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महराजगंज

नेपाल: प्रधान न्यायधीश ने कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनने से किया इनकार

महराजगंज। पड़ोसी मुल्क नेपाल मे शनिवार को सर्वसम्मति से प्रधान न्यायाधीश खिलराज रेग्मी को प्रधानमंत्री चुने जाने के चौबीस घंटे बाद  रविवार की देर रात मामला विगड़ गया। श्री रेग्मी सियासी दलों के हस्तक्षेप से आजिज आकर राष्ट्रपति डा0 रामबरन यादव से मिलकर सशर्त प्रधानमंत्री बनने से मना कर दिया। जिससे एक बार फिर नेपाल की सियासत में अनिश्चय की स्थिति पैदा हो गयी है।

महराजगंज। पड़ोसी मुल्क नेपाल मे शनिवार को सर्वसम्मति से प्रधान न्यायाधीश खिलराज रेग्मी को प्रधानमंत्री चुने जाने के चौबीस घंटे बाद  रविवार की देर रात मामला विगड़ गया। श्री रेग्मी सियासी दलों के हस्तक्षेप से आजिज आकर राष्ट्रपति डा0 रामबरन यादव से मिलकर सशर्त प्रधानमंत्री बनने से मना कर दिया। जिससे एक बार फिर नेपाल की सियासत में अनिश्चय की स्थिति पैदा हो गयी है।

बीते वर्ष मई महीने से लेकर अब तक नेपाल की राजनीति में प्रधानमंत्री पद को लेकर उठापठक मची हुई है। जब सियासी दलो मे आपसी तालमेल नही बन पाया तो थक हार कर बीच का रास्ता निकाला गया। जिसमे यह तय हुआ कि प्रधान न्यायाधीश खिलराज रेग्मी को प्रधानमंत्री बनाकर उनके नेतृत्व में जून के पहले मुल्क में नये चुनाव करा दिये जायेंगे। शनिवार को सर्वसम्मति से मुल्क के प्रमुख दलो नेकपा माओवादी, कांगे्स, एमाले एवं मधेशी मोर्चा के नेताओं की आपसी सहमति के बाद श्री रेग्मी को प्रधानमंत्री बनाने का प्रस्ताव पास कर दिया गया। यह तय हुआ कि श्री रेग्मी शपथ लेकर मुल्क की बागडोर अपने हाथ में  लेंगे। तय कार्यक्रम के अनुसार रविवार को न्यायालय का काम  रेग्मी ने नही देखा परन्तु शाम होते-होते स्थिति दूसरी बनने लगी। नेताओं की दखलंदाजी से आजिज आकर श्री रेग्मी ने कहा कि देश इस समय संक्रमण काल की दशा से गुजर रहा है। इससे उबारने के लिए संयम की जरूरत है। दलो का हस्तक्षेप इस प्रयास को कमजोर करेगा।

श्री रेग्मी ने अपने नेतृत्व में बनने वाली सरकार के सहयोगी कौन-कौन होंगे, किसको कौन सा विभाग  मिलेगा इसके लिए स्वतंत्र निणर्य लेना चाहते है। परन्तु सियासी दल अपने हिसाब से विभाग और कार्य का बाटवारा करना चाहते है। रविवार को कई दौर की बैठक होने के बाद मामला नही बन पाया। ऊपर से जरूरत से ज्यादा दलो के हस्तक्षेप से आजिज आकर श्री रेग्मी देर रात राष्ट्रपति भवन जाकर राष्ट्रपति से अपनी मंशा जाहिर करते हुए सरकार का नेतृत्व करने से मना कर दिया। उन्होने साफ कहा कि मै किसी की शर्त के मुताबिक सरकार का नेतृत्व नही करूंगा। मेरी प्राथमिकता निष्पक्ष चुनाव की है। जब तक चुनाव हो नही जाता तब तक मै किसी दल का गैर जरूरी हस्तक्षेप स्वीकार नही करूंगा। श्री रेग्मी द्वारा लिये गये इस निर्णय से एक बार फिर नेपाल की सियासत में अनिश्चय की स्थिति पैदा हो गयी। दूसरी तरफ सियासी दल अब  इस उम्मीद मे है कि श्री रेग्मी ही चुनावी सरकार का नेतृत्व करे। तभी  मुल्क में निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव हो सकते है।

महराजगंज से ज्ञानेंद्र त्रिपाठी की रिपोर्ट.

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