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नवभारत के संपादक ने दो रिपोर्टरों से की धोखेबाजी

: शरद पांडेय एवं लक्ष्‍मी नारायण को कार्यालय आने से मना किया : इसे रिपोर्टरों की बेबसी कहे या संपादकों की मनमानी कि डूबती नाव समझे जाने वाले नवभारत अखाबर के संपादक ने दो रिपोटरों को अचानक ही कार्यालय आने से मना कर दिया। वे इसका कारण भी नहीं जान सके। मामला छत्तीसगढ के बिलासपुर का है। यहां नवभारत अखबार में शहर के दो तेज तर्रार रिपोर्टर शरद पांडेय और लक्ष्मीनारायण विश्वकर्मा ने लगभग तीन माह पूर्व ज्वाइन किया था। शरद दैनिक हरिभूमि से आया और लक्ष्मी नारायण पत्रिका से।

: शरद पांडेय एवं लक्ष्‍मी नारायण को कार्यालय आने से मना किया : इसे रिपोर्टरों की बेबसी कहे या संपादकों की मनमानी कि डूबती नाव समझे जाने वाले नवभारत अखाबर के संपादक ने दो रिपोटरों को अचानक ही कार्यालय आने से मना कर दिया। वे इसका कारण भी नहीं जान सके। मामला छत्तीसगढ के बिलासपुर का है। यहां नवभारत अखबार में शहर के दो तेज तर्रार रिपोर्टर शरद पांडेय और लक्ष्मीनारायण विश्वकर्मा ने लगभग तीन माह पूर्व ज्वाइन किया था। शरद दैनिक हरिभूमि से आया और लक्ष्मी नारायण पत्रिका से।

पिछले तीन महीनों में ही दोनों रिपोर्टरों ने कई एक्सक्लूसिव बाईलाइन स्टोरी दी है। अपनी अपनी बीट के महारथी इन दोनों रिपोर्टरों ने इस दौरान कोई खबर छोड़ दी हो ऐसी भी कोई शिकायत भी नहीं है। लेकिन अचानक काम पर नहीं आने को कह दिया गया। नवभारत प्रबंधन ने पूरी तरह इन लोगों से धोखेबाजी करते हुए इन लोगों के करियर को मुश्किल में डाल दिया है। दोनों पत्रकार नवभारत प्रबंधन के इस रवैये से नाराज हैं।

सूत्रों के अनुसार जब दोनों रिपोर्टरों ने इस कार्रवाई का कारण जानना चाहा तो उन्हें कुछ भी बताने से मना कर दिया गया। इसके बाद सिटी चीफ अमिताभ तिवारी के माध्यम से कहलवाया गया कि शरद पांडेय को खबर लिखना नहीं आता और काम के प्रति लापरवाह हैं। तीन माह के दौरान परफार्मेंस ठीक नहीं था। वहीं लक्षमीनारायण के मामले में एक साथ दो स्थानों पर काम करने को कारण बताया गया। दरअसल लक्ष्‍मी कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विवि के एसबीआर कालेज में अतिथि प्रवक्ता के रूप में भी पिछले तीन चार साल से कार्यरत हैं।

गौरतलब है कि दोनों ही रिपोर्टर लंबे समय तक दैनिक भास्कर जैसे अखबार में सफलता पूर्वक सेवाएं दी है और दोनों की गुरु घासीदास विवि से पत्रकारिता में स्नातकोतर उपाधि प्राप्त है। इनको काम से निकाले जाने के पीछे इनके पूर्व संस्थानों के लोगों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। क्योंकि एक को कहीं काम नहीं करने देने की धमकी दी गई थी तो दूसरे को करियर चौपट कर देन की बात कही गई थी। बहरहाल मामला जो भी हो अब शहर के दो तेज रिपोर्टर हताश और निराश हैं। प्रेस क्लब से भी सहयोग की कोई उमीद नहीं है क्योंकि प्रेस क्लब का अध्यक्ष भी नवभारत का ही कर्मचारी है।


इस खबर पर बाद में मिली लक्ष्‍मी नारायण की प्रतिक्रिया- लक्ष्मीनारायण ऐसी किसी भी बात से इनकार करते हैं. उनका कहना है कि यह बात पूरी तरह सत्‍य नहीं है. मुझे नवभारत से निकाले जाने तथा संपादक जी पर लगाए गए आरोप पूर्णत: असत्‍य हैं. संपादक जी ने मेरे कार्यकाल के दौरान मेरा लगातार मार्गदर्शन किया है. मुझे किसी प्रकार की शिकायत नवभारत प्रबंधन या संपादक जी से नहीं है. भड़ास पर प्रकाशित खबर के चलते उनके करियर को नुकसान हो रहा है.

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