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मजीठिया वेज बोर्ड : पीटीआई ने अपना पक्ष रखा, अगली बहस 26 फरवरी से

सुप्रीम कोर्ट में पत्रकारों और गैर पत्रकार कर्मचारियों के लिए न्यायमूर्ति मजीठिया वेतन आयोग की सिफारिशों के खिलाफ दायर याचिका पर गुरुवार को पीटीआई की तरफ से वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता केके वेणुगोपाल ने बहस की. बहस अभी भी जारी रहेगी. हालांकि अगले सप्‍ताह इस पर सुनवाई नहीं की जाएगी. अगली बहस 26, 27 एवं 28 फरवरी को होगी, जिसमें सरकार तथा पत्रकार संगठनों के वकील अपना पक्ष रखेंगे. इसके पहले वेणुगोपाल ने आईएनएस की तरफ से भी अपना पक्ष रखा था. वे पीटीआई एवं आईएनएस दोनों के वकील है.

सुप्रीम कोर्ट में पत्रकारों और गैर पत्रकार कर्मचारियों के लिए न्यायमूर्ति मजीठिया वेतन आयोग की सिफारिशों के खिलाफ दायर याचिका पर गुरुवार को पीटीआई की तरफ से वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता केके वेणुगोपाल ने बहस की. बहस अभी भी जारी रहेगी. हालांकि अगले सप्‍ताह इस पर सुनवाई नहीं की जाएगी. अगली बहस 26, 27 एवं 28 फरवरी को होगी, जिसमें सरकार तथा पत्रकार संगठनों के वकील अपना पक्ष रखेंगे. इसके पहले वेणुगोपाल ने आईएनएस की तरफ से भी अपना पक्ष रखा था. वे पीटीआई एवं आईएनएस दोनों के वकील है.

मजीठिया वेज बोर्ड मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में माननीय न्‍यायमूर्ति आफताब आलम एवं रंजना प्रकाश देसाई की दो सदस्‍यीय बेंच के समक्ष चल रही है. संभावना है कि अप्रैल के दूसरे सप्‍ताह में कोर्ट इस मामले पर अपना फैसला सुना सकती है. इस बेंच के वरिष्‍ठ सदस्‍य न्‍यायमूर्ति आफताब आलम अप्रैल में ही रिटायर हो रहे हैं, लिहाजा पूरी संभावना है कि अप्रैल के दूसरे सप्‍ताह तक इसमें फैसला सुनाया जा सकता है. फाइनल सुनवाई चल रही है लिहाजा उनके रिटायरमेंट से पहले ही फैसला आ जाने की पूरी संभावना है.   
 
गौरतलब है कि मजीठिया वेज बोर्ड पर स्‍टे के लिए आनंद बाजार पत्रिका, बेनेट कोलमैन, इंडियन न्‍यूज पेपर सोसाइटी, यूनाइटेड न्‍यूज ऑफ इंडिया, प्रिंटर्स मैसूर प्राइवेट लिमिटेड, राजस्‍थान पत्रिका, ट्रिब्‍यून ट्रस्‍ट, पीटीआई, जागरण प्रकाशन लिमिटेड, एक्‍सप्रेस प्रकाशन (मदुरई) तथा इंडियन एक्‍सप्रेस ने याचिका दायर कर रखी है. पिछले सप्‍ताह से जारी बहस में आनंद बाजार पत्रिका समेत लगभग सभी मीडिया संस्‍थानों की बहस पूरी हो चुकी है.  
 
उल्‍लेखनीय है कि बीते साल 21 सितंबर को सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आठ जनवरी की तिथि तय की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए इसे 5 फरवरी तय किया गया था. कोर्ट ने प्रबंधन को कर्मचारियों को अंतरिम व्यवस्था के रूप में अतिरिक्त भुगतान करने पर विचार का सुझाव भी दिया था. परन्‍तु प्रबंधकों ने ऐसा नहीं किया. सरकार ने मजीठिया वेतन बोर्ड की सिफारिशों के बारे में 11 नवंबर, 2011 को अधिसूचना जारी की थी.

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