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जनसंदेश टाइम्‍स, बनारस ने ‘पत्र’ का फर्जीवाड़ा बंद किया

जनसंदेश टाइम्‍स, बनारस ने संपादकीय पेज पर 'पत्र' कॉलम में किया जाने वाला फर्जीवाड़ा बंद कर दिया है. अब यहां से कुछ नए पत्र तथा दूसरे जगह से आने वाले पत्रों को उसी नाम पते से प्रकाशन कर रहा है. इसके साथ ही अखबार ने स्‍थानीय स्‍तर पर पाठकों से पत्र भेजने के लिए सूचना प्रकाशित की है. यह सारे बदलाव भड़ास पर खबर आने के बाद किए गए हैं. इस बदलाव से कम से कम अब पाठक गलत सूचना नहीं पा सकेंगे. 

जनसंदेश टाइम्‍स, बनारस ने संपादकीय पेज पर 'पत्र' कॉलम में किया जाने वाला फर्जीवाड़ा बंद कर दिया है. अब यहां से कुछ नए पत्र तथा दूसरे जगह से आने वाले पत्रों को उसी नाम पते से प्रकाशन कर रहा है. इसके साथ ही अखबार ने स्‍थानीय स्‍तर पर पाठकों से पत्र भेजने के लिए सूचना प्रकाशित की है. यह सारे बदलाव भड़ास पर खबर आने के बाद किए गए हैं. इस बदलाव से कम से कम अब पाठक गलत सूचना नहीं पा सकेंगे. 

सूत्रों का कहना है कि कुछ लोग पाठकों को धोखा देने के लिए अखबार के खिलाफ पीसीआई को शिकायत करने की तैयारी भी कर रहे हैं. क्‍योंकि जनसंदेश टाइम्‍स द्वारा किया गया काम पाठकों के साथ धोखेबाजी होने के साथ ही नैतिक रूप से भी गलत था. कम से कम किसी भी अखबार से इस तरह की भ्रामक या गलत काम की अपेक्षा नहीं की जाती है. लोग अखबारों पर आज भी आंख बंद करके विश्‍वास करते हैं, परन्‍तु जनसंदेश टाइम्‍स के कुछ लोग आंख बंद करके पाठकों को धोखा दे रहे थे. 
 
गौरतलब है कि जनसंदेश टाइम्‍स, बनारस सभी एडिशनों के लिए लखनऊ से तैयार होने वाले पेज पर छेड़छाड़ करते हुए फर्जी तरीके पत्र लिखने वाले व्‍यक्ति का नाम तो ज्‍यों का त्‍यों प्रकाशित कर रहा था, परन्‍तु जगह का नाम बदल दे रहा था. अन्‍य एडिशन में संपादकीय का सेंट्रल पेज बिना किसी बदलाव के लगाया जाता था पर बनारस एवं इलाहाबाद में छेड़छाड़ करके गलत सूचनाएं दी जाती थीं. खैर, देर से ही जनसंदेश टाइम्‍स के संपादकीय टीम को अकल आ गई है और उन्‍होंने स्‍थानीय स्‍तर पर पत्र कॉलम के लिए पाठकों से पत्र मांगना शुरू कर दिया है.
 
नीचे जनसंदेश टाइम्‍स में हुए बदलाव को देखने के लिए फोटो पर क्लिक करें. उसके नीचे भड़ास पर प्रकाशित संबंधित खबर.  
 


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