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विभूति नारायण राय के नेतृत्व का बेशर्म और घोटालेबाज ‘हिंदी समय’ : सीएजी रिपोर्टों की चेतावनी

'हिंदी समय' को गढ़ने की जिद्द एक ऐसे 'पुलिसिया साहित्यकार' के द्वारा की जा रही है, जो अपनी 'अतृप्त वासनाओं' के साथ हिंदी की सत्ता पर आसीन होना चाहता है, अपनी कुंठाओं से हिंदी भाषा साहित्य और शिक्षा जगत को हांकना चाहता है। फरवरी में हिंदी विश्वविद्यालय में दूसरी बार 'हिंदी समय' का आयोजन हो रहा है, पहली बार तब हुआ था, जब इसके पुलिसिया कुलपति सत्ता पर आसीन हुए थे और दूसरी बार तब जब वह अपना कार्यकाल पूरा कर वहां से विदा होने जा रहे हैं और उनकी गिद्ध दृष्टि किसी दूसरे हिंदी संस्थान पर बनी है।

'हिंदी समय' को गढ़ने की जिद्द एक ऐसे 'पुलिसिया साहित्यकार' के द्वारा की जा रही है, जो अपनी 'अतृप्त वासनाओं' के साथ हिंदी की सत्ता पर आसीन होना चाहता है, अपनी कुंठाओं से हिंदी भाषा साहित्य और शिक्षा जगत को हांकना चाहता है। फरवरी में हिंदी विश्वविद्यालय में दूसरी बार 'हिंदी समय' का आयोजन हो रहा है, पहली बार तब हुआ था, जब इसके पुलिसिया कुलपति सत्ता पर आसीन हुए थे और दूसरी बार तब जब वह अपना कार्यकाल पूरा कर वहां से विदा होने जा रहे हैं और उनकी गिद्ध दृष्टि किसी दूसरे हिंदी संस्थान पर बनी है।

इसके पहले कि भारत की एक संवैधानिक संस्था सीएजी के द्वारा विभूति राय के भ्रष्ट कारनामों पर हम सिलसिलेवार नजर डालें जरा उस अतृप्त वासना और गिद्ध दृष्टि को ध्यान में ले लें जो एक पुलिस अधिकारी की वासना और गिद्ध दृष्टि है, जो भाषा की सत्ता पर प्रारम्भ से ही हावी होना चाहता था और विचारधाराओं की बाजीगरी से एक लम्बे समय तक चकाचौंध पैदा करता रहा है। बाकौल विभूति राय  (जो उन्होंने अपनी वर्धा ताजपोशी के बाद अपने पहले भाषण में उद्घाटित किया था) उनके दिल में एक हुक तब से ही उठती थी, जब वे उत्तर प्रदेश में एक पुलिसिया अफसर हुआ करते थे और दिल्ली के सिरीफोर्ट से गुजरते हुए हिंदी विवि का 'दिल्ली कार्यालय' देखा करते थे।

वह समय अशोक वाजपेयी का समय था और तब जनाब राय अपने लिए साहित्यकारों, आलोचकों को साधने के लिए अपने साहित्यिक कद के हिसाब से प्रयासरत रहते थे। तब तक नामवर सिंह काशीनाथ सिंह को चेतावनी दे चुके थे कि विभूति से बच कर रहा जाय क्योंकि वह 'अन्स्क्रुप्लस ' है। तब तक 'दिल्ली की दीवार ' जैसी रचनाओं में ही ऐसी पुलिसिया महत्वाकांक्षा और उसका छद्म समग्रता से पढ़ा-समझा जा सका था. उसका मूर्त रूप दिखना बाकी था क्योंकि तब सिरीफोर्ट से गुजरते हुए इस विवि की सत्ता पर हावी होने की वासना और टिस राय के दिल में ही दफ़न थी, जो निराकार स्वप्न से साकार हकीकत में 2008 में तब्दील हो सकी. इसके बाद ही दिल की अतृप्त वासनाओं के साथ वे 'हिंदी समय' को चाबुक से हांकते हुए अवतरित हुए। वर्धा का हिंदी विवि भ्रष्टाचार, लूट, चरित्रहीनता, विश्वासघात का केंद्र बनता चला गया। लेकिन साथ ही सत्ता की ताकत और संपत्ति के हम्माम में राय झाग के साथ खड़े अपने 'इष्टदेवों' के आवाहन में लगे थे, जो या तो सीधे या थोड़े मान-मनुहार से या 'छिनाल प्रकरण' में थोड़ी आँखें दिखाकर हम्माम में 'मज्जन-मग्न' हो गए।

वर्धा में पुलिसिया साहित्यकार और दारोगा कुलपति के कारनामे तो बहुत से हैं लेकिन 'हिंदी समय' के आयोजन के चकाचौंध के पीछे की हकीकत को सीएजी की रिपोर्ट के हवाले से समझ कर विभूति के 'हिंदी समय' की पहचान की जा सकती है और उससे भाषा और साहित्य को बचने-बचाने का प्रयास किया जा सकता है।

हिंदी विवि – सीएजी रिपोर्ट – खुलासा 1 : दर्जनों नियुक्तियां अवैध हैं

2012 के अपने ऑडिट रिपोर्ट में 2011 में हुए तीन सालों के ऑडिट में चिह्नित आर्थिक अनियमितताओं को पुनः दुहराते हुए अन्य गंभीर आरोप तय किये गए हैं, जबकि दारोगा कुलपति विभूति राय पिछले जुलाई में पत्रकारों को बता रहे थे कि 2011 के ऑडिट रिपोर्ट में लगे आरोप जल्द ही सी ए जी वापस ले लेगी। राय के गृह राज्य की एक विवादित एजेंसी को बिना टेंडर के दिए गए निर्माण कार्य को 2011 तक के ऑडिट रिपोर्ट में चिह्नित किया गया था इस बार की रिपोर्ट में इसी विवादित कंपनी के साथ 2 करोड़ रुपये की सुरक्षा राशि के घपले की बात की गई है, अब देखना यह होगा कि उस दो करोड़ में से कितनी राशि राय के गाँव ' जोकहरा ' पहुंची या फिर नोएडा या उत्तराखंड . पुनः 1.5 करोड़ की राशि का बारा न्यारा भी एक इंजीनियरिंग कंसल्टेंट की अवैध नियुक्ति के रूप में की गई है।

जिन नियुक्तियों को अवैध बताया गया है और उन्हें मिले इन्क्रीमेंट या प्रोमोशन में लाखो रुपये की रिकवरी कर वि वि को निर्देश दिया गया है की सी ए जी को सूचित किया जाय , उनमें गोपीनाथन जी के समय से चली आ रही 11 अवैध नियुक्तियां हैं। अमरेन्द्र शर्मा, शम्भू जोशी , अमित राय , संदीप सपकाले , शैलेश कदम मर्जी , संतोष भदौरिया ( सभी डिस्टेंस में ) , अवंतिका शुक्ला , शम्भू गुप्त ( स्त्री अध्ययन ) , पियूष प्रताप सिंह , पुस्तकालयाध्यक्ष घोष और सह पुस्तकालयाध्यक्ष  मलयज , विभिन्न घोटालों में भागीदार के के त्रिपाठी, दो ओ एस डी सहित अनेक नियुक्तियों को अवैध माना  गया है और उन्हें हो रहे भुगतान को घोटाला।

हिंदी विवि – सीएजी रिपोर्ट – खुलासा 2 : प्रसिद्ध साहित्यकार अभिमन्यु अनत को फर्जी डिलीट की उपाधि

सीएजी के 2012 के रिपोर्ट के अनुसार 2008 में मारीशस स्थित प्रसिद्द हिंदी साहित्यकार , 'लाल पसीना ' के रचनाकार अभिमन्यु अनत को डिलीट की फर्जी डिग्री दी गई थी .वैसे यह डिग्री तत्कालीन बिहार-राज्यपाल और दलित नेता 'रा सू गवई ' को भी दी जा रही थी , लेकिन हमारे द्वारा इस डिग्री के फर्जी होने के तथ्य उपलब्ध कराने पर वे समारोह में नहीं आये थे और डिग्री लेने से उन्होंने मना कर दिया था, अभिमन्यु अनत को वह डिग्री दे दी गई थी। अब जाकर सी ए जी ने मान लिया है कि वह डिग्री फर्जी थी .

इसके साथ ही सी ए जी वि वि में शैक्षणिक -गैरशैक्षणिक कर्मियों को कराइ जा रही पी एच डी को भी अवैध बताया है, जिनमें वहां व्याख्याता के रूप में कार्यरत राकेश मिश्र ,अमरेन्द्र शर्मा, सुप्रिया पाठक, अवंतिका शुक्ल आदि की पी एचडी शामिल है। पिछली बार सी ए जी ने स्पेशल ऑडिट रेकमेंड किया था यदि ऐसा हो या कोई जांच हो तो और भी कई एमफिल पी एच दी और एम् ए डिग्रियां अवैध घोषित की जा सकेंगी .

हिंदी विवि – सीएजी रिपोर्ट – खुलासा 3 : 'चोर गुरु' अनिल राय की चोरी का बचाव कर रहा है विवि

सीएजी के 2012 के रिपोर्ट के अनुसार वि वि ने ऑडिट कर्ताओं को बहुत सी फाइलें नहीं उपलब्ध करवाई हैं, यदि उन्हें उपलब्ध करवाया गया होता तो 'दारोगा कुलपति' का चेहरा थोडा और खुलता। खैर रिपोर्ट चोरी से किताब लिखने के मामले में ' चोरगुरु ' का नोट लेती है और वि वि पर उसे बचाने का तिकड़म रचने का आरोप तय करती है।

'चोर गुरु' विभूति का रिश्तेदार और उनका प्रिय है, कई नियुक्तियां करवाने की लेनदारी फ़ाइल उसके पास ही सुरक्षित होती है। मंत्रालय का एक आई ए एस अधिकारी भी विभूति के प्रभाव में उसे बचाने में लगा है। मैंने आर टी आई से कुछ कागजात मांगे थे , जो मुझे अपील के बाद भी उपलब्ध नहीं कराये गए हैं। मैं कमीशन में अपील कर चुका हूँ। सी ए जी अपने रिपोर्ट में विभूति के 'कई बारगेनिंग फ़ाइल ' का जिक्र करती है, जो ऑडिट कर्ताओं को उपलब्ध नहीं कराया गया।

हिंदी विवि – सीएजी रिपोर्ट – खुलासा 4 – लूट के अलग-अलग उद्योग विकसित किये हैं दारोगा कुलपति ने

सीएजी के 2012 के रिपोर्ट ne उत्तर प्रदेश की निर्माण एजेंसी के जरिये 2 करोड़ की लूट के सीधे उल्लेख के अलावा किश्तों में हो रहे है लूट की पहचान की है :

1. अभिजित इंटेलिजेंस सेक्युरिटी : सीएजी के अनुसार इस एजेंसी को एक साल में 40 लाख 88 हजार रुपये का गलत लाभ पहुँचाया गया है। यह वही एजेंसी है जो विभूति के छोटे कृपा प्राप्तों को टेंडर पर विवि में बहाल करती है। इसपर नियन्त्रण वि वि के रजिस्ट्रार कैलाश खामरे का है।

2. इन्डियन नालेज कारपोरेशन : वि वि का एम बी ए -बी बी ए पाठ्यक्रम संचालित करने वाली इस एजेंसी को 30 लाख का नाजायज फायदा सिर्फ एक साल में पहुँचाया गया है। इस एजेंसी का रिश्ता पूर्व राष्ट्रपति के परिवार से बताया जाता है। रजिस्ट्रार खामरे की नियुक्ति का दवाब इसी एजेंसी ने एक हाई प्रोफाइल 'अमरावती निवासी ' से कराई थी .

3. डाट सत्यम हैदराबाद : इस कंपनी को लेंग्वेज लैब बनाने में गलत टेंडर देकर लाखो का लाभ पहुँचाया गया है। हैदराबाद इन दिनों विभूति का आना जाना तो बढ़ा ही है एक उप कुलसचिव का रिश्ता भी हैदराबाद से है, जो एक ज़माने में कई प्रकार की खरीदारियों में संग्लग्न था।

हिंदी विवि – सीएजी रिपोर्ट – खुलासा 5 – नरेन्द्र सिंह और तुषार वानखेड़े की जुगलवंदी

सी ए जी के 2012 के रिपोर्ट में कई दर्जन नियुक्तियों को अवैध बताया गया है , उनमें दो नियुक्तियां हैं क्रमशः नरेन्द्र सिंह और तुषार वानखेड़े की। ये दोनों महानुभाव विभूति के लुटेरे ' रथ ' के दो पहिये हैं। नरेन्द्र सिंह को उत्तर प्रदेश के किसी विभाग में एक कनीय पद से वि वि में विभूति ने उन्हें निर्माण कार्य की सम्पूर्ण जिम्मेवारी सौप दी , तमाम खरीददारियों का ओ एस डी भी बना डाला . नरेन्द्र सिंह ठेकेदारों से दारू के महंगे ब्रांड से लेकर सारे हिसाब- किताब को शीर्ष तक पहुँचाने के एजेंट हैं, जिनको साथ मिला है तुषार वानखेड़े का , जो बिना स्नातक डिग्री के ही असिस्टंट बना दिया गया है। इन दोनों नियुक्तियों पर भी सी ए जी ने आपत्ति जाहिर की है। वैसे आयकर और अन्य विभागों की जांच हो तो इनकी अकूत संपत्ति का भी खुलासा हो, फिलहाल तो ये लोग वि वि में अनैतिक गतिविधियों के प्रथम दूसरे दरवाजे बने हुए हैं। सी ए जी अपने हर रिपोर्ट में उनपर उंगलियाँ उठाती है।

हिंदी विवि – सीएजी रिपोर्ट – खुलासा 6 – नियुक्तियों में अनु सूचित जाति -जनजाति पिछड़ी जाति की उपेक्षा

सी ए जी ने 2012 के अपने रिपोर्ट में नियुक्तियों में अनु सूचित जाति -जनजाति पिछड़ी जाति की उपेक्षा को चिह्नित किया है। कुल 75 शैक्षणिक नियुक्तियों में अनुसूचित -जनजाति और पिछड़ी जाति का अनुपात क्रमशः 17.33%, 05.33%तथा 14.67% है। वैसे ही गैर शैक्षणिक 115 नियुक्तियों में अनुसूचित जाति का प्रतिनिधित्व क्रमशः ग्रुप ए , ग्रुप बी , ग्रुप सी में 13.04%,9.75%तथा 11.76% है , जबकि अनुसूचित जनजाति क्रमशः 8.69%,7.31%,1.96% और पिछड़ी जाति का क्रमशः 17.39%, 2.43% और 21.57% है। 

सी ए जी आरक्षित पदों को न भरने की प्रशासनिक मंशा को चिह्नित करती है, जो यूं जी सी के द्वारा लगातार चेतावनी के बावजूद उभर कर आई है. वैसे विभूति ने अपनी नियुक्ति के बाद से ही अपना दलित विरोधी रुख स्पष्ट कर दिया था , धृष्टता का आलम यह कि वे मंच से खुलेआम घोषणा करते थे कि वे भरी सभा में चेहरों को देखकर पहचान सकते हैं कि कौन दलित हैं .

सीएजी रिपोर्ट 2011 ने सरकार को रेकमेंड किया था की हिंदी वि वि का विभूति के कार्यकाल का स्पेशल ऑडिट कराया जाय। इसके बाद कई सांसदों ने मानव संसाधन विकास मंत्री को लिखा , मंत्रालय के स्टैंडिंग कमिटी के मेंबर कैप्टन जयनारायण निषाद ने लिखा , संसद की लोकलेखासमिति ने लिखा , लेकिन मंत्रालय के अफसरशाह इनकी संस्तुतियों को वि वि से शो काउज के लिए इस्तेमाल कर इसे ठंढे बस्ते में डाल दे रहे हैं , मानो मंत्रालय के अफसर अपने एक नौकरशाह कुलपति को बचने के लिए सिर्फ कोरियर की भूमिका में हैं।

विभूति अपनी नौकरशाही के अपने अनुभवों से हिंदी की सत्ता पर हिनहिना रहे हैं ' छिनाल प्रकरण ' में उनके विरोध में गए लोग नतमस्तक हो  चुके हैं। दो लगातार आये सी ए जी रिपोर्टों में यह स्पष्ट है कि सीधे पैसे लूट की रकम 5 करोड़ से ज्यादा है और आर्थिक अनियमितताएं तो करोडो में है ही। उन पर 'फर्जी मायग्रेशन ' देने के आरोप में वर्धा  की एक  अदालत नें  मुकदमा दर्ज करवा रखा है,ले किन वर्धा का पुलिस कप्तान उनसे भाईचारा निभा रहा है, उन्हें गिरफ्तार करने की जगह उनके साथ मंचासीन हो  रहा  है। 4-5  फरवरी को विभूति के हरम में हिंदी की बड़ी जमात पहुँचने वाली है। दारोगा कुलपति और साहित्यकार विभूति राय की अतृप्त वासना की तृप्ति का महोत्सव 'हिंदी समय' के रूप में मनाया जाने वाला है.

राजीव सुमन, जिनके आवेदन पर आदालत ने विभूति पर 420 सहित अनेक धाराओं में मुकदमा दर्ज करवाया है का कहना है, ' हमें विश्वास है  विभूति ताकतवर है, 'हिंदी समय' को गढ़ने की जिद्द में हैं लेकिन चोटाला उनसे अधिक ताकतवर थे, इसलिए उन्हें भी न्याय मिलेगा . दरअसल  विभूति के नेतृत्व का 'हिंदी समय' 'बेशर्म और घोटालेबाज हिंदी समय' होगा.

वर्धा से संजीव चंदन की रिपोर्ट. संपर्क- [email protected]

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