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सुख-दुख...

पत्रकारिता की साख-सरोकार को लेकर आंसू बहाने वाले ही इस गिरावट के जिम्‍मेदार हैं

नैनीताल – उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के "आत्मोसर्ग की पत्रकारिता के सौ साल" कार्यक्रम के तहत उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन और आदर्श प्रेस क्लब हल्दूचोड (लालकुआं) ने साझा तौर पर हिंदी पत्रकारिता के प्राण-तत्व अमर शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी और "प्रताप" के युग की समाजोन्मुख पत्रकारिता पर हल्दूचोड में विचार गोष्ठी का आयोजन।

नैनीताल – उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के "आत्मोसर्ग की पत्रकारिता के सौ साल" कार्यक्रम के तहत उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन और आदर्श प्रेस क्लब हल्दूचोड (लालकुआं) ने साझा तौर पर हिंदी पत्रकारिता के प्राण-तत्व अमर शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी और "प्रताप" के युग की समाजोन्मुख पत्रकारिता पर हल्दूचोड में विचार गोष्ठी का आयोजन।

उत्तराखंड सरकार में श्रममंत्री हरीश चन्द्र दुर्गापाल बतौर मुख्य अतिथि गोष्ठी में मौजूद थे। आईएफडब्लूजे के मानवाधिकार प्रकोष्ट के संयोजक पीसी तिवारी और उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के प्रदेश महासचिव प्रयाग पाण्डे गोष्ठी के विशिष्ठ अतिथि थे। गोष्ठी की अध्यक्षता आईएफडब्लूजे के राष्ट्रीय पार्षद बीसी भट्ट ने की। जबकि संचालन वरिष्ठ पत्रकार गणेश पाठक ने किया।

उत्तराखंड सूबे के कैबिनेट मंत्री हरीश चन्द्र दुर्गापाल ने कहा कि पत्रकारिता और समाज का बहुत बड़ा और घनिष्ट सम्बन्ध रहा है। पत्रकारिता ने समाज को सही राह दिखाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आजादी के आंदोलन में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने पत्रकारिता को ढाल के रूप में इस्तेमाल किया। अमर शहीद श्री गणेश शंकर विद्यार्थी जी भी इन्हीं में से एक थे। इसीलिए आज के घोर व्यावसायिक दौर में गणेश शंकर विद्यार्थी जी और "प्रताप" की जनपक्षीय पत्रकारिता को याद करना बेहद जरुरी है। उन्होंने कहा कि पत्रकार का काम सिर्फ घटनाओं का व्यौरा देना नहीं है। बल्कि पत्रकार एक लोक शिक्षक है। समाज को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करना पत्रकारों की बुनियादी जिम्मेदारी है। श्रममंत्री हरीश चन्द्र दुर्गापाल ने कहा कि उनके छह दशक से ज्यादा लम्बे सामाजिक और राजनैतिक जीवन में यह पहला मौका है कि उन्हें भारतीय पत्रकारिता के गौरवशाली इतिहास को इतनी बारीकी से जानने और समझने का सुअवसर मिला। इसके लिए श्रममंत्री ने उत्तराखंड श्रमजीवी  पत्रकार यूनियन का शुक्रिया अदा किया। कहा कि यह उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन की बेहद महत्वपूर्ण पहल है कि वह पत्रकारों की वर्तमान पीढ़ी को आत्मोसर्ग की भारतीय पत्रकारिता से वाकिफ करा मौजूदा पत्रकारिता को बदलाव की ओर अग्रसर करने का प्रयास कर रही है।

आईएफडब्लूजे के मानवाधिकार प्रकोष्ट के संयोजक पीसी तिवारी ने कहा कि आज पत्रकारिता में बाजार और उपभोक्तावाद हावी हो गया है। पत्रकारिता जन सरोकारों से दूर होती चली जा रही है। आज के पत्रकार को गणेश शंकर विद्यार्थी जी की भूमिका में आने की सख्त जरूरत है। उन्होंने अलग उत्तराखंड राज्य बनने के बारह सालों बाद भी प्रदेश में विधिवत प्रेस और विज्ञापन समितियों का गठन नहीं होने पर हैरत जताई। कहा कि राज्य में नई सूचना नीति और प्रेस परिषद् के गठन की आवश्यकता है।

उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के प्रदेश महासचिव प्रयाग पाण्डे ने अमर शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी और "प्रताप" के आदर्श पत्रकारीय जीवन पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गणेश शंकर विद्यार्थी जी ने कलम द्वारा समाज सुधार की क्रांति को जन्म दिया। उन्होंने कलम को तलवार से ज्यादा ताकतवर बना अंग्रेजी शासन की नींव हिला कर रख दी थी। गणेश शंकर विद्यार्थी जी ने सिर्फ "प्रताप" का ही सम्पादन नहीं किया। केवल ख़बरें ही नहीं लिखीं। बल्कि उन्होंने समाज की बेहतरी के लिए हर क्षेत्र में भागीदारी की। संघर्ष किया। वे बिट्रिश साम्राज्यवाद की सभी बुराइयों के साथ भारतीय समाज के भीतर फैली बुराइयों और देशी पूंजीवाद और सामन्तवाद से भी लड़े। गणेश शंकर विद्यार्थी जी ने आजादी की लड़ाई को सिर्फ ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खात्मे तक ही सीमित नहीं रखा। बल्कि गणेश शंकर विद्यार्थी जी देश के भीतर मौजूद आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक विषमताओं के खिलाफ भी जमकर संघर्ष किया। यूनियन के प्रांतीय उपाध्यक्ष पंकज वार्ष्णेय ने उत्तराखंड श्रमजीवी  पत्रकार यूनियन के "आत्मोसर्ग की पत्रकारिता के सौ साल" के तहत तय किए गए वर्षभर के कार्यक्रमों का व्यौरा रखा। कहा कि यूनियन इस साल 9 नवम्बर तक उत्तराखंड के हरेक जिले, नगर और कस्बों में "आत्मोसर्ग की पत्रकारिता के सौ साल" मनाएगी।

वरिष्ठ पत्रकार और साहित्कार दिवाकर भट्ट ने द्विवेदी युग में "सरस्वती" पत्रिका द्वारा साहित्य और भाषा के विकास में दिए गए अमूल्य योगदान को याद किया। कहा कि हिंदी पत्रकारिता को साहित्य और जन सामान्य से जोड़ने का काम श्री द्विवेदी जी "सरस्वती" के जरिये कर चुके थे। पर पत्रकारिता को राजनीति और सामाजिक सरोकारों से जोड़ने के श्रेय गणेश शंकर विद्यार्थी जी और उनके द्वारा सम्पादित "प्रताप" को ही जाता है। उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के इलेक्ट्रोनिक मीडिया प्रकोष्ठ के संयोजक गणेश रावत ने कहा कि गणेश शंकर विद्यार्थी जी के आदर्श आज ज्यादा प्रासंगिक है। अपने आदर्शों की हिफाजत के लिए उन्होंने सब कुछ न्यौछावर कर दिया था। गणेश शंकर विद्यार्थी जी का बलिदान साम्प्रदायिक सौहार्द के लिए किए गए बलिदान की सबसे अनूठी और प्रेरणादायक मिशाल है। यूनियन के मानवाधिकार प्रकोष्ठ के संयोजक ओपी पाण्डे ने कहा कि मौजूदा पत्रकारिता के मूल्यों एवं सरोकारों और वैचारिक स्तर पर आ रही जबरदस्त गिरावट न केवल पत्रकारों और पत्रकारिता के लिए बल्कि समाज और लोकतंत्र के लिए भी बेहद घातक है। नई खुली अर्थव्यवस्था, बाजारवाद और उपभोक्तावाद ने पत्रकारिता को भी संवेदनहीन बना दिया है। संवेदनहीनता ने पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिंह लगा दिए है। इस लिहाज से आज गणेश शंकर विद्यार्थी जी को याद करना बेहद जरूरी हो गया है।

उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के पूर्व जिला अध्यक्ष और वरिष्ठ प्रकार प्रभात ध्यानी ने कहा कि पत्रकारिता में आज अपने को जनपक्षीय सोच और सरोकारों का दिखाने के लिए ही पराड़कर या गणेशशंकर विद्यार्थी की बात की जाती है। व्यवहार में ठीक इसका उल्टा होता है। दुखद बात यह है जो लोग मौजूदा दौर की पत्रकारिता की साख और सरोकारों को लेकर आंसू बहते नजर आते हैं। असल में पत्रकारिता में आ रही इस गिरावट के लिए वही लोग सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। उन्होंने ने कहा कि यह साल अमर शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी जी द्वारा सम्पादित "प्रताप" का सौवां साल है। हिंदी पत्रकार जगत में कहीं कोई हलचल नहीं है। यूनियन के जिला अध्यक्ष विपिन चन्द्रा ने कहा कि आज पराड़कर या गणेशशंकर विद्यार्थी जी द्वारा स्थापित पत्रकारिता के मानक और मूल्यों को लेकर पत्रकारिता से जुड़ा कोई बड़ा नाम या समाचार संस्थान बात तक करने को राजी नहीं है। वजह जब पराडकर या गणेशशंकर विद्यार्थी जी की बात होगी तो मौजूदा दौर की पत्रकारिता का जिक्र अनिवार्य रूप से होगा। सभी बड़े समाचार संस्थान इससे बचाना चाहते हैं।

सभा अध्यक्ष बीसी भट्ट ने मौजूदा दौर की पत्रकारिता पर व्याख्यान दिया। कहा कि उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन की कोशिश है कि "आत्मोसर्ग की पत्रकारिता के सौ साल" कार्यक्रम के जरिये गणेश शंकर विद्यार्थी और "प्रताप" के युग की समाजोन्मुख पत्रकारिता से ज्यादा से ज्यादा पत्रकारों और समाज के संवेदनशील लोगों को वाकिफ कराया जा सके। कार्यक्रम में भगवान सिंह गंगोला, प्रमोद बमेठा, मास्टर प्रताप सिंह, माधव पालीवाल, प्रसून पांडे, रमाकांत पन्त, आनन्द भट्ट, हरीश पाण्डे, प्रकाश जोशी, वसंत पाण्डे, त्रिभुवन उप्रेती, उमेश पंत, अजय उप्रेती, डॉ तारा जोशी, जीवन जोशी, रिम्पी बिष्ट समेत कुमाऊँ के विभिन्न जिलों से आए सैकड़ों पत्रकारों ने हिस्सेदारी की। गोष्ठी के अंत में श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के पूर्व जिला अध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार ओम प्रकाश आर्या के निधन पर दो मिनट का मौन रख उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।

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