: आखिर ऐसे लोगों को कौन बनाता है पत्रकार? : लखनऊ। आखिर ऐसे लोगों को पत्रकार कौन बनाता है? और क्यों ऐसे लोगों को पत्रकारिता जगत में लाया जाता है। जिनका न कोई सामाजिक उद्देश्य होता है और न तो कोई मर्यादाएं। एक तरफ पत्रकारिता जगत में जहां लोग अपनी लेखनी को दबाने पर नौकरी से त्याग पत्र देने का कार्य करते हैं वही इन जैसे लोगों के कारण पत्रकारिता की छवि दिन-प्रतिदिन धूमिल होती जा रही है। दरअसल इनको पत्रकारिता से लेना-देना कुछ नही बस इनको पत्रकार का एक ठप्पा चाहिए जिससे ये अपने व्यक्तिगत कार्य को कराते रहें। पकड़े जाने पर ये पत्रकार का रौब गांठकर बड़े आराम से निकल जाते हैं। लेकिन गौर करें तो चंद अफसरों ने अपने ऊपर रिस्क लेकर इन पत्रकारों को जेल की हवा खिलाने का कार्य किया है जो अपने आप में एक अनूठा कदम है।
सबसे अहम बात ये हैं कि इन जैसे लोगों को आखिर पत्रकार बनाता कौन है। जो सामाजिक क्रिया कलापों और समाज की सेवा को छोड़कर चंद लाभ के लिए पत्रकारिता को बदनाम करने में पीछे नहीं रहते है। उसका उतना नाम हुआ हैं जो जितना बदनाम हुआ है, इश्क में हम बदनाम हुए हैं तेरा भी तो नाम हुआ है। गजल की उक्त पक्तियां उनके ऊपर भी दाग लगाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ती है जो इन जैसे लोगों को पत्रकार बनाने में अहम भूमिका अदा करते हैं।
बता दें कि इस तरह के कई मामले हैं जिसमें पकड़े जाने पर वह अपने आप को पत्रकार बताते है। इतना ही नहीं उनके पास संस्थान के परिचय पत्र भी मिलते हैं। जिसे वह बड़े ही अदब से अधिकारियों के सामने पेश करते हुए दिखाई देते हैं। गौर करें तो कुछ मामलों में फर्जी पत्रकारों को भी गिरफ्तार किया जाता है। ताजा मामला हजरतगंज का है। हजरतगंज पुलिस ने 5 जनवरी को फर्रुखाबाद जिले की सरकारी चीनी मिल में प्रभारी सुरक्षा अधिकारी के पद पर कार्यरत पिता को सुरक्षा अधिकारी का पद दिलाने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के पीएस के रुप में सहकारी चीनी मिल संघ लिमिटेड के प्रबन्ध निदेशक को फोन कर दबाव बनाने वाले बेटे को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार पुत्र ने पिता को प्रोन्नति दिलाने के लिए कई बार फोन किया था।
प्रभारी सुरक्षा अधिकारी के पद पर तैनात रामकुमार शर्मा को सुरक्षा अधिकारी बनाने के लिए पीएस गजेन्द्र सिंह के रूप में फोन कर सहकारी चीनी मिल संघ लिमिटेड के प्रबन्ध निदेशक रवि प्रकाश अरोड़ा पर हिमांशु उपाध्याय दबाव डाल रहा था। जहां 1 जनवरी को रवि प्रकाश अरोड़ा ने सूचना दी कि किसी अंजान व्यक्ति ने उन्हें फोन कर अपने आपको मुख्यमंत्री का पीएस गजेन्द्र सिंह बताते हुए रामकुमार शर्मा को सुरक्षा अधिकारी बनाए जाने के लिए दबाव डाल रहा है। शंका होने पर उन्होंने मुख्यमंत्री के पीएस गजेन्द्र सिंह से वार्ता की तो उन्होंने फोन करने की बात से इंकार किया। हजरतगंज पुलिस ने हिमांशु का लोकेशन ट्रेस कर गिरफ्तार कर लिया गया। हिमांशु के मुताबिक वह एक साप्ताहित पत्रिका में अपराध संवाददाता है। उसके पास से एक साप्ताहिक अखबार के अपराध संवाददाता का फर्जी परिचयपत्र व सेलफोन बरामद हुआ। इतना ही नहीं उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की तो कई राज उजागर हुए।
हिमांशु ने कबूला कि अपने पिता की पदोन्नति के लिए उसने एमडी रविप्रकाश को फोन किया था। कई बार पत्रकारिता की आड़ लेकर मुख्यमंत्री आवास जा चुके हिमांशु को उनके पीएस का नाम मालूम था। अधिकारियों से बातचीत के लहजे को बारीकी से देखा और खुद को पीएस बताकर फोन करने लगा। इससे पहले हिमांशु ने इसी तरह रणवीर सिंह के पास से पैनकुली विभाग का सुरक्षा चार्ज हटवाया था। इसके अलावा उसने चीनी मिल में सिविल इंजीनियर एपी सिंह पर मिल की जमीन बेचने का आरोप लगाकर उनके पास से सुरक्षा अधिकारी का अतिरिक्त चार्ज हटवाया। इसके अलावा वह परिचयपत्र दिखाकर पुलिसकर्मियों पर रौब जमाते हुए टोल टैक्स प्लाजा पर शुल्क भी नहीं देता था। गौर करें तो इससे पूर्व में भी कई फर्जी पत्रकारों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
लेखक गोपाल जी वर्मा दैनिक अवध प्रांत में अपराध संवाददाता हैं.






