Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

विविध

जूं ने काटा नहीं कि केमिकल लोचा शुरू!

ए जूं पूरे हिंदुस्तान को काट लेकिन जज साहब को मत काट जू। तू काटेगी और जज साहब के उर्वर दिमाग़ में कुछ ना कुछ केमिकल लोचा होगा, केमिकल लोचा होगा तो बयानों के गोले फूटेंगे और यत्र-तत्र सर्वत्र गिरेंगे, कई लोग घायल होंगे। देश भर में खलबली मचेगी, न्यूज़ चैनल सबकुछ छोड़कर इसी गोलाबारी की ख़बर पर लाइव-लाइव खेलने लगेंगे। तेरे काटते ही जज साहब एकदम कटखने हो जाएंगे, इसलिए करबद्ध और कातर प्रार्थना है, और किसी को काट लेकिन जब साहब को मत काट जू।

ए जूं पूरे हिंदुस्तान को काट लेकिन जज साहब को मत काट जू। तू काटेगी और जज साहब के उर्वर दिमाग़ में कुछ ना कुछ केमिकल लोचा होगा, केमिकल लोचा होगा तो बयानों के गोले फूटेंगे और यत्र-तत्र सर्वत्र गिरेंगे, कई लोग घायल होंगे। देश भर में खलबली मचेगी, न्यूज़ चैनल सबकुछ छोड़कर इसी गोलाबारी की ख़बर पर लाइव-लाइव खेलने लगेंगे। तेरे काटते ही जज साहब एकदम कटखने हो जाएंगे, इसलिए करबद्ध और कातर प्रार्थना है, और किसी को काट लेकिन जब साहब को मत काट जू।

जज साहब हर बात पर और बिना बात बोलते हैं। उस पर भी कमाल ये कि जब भी बोलते हैं, पॉलिटिकली इनकरेक्ट ही बोलते हैं। ये भला कैसे मुमकिन है? दुनिया का कोई भी गेंदबाज़ चाहकर भी एक ओवर में छह वाइड बॉल नहीं फेंक सकता, लेकिन जज साहब इतनी कंसिसटेंसी ना जाने कैसे मेंटेन कर लेते है? उन्हे पता होता है कि वो बोलेंगे और दुनिया राशन-पानी लेकर उनके पीछे पड़ जाएंगे। लेकिन जज साहब को इसकी तनिक भी परवाह नहीं। जैसे सूरज रोज़ ढलता है, जैसे चांद रोज़ निकलता है, जैसे रोज़ किसी ना किसी नये घपले-घोटाले की ख़बर आती है, वैसे ही जज साहब रोज़ बोलते हैं। जज साहब का इस तरह बोलना एक बहुत उलझा हुआ सवाल था, लेकिन रात-दिन गहन चिंतन और शोध के बाद इस नाचीज़ ने इस रहस्य का पता लगा लिया है कि जज साहब आखिर इतना क्यों बोलते हैं। इस शोध के साथ इस नाचीज़ ने यह भी साबित कर दिया है कि वो इस देश के 90 फीसदी नहीं बल्कि 10 फीसदी लोगों में है।

निष्कर्ष का संकेत उपर दिया जा चुका है। एक मच्छर के बाद एक जूं इस देश की असली समस्या है। यह जूं एक विशेष प्रजाति की है। यह जूं नेताओं और अफसरों के कानों पर रेंगने से तो साफ इनकार करती है, लेकिन मौका पाकर कुछ चिंतक किस्म के लोगों के सिर में जा छिपती है और मौका पाते की काट लेती है। जूं ने काटा नहीं कि केमिकल लोचा शुरू। बयानों के तीर ऑटोमैटिक वेपन की तरह चलने लगते हैं। पहला हमला इस देश की मूर्ख मीडिया पर, दूसरा हमला अहमक आवाम पर, तीसरा हमला जम्हूरियत के जमूरों पर। देश भर में भूचाल आ जाता है। लोग कहने लगते हैं कि जज साहब नौकरी यूपीए की करती हैं, लेकिन अंदाज़-ए-बयां एकदम दक्षिणपंथी है, ये लीजिये अगला बयान जज साहब मोदी जी पर दाग देते हैं। हमारी भी जय-जय तुम्हारी भी जय-जय के बदले सिर्फ क्षय-क्षय। जो सामने दिखा कर दी उसकी धुलाई। जूं के काटने से केमिकल लोचा जज साहब को हुआ है, लेकिन मारे दर्द के ना जाने कितने लोग काट जू काट जू चिल्ला रहे हैं।

जज साहब पर भले ही जूं का असर हो, लेकिन मुझे उनकी कई बातें ठीक लगती हैं। जज साहब सोशल मीडिया पर पाबंदी के सख्त ख़िलाफ हैं। जज साहब मुंह में माइक ढूंसे जाने के भी ख़िलाफ हैं। इन दोनों बातों पर मेरी सहमति है। फिर भी समझ नहीं आता कि उन्हे अभिव्यक्ति की आज़ादी का प्रतीक मानूं या इलीट के अहंकार का?

पत्रकार राकेश कायस्‍थ के एफबी वॉल से साभार.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...