Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

आवाजाही, कानाफूसी...

दैनिक भास्‍कर के एक पत्रकार ने शराब पीकर मचाया हंगामा

: कानाफूसी : समाज में कई प्रकार का नशा है. हर नशा अपने आप में बहुत खास होता है. ऐसा ही एक नशा है पत्रकारिता का नशा. आज हर कोई दूसरों को सुधारने की बात करता है, जैसे वह दूसरों को सुधारने के लिए पैदा ही हुआ है. मगर खुद कोई सुधरने को तैयार नहीं है. बठिंडा में पत्रकार बिरादरी में ऐसे कई लोग अक्सर मिल जाते हैं. दो दिन पहले की बात है मैं रेलवे स्टेशन में मुसाफिर खाने के बाहर किसी का इंतजार कर रहा था कि अचानक दैनिक भास्कर, बठिंडा यूनिट के पत्रकारों की टीम एक के बाद एक कर वहां पहुंचने लगी.

: कानाफूसी : समाज में कई प्रकार का नशा है. हर नशा अपने आप में बहुत खास होता है. ऐसा ही एक नशा है पत्रकारिता का नशा. आज हर कोई दूसरों को सुधारने की बात करता है, जैसे वह दूसरों को सुधारने के लिए पैदा ही हुआ है. मगर खुद कोई सुधरने को तैयार नहीं है. बठिंडा में पत्रकार बिरादरी में ऐसे कई लोग अक्सर मिल जाते हैं. दो दिन पहले की बात है मैं रेलवे स्टेशन में मुसाफिर खाने के बाहर किसी का इंतजार कर रहा था कि अचानक दैनिक भास्कर, बठिंडा यूनिट के पत्रकारों की टीम एक के बाद एक कर वहां पहुंचने लगी.

मैं भी उत्सुकता से इन लोगों का यहां पहुंचने का कारण खोजने लगा. पता चला कि यूनिट में काम के बोझ से दबे एक पत्रकार बंधु ने अत्याधिक शराब पी ली है और अब अवैध तौर पर खाने के साथ शराब पिलाने वाले ढाबे वालों के साथ पान-बीड़ी वालों से झगड़ा कर रहे हैं, गालियां तो ऐसे निकाल रहे थे जैसे गलियां देने में पीएचडी कर रखी है. हमने भी अपना मोबाइल निकाला और पूरे नजारे को कैमरे में कैद करने लगा. इन पत्रकार बंधु के साथ जो पत्रकार आए वह तो उनके साथ ही बेसुध थे. यही नहीं जो भी उन्हें रोक रहा था उन्हें पत्रकार होने की बात कहकर धमिकयां दे रहे थे.

बाद में मामला बिगड़ता देख उन्होंने इसकी की जानकारी दफ्तर के कुछ दूसरे रिपोर्टरों को दी. किसी तरह सभी पत्रकार साथी मिलकर इन बेसुध पत्रकार बंधु को वहां से लेकर गए. इसके बाद किसी तरह ढांबा संचालकों से लेकर आसपास खड़े लोगों ने चैन की सांस ली. अब भाई लोगों आप ही बताओ ऐसे पत्रकारों का क्या करें, जो स्वयं को कानून से ऊपर होकर कई बार असमाजिक तत्वों की तरह व्यवहार करने लगते हैं. इससे ना केवल पत्रकारिता की गरिमा गिरती है बल्कि पत्रकारों की साख को भी बट्टा लगता है.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...