाजंलि ग्रुप को भी समय-समय पर ब्लैकमेल करने का प्रयास करते रहे हैं। पत्रकारिता के नाम पर कलंक इन धंधेबाजों द्वारा डायरेक्टर के मामले में खबर दबाने के लिए मोटी रकम देने की सूचनाएं भेजीं। नाकाम होने पर इन्होंने पत्रकारिता की तोपों के मुंह पुष्पांजलि की तरफ कर दिये। सिंगल कालम की मामूली सी खबर को कई पृष्ठों पर छापकर तिल का ताड़ बना दिया गया। पुष्पाजंलि गु्रप के डायरेक्टर पुनीत अग्रवाल का जितना मान मर्दन ये कर सकते थे, इन्होंने किया जो एक अपराध है। मान मर्दन से पहले हरी पर्वत थाने पर कई असामाजिक तत्वों को बुलवाकर गुण्डागर्दी की नई मिसाल कायम कराई गयी। डायरेक्टर को थाने में रात बिताने को मजबूर कर दिया गया। पुलिस पर पहाड़ जैसा दबाव बनाकर मुकदमा कायम करा दिया गया जबकि वह ऐसा कतई नहीं चाहती थी। सवाल डायरेक्टर की सुरक्षा का भी था। मीडिया ब्लैकमेलरों के इस अंधे तंत्र ने बाहरी तत्वों की मदद से डायरेक्टर पर थाने में कातिलाना हमला भी बोला था।


महिला जन जागृति समिति ने जलार्इं जागरण की प्रतियां

आगरा। महिलाओं को बदनाम करने और मामले को अनावश्यक तूल दिए जाने को लेकर आक्रोशित महिलाओं ने बुधवार को बोदला चौराहे पर दैनिक जागरण समाचार पत्र की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने समाचार पत्र के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी महिलाओं का नेतृत्व समिति की अध्यक्ष श्रीमती कमलेश चाहर कर रही थीं। निर्धारित कार्यक्रम के तहत प्रदर्शनकारी महिलाएं बोदला चौराहे पर एकत्रित हुईं। प्रदर्शन में शामिल महिलाओं का कहना था कि दैनिक जागरण अखबार गरीब महिलाओं को बदनाम करने का काम कर रहा है और ऐसी महिलाओं के मामले को तिल का ताड़ बनाकर पेश किया जाता है। विगत दिवस संजय प्लेस के मामले में एक महिला को बदनाम करने करने के लिए अखबार में झूठी खबर छापी। यही नहीं इसके बावजूद दैनिक जागरण से जुड़े पत्रकार उक्त गरीब महिला पर अनावश्यक रूप से दबाव बना रहे हैं। वहीं पुलिस ने भी एक सोची-समझी रणनीति के तहत बदनाम की जा रही महिला का बयान लेकर उसका पक्ष जानने की कोशिश नहीं की।

प्रदर्शनकारी महिलाओं ने कहा कि समाचार पत्र की ओर से महिला और परिजनों को लगातार धमकियां दी जा रही हैं। वहीं अखबार में महिलाओं के खिलाफ सम्मान से परे खबरें छापी जा रही हैं। बाद में प्रदर्शनकारी महिलाओं ने दैनिक जागरण अखबार की प्रतियां जलाते हुए आक्रोश जताया। प्रदर्शन में शकुन्तला देवी, सुनीता ठाकुर, मुन्नी चौधरी, भगवती देवी, मिथलेश राजपूत, किशन देवी, मधु बघेल, संजय चौहान, कविता चौधरी आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।


अय्याशी करते पकडे गए थे पत्रकार जी

आगरा। फर्जी घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने में जुटे एक पत्रकार खुद भी खूब चर्चित रहे हैं। वो कभी अपने समाचार पत्र में क्राइम रिपोर्टर हुआ करते थे, तब संजय प्लेस के एक होटल में उनकी अय्याशी चर्चा में आई थी। मामला किसी तरह रफा-दफा किया गया था। घटना करीब सात-आठ साल पुरानी है। यह पत्रकार होटल में अपनी प्रेमिका को लेकर पहुंचे थे। उक्त लड़की का नाम हमें पता है, लेकिन मर्यादा के तहत प्रकाशित नहीं कर रहे। यह भंडाफोड़ उनकी पत्नी ने ही किया था, वह होटल पहुंच गई और खूब हंगामा मचाया। मामला काफी दिनों तक चर्चा में रहा था। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (नगर) ने मामला निपटाया था। मामले में समाचार पत्र के आला अधिकारी ने हस्तक्षेप किया था। उस समय सिटी प्रभारी तक मामला पहुंचा था और उन्होंने मामले में जवाब तलब किया था।  इसकी पुष्टि आज भी उनके द्वारा की गई है।


मीडिया की भूमिका पारदर्शी नहीं-सांसद सीमा

आगरा। बसपानेत्री एवं फतेहपुरसीकरी सांसद श्रीमती सीमा उपाध्याय ने संजय प्लेस में शहर के नामचीन बिल्डर पुनीत अग्रवाल के मामले में मीडिया की भूमिका पर सवालिया निशान लगाया है। शहर के कुछ प्रमुख समाचार पत्रों ने खबर पर मंथन नहीं किया और न ही तह तक जाने का प्रयास किया। चौथे स्तंभ कहे जाने वाले मीडिया के लिए गंभीर चिंतन का विषय है। उन्होंने पूरे घटनाक्रम को एक नियोजित षड़यंत्र करार दिया। सांसद श्रीमती उपाध्याय ने कहा कि मीडिया को सनसनीखेज खबरों के जरिए सुर्खियों में बने रहने वाली सोच में परिवर्तन लाना होगा। सांसद का कहना था कि इस पूरे प्रकरण की शासन द्वारा उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। श्रीमती उपाध्याय ने कहा कि अपने लोकसभा चुनाव के दौरान दैनिक जागरण की ओर से उनके और रामवीर उपाध्याय की शादी को लेकर स्केंडल प्रकाशित कर उनकी और रामवीर उपाध्याय जी की सामाजिक, राजनीतिक प्रतिष्ठा को धूमिल किया गया था। बाद में दैनिक जागरण समूह से जुड़े संपादकीय विभाग के जिम्मेदार लोगों को इस प्रकरण में न केवल माफी मांगनी पड़ी थी बल्कि खेद भी प्रकाशित किया गया था। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि मीडिया को लोकतंत्र की आवाज जरूर कहा गया है, लेकिन किसी व्यक्ति विशेष के चारित्रिक हनन का अधिकार उसे नहीं दिया गया है।


मीडिया के लोग कर रहे मर्यादा का उल्लंघन : गुटियारी लाल

आगरा। बसपा नेता एवं छावनी क्षेत्र के विधायक गुटियारी लाल दुबेश ने कहा कि मीडिया के लोग मर्यादाओं का उल्लंघन कर रहे हैं। उन्हें शहर के प्रतिष्ठित व्यक्ति  पुनीत अग्रवाल की सामाजिक प्रतिष्ठा को धूमिल करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि उक्त घटना की जितनी निंदा की जाय, कम है। श्री दुबेश ने कहा कि श्री अग्रवाल के साथ घटित घटना शर्मसार कर देने वाली है। पुलिस की कार्रवाई से समाज को आघात पहुंचा है। शहर के सभ्रांत व्यक्ति से शातिर अपराधी की तरह सलूक किया गया। विधायक ने कहा कि उक्त मामला पूर्व नियोजित है और इसमें रंजिशन तथा बदला लेने की बू आती है। इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।


षड़यंत्र करके झूठे में फंसाया पुनीत अग्रवाल को : सुधीर जैन

आगरा। सिद्ध वाली स्टील्स प्राइवेट लिमिटेड के अधिकृत डीलर सुधीर कुमार जैन का कहना है कि एक सोची-समझी साजिश रचकर पुष्पांजलि कंस्ट्रक्शन कंपनी के निदेशक पुनीत अग्रवाल को झूठे केस में फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि मैं और मेरा परिवार पुष्पांजलि समूह के चेयरमैन डॉ. वीडी अग्रवाल तथा उनके परिवार से पिछले 24 साल से जुड़ा हुआ है। इसलिए वह परिवार के सभी सदस्यों के आचरण के बारे में विस्तृत रूप से जानते हैं। श्री जैन ने कहा कि डॉ. वीडी अग्रवाल तथा श्रीमती पुष्पा अग्रवाल ने अपने बच्चों पुनीत अग्रवाल और मयंक अग्रवाल को ऐसे संस्कार दिए हैं, जो किसी गलत आदतों व गलत विचारों के नहीं हो सकते हैं। श्री अग्रवाल दंपति अत्यंत धार्मिक व समाजसेवी परिवार है। उक्त प्रकरण के संदर्भ में कहूंगा कि इस परिवार को बदनाम करने की साजिश रची गई है और रंजिशन बदला लेने के भाव से पुनीत के खिलाफ झूठा केस बनाया गया है।

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