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मजीठिया वेज बोर्ड : टाइम्‍स ऑफ इंडिया ने अपना पक्ष रखा, बहस आज भी जारी

सुप्रीम कोर्ट में पत्रकारों और गैर पत्रकार कर्मचारियों के लिए न्यायमूर्ति मजीठिया वेतन आयोग की सिफारिशों के खिलाफ दायर याचिका पर बहस बुधवार को भी जारी रहेगी. मंगलवार को टाइम्‍स ऑफ इंडिया के प्रबंधन ने कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखा. टीओआई की तरफ से वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता पीपी राव ने बहस की तथा प्रबंधन का पक्ष कोर्ट के सामने रखा. आज और कल यानी गुरुवार तक कोर्ट में प्रबंधन अपना पक्ष रखेगा. माना जा रहा है कि यह सुनवाई अगले सप्‍ताह तक चल सकती है.

सुप्रीम कोर्ट में पत्रकारों और गैर पत्रकार कर्मचारियों के लिए न्यायमूर्ति मजीठिया वेतन आयोग की सिफारिशों के खिलाफ दायर याचिका पर बहस बुधवार को भी जारी रहेगी. मंगलवार को टाइम्‍स ऑफ इंडिया के प्रबंधन ने कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखा. टीओआई की तरफ से वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता पीपी राव ने बहस की तथा प्रबंधन का पक्ष कोर्ट के सामने रखा. आज और कल यानी गुरुवार तक कोर्ट में प्रबंधन अपना पक्ष रखेगा. माना जा रहा है कि यह सुनवाई अगले सप्‍ताह तक चल सकती है.

 गौरतलब है कि मजीठिया वेज बोर्ड पर स्‍टे के लिए आनंद बाजार पत्रिका, बेनेट कोलमैन, इंडियन न्‍यूज पेपर सोसाइटी, यूनाइटेड न्‍यूज ऑफ इंडिया, प्रिंटर्स मैसूर प्राइवेट लिमिटेड, राजस्‍थान पत्रिका, ट्रिब्‍यून ट्रस्‍ट, पीटीआई, जागरण प्रकाशन लिमिटेड, एक्‍सप्रेस प्रकाशन (मदुरई) तथा इंडियन एक्‍सप्रेस ने याचिका दायर कर रखी है. पिछले सप्‍ताह से जारी बहस में आनंद बाजार पत्रिका समेत कई मीडिया संस्‍थानों की बहस पूरी हो चुकी है. इस संस्‍थानों की तरफ से वरिष्‍ठ अधिवक्‍ताओं ने अपना अपना पक्ष रखा. 
 
मजीठिया वेज बोर्ड मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में माननीय जज आफताब आलम और रंजना प्रकाश देसाई की डबल बेंच के समक्ष चल रहा है. अखबारों के प्रबंधन की तरफ से बहस खतम होने के बाद सरकार की तरफ से अपना पक्ष रखा जाएगा. समझा जा रहा है कि फाइनल बहस खतम होने के बाद सुप्रीम कोर्ट इस मामले में अपना फैसला सुनाएगा. मजीठिया वेज बोर्ड पर स्‍टे के लिए याचिका दायर करने वाले सभी संस्‍थानों की कोशिश है कि इस मामले को लंबा खिंचा जा सके. इसके लिए इन संस्‍थानों ने कई वरिष्‍ठ वकीलों को अपने पक्ष से खड़ा कर रखा है. 
 
उल्‍लेखनीय है कि बीते साल 21 सितंबर को सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आठ जनवरी की तिथि तय की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए इसे 5 फरवरी तय किया गया था. कोर्ट ने प्रबंधन को कर्मचारियों को अंतरिम व्यवस्था के रूप में अतिरिक्त भुगतान करने पर विचार का सुझाव भी दिया था. परन्‍तु प्रबंधकों ने ऐसा नहीं किया. सरकार ने मजीठिया वेतन बोर्ड की सिफारिशों के बारे में 11 नवंबर, 2011 को अधिसूचना जारी की थी. 
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