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जनसंदेश टाइम्‍स में सैलरी लेट, कर्मचारी परेशान

: अपडेट : जनसंदेश टाइम्‍स की हालत फिर खराब है. खबर है कि कर्मचारियों को जनवरी माह का वेतन अब तक नहीं मिल पाया है. पिछले काफी समय से इस अखबार में कर्मचारियों की सैलरी लेट लतीफ आ रही है. जनवरी की सैलरी अब तक कर्मचारियों को नहीं मिली जबकि फरवरी महीना भी खतम होने जा रहा है. सैलरी की अनियमितता के चलते लोग इस अखबार के भविष्‍य को लेकर कयास लगा रहे हैं. इस अखबार के लखनऊ, गोरखपुर, कानपुर, बनारस तथा इलाहाबाद के कर्मचारियों को जनवरी का वेतन नहीं मिला है.

: अपडेट : जनसंदेश टाइम्‍स की हालत फिर खराब है. खबर है कि कर्मचारियों को जनवरी माह का वेतन अब तक नहीं मिल पाया है. पिछले काफी समय से इस अखबार में कर्मचारियों की सैलरी लेट लतीफ आ रही है. जनवरी की सैलरी अब तक कर्मचारियों को नहीं मिली जबकि फरवरी महीना भी खतम होने जा रहा है. सैलरी की अनियमितता के चलते लोग इस अखबार के भविष्‍य को लेकर कयास लगा रहे हैं. इस अखबार के लखनऊ, गोरखपुर, कानपुर, बनारस तथा इलाहाबाद के कर्मचारियों को जनवरी का वेतन नहीं मिला है.

बनारस में प्रबंधन ने पहले ही कोर कमेटी गठित करके पूरा मामला उन्‍हीं के सुपुर्द कर दिया है. अखबार अपने लांचिंग के बाद से ही घाटे में चल रहा है. आमदनी से ज्‍यादा खर्च के चलते प्रबंधन परेशान है. तमाम यूनिटों में अखबार के कर्मचारियों को दो तरीके से सैलरी दी जाती है. कुछ कर्मचारियों को नकद रकम उपलब्‍ध कराई जाती है तथा कुछ लोगों की सैलरी सीधे उनके खाते में आती है. बताया जा रहा है कि अभी दोनों तरह से सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को पैसा नहीं मिला है. जबकि कुछ दिन पूर्व ही बनारस एडिशन के एक वर्ष पूरा होने पर अखबार प्रबंधन ने लाखों रुपये खर्च किए थे, परन्‍तु अपने कर्मचारियों को देने के लिए उनके पास पैसे नहीं है.

बताया जा रहा है कि समय से सैलरी न मिलने के चलते सभी यूनिटों के कर्मचारी परेशान हैं. सूत्रों का कहना है कि कुछ लोग दूसरे संस्‍थानों में भी अपने लिए जगह ढूंढना शुरू कर चुके हैं. सैलरी आने के बारे में कर्मचारियों को कोई पुख्‍ता सूचना भी नहीं दी जा रही है, जिससे वे परेशान हैं. कुछ महीने पहले तक कर्मचारियों की सैलरी हर महीने की सात से दस तारीख के बीच तक आ जाती थी, पर अब ऐसा नहीं हो रहा है.

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