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आगरा में पुष्‍प सवेरा और अग्रवाल समाज ने दैनिक जागरण व इसके एनई आनंद शर्मा के खिलाफ मोर्चा खोला

आगरा के लालाओं ने दैनिक जागरण का बहिष्कार कर दिया हैं. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़ शुक्रवार को आगरा के लालाओं ने एसएसपी से मुलाकात की और उन्हें बताया कि दैनिक जागरण के समाचार संपादक आनंद शर्मा ने उन्हें व उनके समाज के अग्रणी समूह पुष्पांजलि के निदेशक पुनीत अग्रवाल को फंसाया है. इस कार्य में पुलिस की सहायता ली गयी है. बताया गया है कि इस सम्बन्ध में आगरा के बिल्डरों ने भी एक बैठक का आयोजन किया है, जिसमें दैनिक जागरण के बहिष्कार की योजना बनायी गई है.

आगरा के लालाओं ने दैनिक जागरण का बहिष्कार कर दिया हैं. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़ शुक्रवार को आगरा के लालाओं ने एसएसपी से मुलाकात की और उन्हें बताया कि दैनिक जागरण के समाचार संपादक आनंद शर्मा ने उन्हें व उनके समाज के अग्रणी समूह पुष्पांजलि के निदेशक पुनीत अग्रवाल को फंसाया है. इस कार्य में पुलिस की सहायता ली गयी है. बताया गया है कि इस सम्बन्ध में आगरा के बिल्डरों ने भी एक बैठक का आयोजन किया है, जिसमें दैनिक जागरण के बहिष्कार की योजना बनायी गई है.

यह ध्यान रहे कि आगरा लालाओं का क्षेत्र है. यहां वैश्य समाज का बोलबाला है और यहाँ के अधिकाँश व्यापार पर इनका ही कब्ज़ा है. ऐसे में इनका गुस्सा दैनिक जागरण को महंगा पड़ सकता है. आगरा में पुष्प सवेरा ने दैनिक जागरण की प्रतियों को जलाना प्रारंभ कर दिया है. इस समूह ने अपने समाचार पत्र के माध्यम से भी समाचार सम्पादक आनंद शर्मा और दैनिक जागरण पर हमला बोल दिया है. अखबार पुष्‍प सवेरा में जो कुछ खबरें प्रकाशित हैं, उसे नीचे दिया जा रहा है…


जागरण के समाचार संपादक पर गंभीर आरोप

आगरा। दैनिक जागरण के पूर्व संपादकीय प्रभारी ने जागरण के समाचार संपादक आनंद शर्मा पर उनके विरुद्ध साजिश रचने, शारीरिक तथा मानसिक रूप से क्षति पहुंचाने और सेवा से पृथक कराने के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से मामले की सीबीआई जांच कराकर उनको न्याय दिलाने और दोषियों के विरुद्ध कारगर कार्रवाई करने की मांग की है।

विनोद भारद्वाज ने मुख्यमंत्री को भेजी शिकायत में कहा है कि वह 1987 से दैनिक जागरण में क्राइम रिपोर्टर, चीफ रिपोर्टर, डिप्टी न्यूज एडीटर आदि रहे हैं। उन्होंने ही 1998 में दैनिक जागरण में हुई नौ दिन चली हड़ताल का नेतृत्व किया था, जिसके परिणामस्वरूप प्रबंधन अंदरूनी तौर पर उनसे खुंदक खाता था। इसलिए उसने सालों के अंतराल के बाद साजिश के तहत मेरे ही जूनियर और सहायक रहे आनंद शर्मा को ताबड़तोड़ बेहिसाब पदोन्नतियां और वेतनवृद्धि का चारा डालकर मेरे विरुद्ध आपराधिक षड़यंत्र का हथियार बनाया और योजनाबद्ध तरीके से हम दोनों को आमने-सामने कर दिया।

इसके तहत 29 जुलाई 2010 को मेरे विरुद्ध आपराधिक साजिश रची गई। उसके तहत राज परमार नाम के होम्योपैथिक डॉक्टर से कार्यालय में ही मुझे दवा के नाम पर एक्यूट नारकोटिक्स दिलवा दिए गए। पहली खुराक पीने के आधा घंटा बाद ही मुझे गंभीर हालत में जीजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया। जहां मेंटल डिसआर्डर जैसी स्थिति में तीन दिन तक भर्ती रहा। इसके बाद कई माह तक शारीरिक और मानसिक रूप से असामान्य स्थिति में लगातार विभिन्न डॉक्टरों के उपचार में रहा।

श्री भारद्वाज ने कहा कि पूरा मामला स्थानीय अधिकारियों के सामने रखा तो उन्होंने हाथ खड़े कर दिए। उसके बाद 18 नवंबर 2010 को तत्कालीन डीजीपी कर्मवीर सिंह से लखनऊ जाकर मिला। उन्होंने साजिश के खुलासे की जिम्मेदारी एसटीएफ के आईजी सुवेश कुमार सिंह को दी, लेकिन एसटीएफ के सीओ नित्यानंद राय ने जांच के नाम पर खानापूर्ति कर अपराध के सुबूत मिटाने में साजिशकर्ताओं का सहयोग ही किया। बाद में पता चला कि प्रबंधन के दबाव में उच्च स्तरीय हस्तक्षेप के कारण मेरे मामले में कार्रवाई नहीं की जा रही है।

मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव नेतराम के सामने मामला रखे जाने पर भी उन्होंने एक बार फिर से जांच की औपचारिकता निभाई। अंतत: प्रबंधन ने डेढ़ साल तक मेरी रिपोर्ट भी दर्ज नहीं होने दी। इससे क्षुब्ध होकर प्रोटेस्ट स्वरूप मैंने सशर्त इस्तीफा दिया कि कार्यालय में आपराधिक षडयंत्रों के चलते मेरा काम करना संभव नहीं है। इस पर प्रबंधतत्र ने बिना कोई जांच किए उल्लिखित समय सीमा से दो माह पहले ही इस्तीफा स्वीकार कर लिया। साथ ही मेरे घर पर फुल एंड फाइनल का चेक भिजवा दिया।

उन्होंने कहा कि मामले में कोई कार्रवाई न होने पर अंतत: मैं इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण में गया। हाईकोर्ट के निर्देश पर पुलिस ने मजबूरी में 29 फरवरी 2012 को मुकदमा दर्ज किया, लेकिन आपराधिक साजिश खोलने या डॉक्टर से पूछताछ करने की भी जहमत नहीं उठाई। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि प्रोटेस्ट के रूप में दिए गए मेरे इस्तीफे को स्वीकार कर प्रबंधन ने अनैतिक और गैरकानूनी कार्रवाई कर संदेश दिया है कि इन्हीं परिस्थितियों में हमारे यहां नौकरी करके मर जाओ या फिर इस्तीफा देकर अपने घर जाओ। श्री भारद्वाज ने आरोप लगाया है कि अंतत: वे अपनी साजिश में कामयाब हो गए। यह पूरा मामला आपराधिक होने के साथ मानवाधिकारों के हनन का भी बनता है। उन्होंने इस मामले की शिकायत मानवाधिकार आयोग और भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष मार्कण्डेज काटजू से भी की है।


पुनीत को झूठा फंसाने पर अग्रवाल समाज लामबंद

कार्यालय प्रतिनिधि
आगरा। शहर की नामचीन भवन निर्माता कंपनी पुष्पांजलि कंस्ट्रक्शन कंपनी के डायरेक्टर पुनीत अग्रवाल को फर्जी मामले में फंसाए जाने को लेकर अग्रवाल समाज के लोग लामबंद हो गए हैं। अग्रवाल महासभा के बैनर तले गुरुवार को आहूत आपात बैठक में वक्ताओं ने एक स्वर से घटना की निंदा करते हुए प्रस्ताव पारित किया कि इस मामले में आज महासभा का एक प्रतिनिधिमंडल वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मुलाकात करेगा।

महासभा के संस्थापक एवं विधायक जगन प्रसाद गर्ग ने कहा कि पुनीत अग्रवाल का परिवार बहुत ही धार्मिक और सामाजिक परिवार है। छेड़छाड़ के झूठे केस में पुनीत अग्रवाल को फंसाए जाने से परिवार को काफी आघात पहुंचा है। उन्होंने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराए जाने की मांग की है। साथ ही इस प्रकरण में दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

बैठक में वक्ताओं का कहना था कि जिस तरह से पुनीत को फंसाया गया है, उस तरह किसी भी व्यक्ति को फंसाकर उसकी जिन्दगी बर्वाद की जा सकती है। वक्ताओं ने पुरजोर मांग की कि पुनीत के खिलाफ लगाया गया मुकदमा अविलंब वापस लिया जाय। बैठक में तय किया गया कि यदि पुनीत अग्रवाल पर दर्ज फर्जी केस को वापस नहीं लिया गया तो अग्रवाल समाज एक व्यापक आंदोलन खड़ा करेगा, इससे उत्पन्न हालातों के लिए प्रशासन उत्तरदायी होगा। बैठक को सुरेश अग्रवाल, जगत नारायण अग्रवाल, विकास बंसल, मुरारी लाल गोयल, मुकेश अग्रवाल नेचुरल, ब्रिजेंद्र अग्रवाल,सोनू मित्तल, संजीव अग्रवाल, रामसनेही अग्रवाल, राजीव अग्रवाल आदि ने संबोधित किया। बैठक में महापौर इंद्रजीत आर्य की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही। अध्यक्षता महासभा के कार्यकारी अध्यक्ष दिनेश बंसल कातिब ने की।


अब संभ्रांत व्यक्ति सुरक्षित नहीं : विधायक कालीचरन

आगरा। अब तो कोई भी संभ्रांत व्यक्ति सुरक्षित नहीं है, न जाने कब और कहां पर किसको झूठे केस में फंसाकर जबरिया अपराधी बना दिया जाय। यह कहना है आगरा ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से विधायक कालीचरन सुमन का। उन्होंने कहा कि शहर के नामचीन बिल्डर पुष्पांजलि ग्रुप के डायरेक्टर पुनीत अग्रवाल के साथ घटित घटनाक्रम इसी मानसिकता का द्योतक है। वहीं इस मामले में एक सुनियोजित साजिश की बू भी आती है। उन्होंने कहा कि संभ्रांत व्यक्ति को एक सोची-समझी रणनीति के तहत छेड़छाड़ के आरोप में फंसाया जाता है। इस मामले में कुछ समाचार पत्र तिल का ताड़ बनाकर पेश किया है।


निजता से अधिक समाज में व्याप्त बुराइयों को खोजें : डॉ. देवेंद्र गुप्ता

आगरा। प्रख्यात शल्य चिकित्सक डॉ. देवेंद्र गुप्ता का कहना है कि मीडिया को निजता से अधिक समाज में व्याप्त उन बुराइयों को खोजना चाहिए, जो अधिसंख्य लोगों को प्रभावित करती हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को निजता का अधिकार है। हर व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति के निजता के अधिकार की सुरक्षा करनी चाहिए। अगर यह दायित्व चिकित्सकों के ऊपर हो सकता है तो यह दायित्व पत्रकारों के ऊपर तो और अधिक होता है। पत्रकारों को गटर पत्रकारिता (खबरों को सनसनीखेज बनाकर प्रस्तुत करना) से बचना चाहिए। गटर पत्रकारिता की जगह इनको खोजी पत्रकारिता पर विश्वास करना चाहिए। पत्रकारों को समाज का वॉच डॉग (समाज पर नजर रखने वाला) कहा जाता है, उन्हें निजता से अधिक समाज में व्याप्त उन बुराइयों को खोजना चाहिए, जो अधिसंख्य लोगों को प्रभावित करती है।


मीडिया को अपनी मर्यादा का पालन करना चाहिए : चौ. भीकम सिंह

आगरा। देश का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले मीडिया जगत को समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर अपनी मर्यादाओं का पालन करना चाहिए। यह कहना है राष्‍ट्रीय लोकदल के पूर्व मंडल/जिलाध्यक्ष चौधरी भीकम सिंह का। उन्होंने कहा कि शहर की प्रख्यात भवन निर्माता कंपनी पुष्पांजलि ग्रुप के डायरेक्टर पुनीत अग्रवाल के साथ घटित घटनाक्रम में पुलिस के साथ-साथ मीडिया ने अमर्यादित रुख अख्त्यिार किया। यह वास्तव में चिंतनीय विषय है। चौधरी भीकम सिंह का कहना है कि मौका-ए-वारदात की तमाम परिस्थितियां इस बात की ओर इशारा करती हैं कि पुनीत अग्रवाल को एक राजनीति के तहत मोहरा बना दिया गया, जबकि पुनीत अग्रवाल और उनके परिवार के बारे में वह व्यक्तिगत रूप से काफी जानते हैं। मृदुभाषी, धार्मिक प्रवृत्ति और सामाजिक क्षेत्र में अग्रणी पुष्पांजलि ग्रुप के चेयरमैन डॉ. वीडी अग्रवाल के बेटे पुनीत संस्कारित व्यक्ति हैं, वह ऐसा घृणित कार्य नहीं कर सकते। उनको झूठे केस में फंसाए जाने के पीछे षड़यंत्र की बू आती है। इस मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए ताकि कोई निर्दोष व्यक्ति दंड का भागीदार न बने।

साभार- पुष्प सवेरा अखबार

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